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‘आदिवासी इलाकों की प्रत्येक ग्रामसभा के सचिवालय के लिए सरकार करे बजट प्रावधान’

दलित-आदिवासी संगठनों ने जन बजट पर किया विमर्श

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Ranchi: हमारा गांव-हमारा बजट पर परिचर्चा के दूसरे दिन सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को संवैधानिक फ्रेम के अनुसार राज्य का आम बजट बनाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि सरकार को फिजूलखर्ची बंद कर ऐसी योजनाओं में बजट की राशि खर्च करनी चाहिए, जिससे हाशिए के लोगों को लाभ मिल सके.

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झारखंड के आगामी बजट परिचर्चा का आयोजन राष्ट्रीय दलित मनवाधिकार अभियान और भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था.

ग्रामसभा के सशक्तीकरण के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुनिल मिंज ने कहा कि प्रत्येक आदिवासी इलाके की प्रत्येक ग्रामसभा में ग्राम प्रधान का सचिवालय बनाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामसभा को पैसे, कार्य और कर्मचारी की सुविधा मुहैया नहीं करायी जाती है, तब तक कोई भी ग्रामसभा सशक्त नहीं बन पायेगी.

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महिला जेंडर बजट बनना चाहिए

सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि ने कहा कि झारखंड बजट में आदिवासी दलित महिलाओं के विकास के लिए महिला जेंडर बजट बनाया जाना चाहिए. इसके अभाव में किशोर लड़कियां काम की तलाश में अन्यत्र चली जातीं हैं.

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वीनी आजाद ने कहा कि कठिन परिथितियों में जीविकोपार्जन कर रही, आदिवासी दलित और अल्पसंख्यक एकल महिलाओें के लिए बजट में पैसे का प्रावधान किया जाना चाहिए.

सामाजिक कार्यकर्ता जीवन जगरनाथ ने कहा कि सरकारी प्राथमिक स्कलों में त्रिभाषा फॉर्मूला (मातृभाषा, राष्ट्रभाषा, अंग्रेजी भाषा) पढ़ाई सुनिश्चित कर इसके लिए बजट का प्रावधान किया जाना चाहिए.

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सामाजिक कार्यकर्ता सौरव ने कहा कि वनोपज को  वन विभाग के नियंत्रण से निकाल कर आदिवासी कल्याण विभाग के नियंत्रण में दिया जाना चाहिए.

स्कॉलरशिप की राशि पर्याप्त होनी चाहिए

छात्र नेता नौवरीन ने कहा कि पोस्ट मैट्रिक व प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप की राशि कम कर दी गयी. उन्होंने कहा कि छात्रों को उतने पैसे तो जरूर मिला चाहिए, जितना उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त हो.

वृतिचित्र निर्माता दीपक बाड़ा ने कहा कि आंगनबाड़ी और सरकारी स्कूलों में मिडडे मील के रूप में कम से दो दिन मड़ुआ से बनी खाद्य सामग्री दी जानी चाहिए, ताकि बच्चों का पोषण स्तर बना रह सके.

उन्होंने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी व स्कूल के पीछे परिसर में किचेन गार्डेन बनाये जाने के लिए बजट का आवंटन होना चाहिए, ताकि बच्चों को हरी सब्जियां रोजाना मिल सके.

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ये हुए शामिल

झारखंड के आगामी बजट पर परिचर्चा में झारखंड के विभिन्न जिलों के स्वंयसेवी व जन संगठन के लोग शामिल थे.

परिचर्चा में दलित आर्थिक अधिकार ओदालन-एनसीडीएचआर बिहार के राज्य समन्वयक धर्मदेव पासवान, झारखंड नरेगा वॉच के राज्य समन्वयक,  वरिष्ठ पत्रकार फैसल  अनुराग, भारत ज्ञान विज्ञान समिति से विश्वानाथ सिंह, आफीर से महादेव उरांव, विपिन मिंज, जेवियर हमसाय, निर्माला एक्का, शांति बड़ाईक, निशाद और तरूर, जोहार चाईबासा से मानकी तुबिद और कमल पूर्ति, बगईचा से रोज मेरी नाग समेत 50 प्रतिभागी शामिल हुए.

परिचर्चा का संचालन दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन-एनसीडीएचआर के राज्य संयोजक मिथिलेश कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन भोजन का अधिकार अभियान के राज्य संयोजक अशर्फी नंद प्रसाद ने किया.

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