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सरकार पहल करे, वरना झारखंड हो जायेगा शून्य प्रधानाध्यापक वाला राज्य : शिक्षक संघ

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  • चार प्रतिशत मध्य विद्यालयों में ही प्रधानाध्यापक
  • 3096 पद पड़े हैं खाली, 130 प्रधानाध्यापक हैं कार्यरत

Ranchi : अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह को मांगपत्र प्रेषित कर प्रधानाध्यापकों की भारी रिक्ति को तत्काल भरने की मांग की है. संघ के अध्यक्ष विजेंद्र चौबे ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में प्रधानाध्यापकों के कुल 3226 पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 130 प्रधानाध्यक ही पद में कार्यरत हैं. ऐसे में जरूरी है कि 13 वर्षों की सेवा पूरी कर चुके स्नातकोत्तर योग्यताधारी शिक्षकों को प्रधानाध्यापकों में प्रोन्नत करने के लिए प्रोन्नति नियमावली में संशोधन किया जाये. अगर ऐसा नहीं होता है, तो वह दिन दूर नहीं, जब झारखंड देश में शून्य प्रधानाध्यापक वाला राज्य हो जायेगा. मांग करनेवालों में महासचिव राममूर्ति ठाकुर, मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद प्रमुख हैं.

चार प्रतिशत मध्य विद्यालयों में है प्रधानाध्यापक

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प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि राज्य के मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की घोर कमी है. लंबे समय से प्रोन्नतियों के लंबित रहने एवं प्रोन्नति नियमावली की जटिलता के कारण वर्तमान में प्रधानाध्यापक के कुल 3096 पद रिक्त पड़े हुए हैं. जबकि, कई अर्हताधारी शिक्षक आज बिना प्रोन्नति के ही सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में मात्र चार प्रतिशत मध्य विद्यालयों में ही प्रधानाध्यापक पदस्थापित हैं.

सात जिलों में एक भी प्रधानाध्यापक नहीं, चार में केवल एक

संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने कहा कि राज्य के कुल सात जिलों में एक भी प्रधानाध्यापक वर्तमान में पदस्थापित नहीं हैं. ऐसे जिलों मे हजारीबाग, चतरा, सरायकेला-खरसावां, लोहरदगा, साहेबगंज, रामगढ़, पाकुड़ शामिल हैं. वहीं, कुल चार जिलों में इनकी संख्या केवल एक है. इनमें कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, जामताड़ा जिला शामिल हैं. इसके अलावा धनबाद, लातेहार, गिरिडीह, गुमला, खूंटी, देवघर जिलों में प्रधानाध्यापकों की संख्या इकाई अंक में है.

प्रोन्नति नियमावली में तत्काल संशोधन की मांग

प्रेषित मांगपत्र में संघ ने कहा है कि वर्तमान में कार्यरत कई प्रधानाध्यापक निकट माह में सेवानिवृत्त होनेवाले हैं. दूसरी ओर मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की संख्या तेजी से शून्य की ओर बढ़ रही है, जो गुणवत्तायुक्त शिक्षा व्यवस्था के प्रतिकूल है. ऐसे में जरूरी है कि प्रधानाध्यापकों की इन 93 प्रतिशत रिक्तियों पर तत्काल अर्हताधारी शिक्षकों को प्रोन्नत करने के लिए प्रोन्नति नियमावली में संशोधन किया जाये. अगर समय रहते यह पहल नहीं की जाती है, तो झारखंड देश का इकलौता प्रदेश बन जायेगा, जहां प्रधानाध्यापकों की संख्या शून्य होगी.

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