Ranchi

धर्मांतरण कर चुके आदिवासियों को एसटी का जाति प्रमाणपत्र देना बंद करे सरकार : फूलचंद तिर्की

  • कहा- अपनी ही घोषणाओं को लागू नहीं कर पा रही सरकार

Ranchi : सरकार घोषणाएं तो कर रही है, लेकिन किसी भी घोषणा को जमीनी रूप नहीं दे पा रही है. कहने को आदिवासियों के लिए सरकार ने सरना धर्म कोड की अनुशंसा करने की कोशिश की थी, लेकिन फिर इस बारे में सरकार ने चुप्पी साध ली. उक्त बातें केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहीं. केंद्रीय सरना समिति की ओर से राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था. इस दौरान फूलचंद तिर्की ने कहा कि ऐसी घोषणाएं करके सरकार सिर्फ आदिवासियों का वोट पाना चाहती है. जबकि, इनके विकास के नाम पर सरकार चुप हो जाती है. उन्होंने कहा कि धर्मांतरण कर चुके आदिवासियों का जाति प्रमाणपत्र न बने, इसके लिए सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. जबकि, धर्मांतरित लोगों के जाति प्रमाणपत्र बनने के कारण अन्य लोग अपने अधिकारों से वंचित हो जा रहे हैं.

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ठग रही सरकार

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कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि सरकार सिर्फ आदिवासियों को ठगने का काम कर रही है. जबकि, सरना धर्म कोड लागू हो जाने से आदिवासी अपना हक और पहचान पा सकेंगे. इस ओर सरकार ध्यान नहीं देती. आनेवाले समय में भी अगर सरकार का यही रवैया रहा, तो समिति की ओर से उग्र आंदोलन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की सभ्यता-संस्कृति को बचाने के लिए जरूरी है कि सरना धर्म कोड लागू हो.

आदिवासियों के खत्म होने से बढ़ेगा खतरा

जगलाल पाहन ने कहा कि जल, जंगल, जमीन ही आदिवासियों की पहचान है. पिछले कुछ सालों में जिस तरह से जंगल और जमीन पर प्रहार हुए हैं, उससे ऐसा लगता है कि निकट भविष्य में आदिवासियों का अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा. ऐसे में संसार के लिए भी खतरा बढ़ेगा.

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ये हैं प्रमुख मांगें

सरना धर्म कोड लागू हो, धर्मांतरित आदिवासियों का अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र रद्द हो, सरना आदिवासियों को 27 प्रतिशत आरक्षण और वन भूमि पट्टा आदिवासियों को दिया जाये.

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ये थे उपस्थित

मौके पर चैतु उरावं, हान्दु भगत, महेंद्र बेग, निर्मल मुंडा समेत अन्य लेाग उपस्थित थे.

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