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अनुबंध कर्मियों से सरकार करे संवाद, 6 लाख कर्मियों का भविष्य दांव परः अनुबंध कर्मचारी महासंघ

Ranchi: अनुबंध कर्मचारी महासंघ का ओर से बयान जारी कर कहा है कि राज्य में 6 लाख कर्मी अनुबंध पर काम कर रहे हैं.  वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार 29 दिसंबर को एक साल पूरा कर लेगी. सालभर में अब तक अनुबंध कर्मियों के भविष्य के मामले में हेमंत सरकार ने नहीं सोचा है. इसके साथ ही सरकार ने अनुबंध कर्मियों के साथ लम्बे समय से संवाद बंद कर रखा है. इसे लेकर अनुबंध कर्मियों में हताशा औऱ गुस्सा बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार की मंशा पर संदेह खड़ा हो रहा है.

पहली कैबिनेट से बंधी थी उम्मीद

अनुबंध कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधि औऱ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने कहा कि हेमंत सरकार बनने के बाद काफी उम्मीदें बंधी थीं. कैबिनेट की पहली बैठक में अनुबन्ध कर्मचारियों के मामले में सरकार ने पहल दिखायी थी. 15 अगस्त को सीएम के भाषण में भी अनुबंध कर्मियों की मांगों के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण दिखाया गया. पर अनुबन्ध कर्मियों की सेवा शर्त सुधार और नियमितीकरण के संबंध में जो हाई पावर कमिटी बनी, उसमें अनुबन्ध कर्मियों की ओऱ से बात रखने को एक भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मी को नहीं रखा गया है. इसमें केवल नौकरशाहों को ही स्थान दिया गया.

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कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों के मामले में दांव पेंच

अनुबन्ध कर्मियों के महासंघ के अनुसार सबको आशा थी कि हाइपावर कमिटी में महासंघ के अध्यक्ष विक्रांत ज्योति, केंद्रीय संयुक्त सचिव सुशील कुमार पांडेय सहित 5 अनुबंध कर्मियों को शामिल किया जायेगा. महासंघ ने रघुवर सरकार को सत्ता से बाहर करने की दिशा में काम किया था. महेश सोरेन ने कहा कि कमिटी के स्वरूप में और उसकी कार्यशैली को देखकर लग रहा है कि यह अनुबंध कर्मियों के मुद्दे को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी अड़चन लगाकर उलझाने के काम में लगी है.

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