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छोटे-मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करे सरकार, प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती

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  • रोजगार के नये साधन सृजित करने के लिए खनन, लघु-कुटीर उद्योग, औषधीय गुण वाले पौधों में है संभावना

Pravin Kumar

Ranchi: प्रवासी मजदूरों को रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने नीलाम्बर- पीताम्बर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना, वीर शहीद पोटो खेल विकास योजना शुरू की है.

वहीं मनरेगा योजना पर भी झारखंड सरकार का विशेष ध्यान है. कोरोना संकट के बाद घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती होगी. इससे निपटने के लिए रोजगार के नये क्षेत्र सृजित करने की जरूरत है.

झारखंड से पलायन कर गुजरात जाने वालों की संख्या सबसे अधिक

झारखंड से पलायन कर गुजरात जाने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या सबसे अधिक है. गुजरात पलायन करने वाले मजदूरों की संख्या दो लाख 12 हजार से अधिक है.

इसके बाद झारखंड के प्रवासी मजदूरों का पसंदीदा स्थान महाराष्ट्र है. वहां एक लाख 80 हजार से अधिक प्रवासी मजदूर आजीविका की तलाश में पलायन किये थे.

इसी तरह तमिलनाडु में 95 हजार, कर्नाटक में 82 हजार, तेलंगाना में 63 से अधिक मजदूर पलायन कर रोजगार के लिए वहां गये थे. इन राज्यों के अलावा देश के अन्य प्रदेशों में भी रोजगार के लिए लोग पलायन करते हैं.

झारखंड से पलायन करने वाले मजदूरों की संख्या 10 लाख से अधिक है. उपरोक्त आंकड़ा राज्य सरकार का है.

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10 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों के विकास में देते थे योगदान

झारखंड के प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में रहकर अपनी अजीविका चलाने के साथ-साथ उन प्रदेशों के विकास में भी अपना योगदान देते हैं. पलायन कर दूसरे प्रदेशों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर भवन निर्माण, हीरा उद्योग, राइस मिल, विभिन्न कंपनियों में ठेका मजदूर, वाहन चालक, प्लंबर, वस्त्र निर्माण उद्योग में काम करते हैं.

साथ ही वे सेवा क्षेत्र में धोबी, नाई, पान की दुकान, सब्जी विक्रेता जैसे कामों से भी जुड़े हुए थे. प्रवासी मजदूर जिस तरह से दूसरे प्रदेशों में अलग अलग सेवा क्षेत्रों से जुड़कर रोजी-रोजगार कर रहे थे, उसके समकक्ष संभावनाएं राज्य में उत्पन करनी होगी.

कोरोना संकट के दौर में राज्य लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार से जोड़ने के लिए झारखंड में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का सही दिशा में उपयोग करना होगा.

कहां कहां से बन सकते हैं रास्ते

झारखड़ वन और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है. कोयला, यूरेनियम, लौह अयस्क, बॉक्साइट जैसे खनिज पदार्थों से सम्पन्न है. एशिया का सबसे बड़ा जंगल सारंडा झारखंड में ही है.

राज्य में रोजगार के कई नये क्षेत्र भी सामने आ सकते हैं. इनमें लघु-कुटीर उद्योग, खनन एवं राज्य में मौजूद औषधीय गुण वाले पौधों के उपयोग के जरिए रोजगार सृजन किया जा सकता है. इसका देशव्यापी एवं वैश्विक वैश्विक बाजार मौजूद है.

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छोटे-मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करे सरकार

निर्माण उद्योग से अलग अन्य उद्योग हैं, जो बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मुहैया करा सकते हैं. वह है पुर्जे जोड़ने से संबंधित उद्योग. जिसके बल पर गुजरात जैसे राज्य में हिन्दी पट्टी के प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए जाते है.

इसके लिए थोड़े से प्रशिक्षण से लोगों को रोजगार मिलेगा, एक बेहतर जीवन का मौका भी. इससे यहां के लोगों के करोड़ों रुपये बचाये भी जा सकेंगे.

फिलहाल जब दूसरे राज्यों में तैयार उत्पाद हम खरीदते हैं तो राशि का लाभ वहां की सरकार को मिल जाता है.

किन योजनाओं में रोजगार उपलब्ध करने की है सरकार की योजना

राज्य सरकार के द्वारा शुरू की गयी 3 योजनाओं में से एक है- नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना. इसके अंतर्गत मेढ़बंदी, नाला का पुनर्जीवन कार्य,  सोख्ता गड्ढा का निर्माण जैसे काम किये जाने हैं.

इसके अंतर्गत मनरेगा एवं 15 वित्त आयोग के माध्यम से प्राप्त राशि का उपयोग किया जाना है. वहीं दूसरी योजना बिरसा हरित ग्राम योजना है जिसमें रैयती जमीन पर वृक्षारोपण, मिश्रित फलदार पौधे का रोपण जिसमें गैरमजरूआ एवं सड़क किनारे वृक्षारोपण किया जाना है.

वहीं वीर शहीद पोटो खेल विकास योजना की भी है. इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान का निर्माण और विकास किया जाना है.

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