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187 खनन कंपनियों से भी बकाया राशि वसूले सरकार, 20 हजार करोड़ रुपये है बकाया

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♦हाइकोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका

Ranchi : झारखंड में तकरीबन 187 आयरन ओर और मैंग्नीज ओर की कंपनियों के पास सरकार का तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये बकाया है. इनमें कई ऐसी कंपनियां हैं जो अपना स्टॉक नहीं बेच पायी हैं. इन सबके बावजूद ये कंपनियां खनन जारी रखे हुए हैं. इन कंपनियों में सीसीएल, बीसीसीएल, इसीएल सहित अन्य कंपनियां हैं. सीधे शब्दों में कहें तो इन कंपनियों से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है. इस मामले में अरुण कुमार दुबे ने झारखंड हाइकोर्ट में जनहित याचिका 1526/2020 दायर की है.

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स्टॉक बेचने में रुचि नहीं दिखा रहीं कंपनियां

झारखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार ने याचिका का हवाला देते हुए कहा कि कई खनन कंपनियां हैं जिनका स्टॉक अब भी पड़ा हुआ है पर वे नहीं बेच पा रही हैं. कई बेचने में रुचि नहीं दिखा रही हैं. उन्होंने कहा कि इन स्टॉक को बेच कर सरकार के खाते में पैसा जमा करना चाहिए. इससे इन कंपनियों से वसूली होगी और फंड की कमी पूरी हो जायेगी.

अधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि इस मामले में कुछ कंपनियों ने सरकार से स्टे ले लिया है. कुछ ने बकाया पैसा दिया है और कई कंपनियां ऐसी हैं जो बकाया पैसा देने में रुचि नहीं दिखा रही हैं. ऐसी कंपनियों में सीसीएल, बीसीसीएल एवं सेल जैसी कंपनियां हैं. बकाया पैसा रहने के बावजूद ऐसी कंपनियां खनन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा मामला किसी निजी कंपनी के साथ होता तो उसकी माइनिंग लीज रद्द कर दी जाती. उन्होंने कहा कि अगर शाह ब्रदर्स मामले में वसूली की जा सकती है तो ऐसा ही बाकी कंपनियों के मामले में भी किया जाना चाहिए.

राजीव कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का खनन कंपनियों से संबंधित माला राय एवं मेस्को केस मामले में आदेश था कि कंपनियों के लीज विच्छेद के बाद जो भी स्टॉक है उसे डिस्ट्रिक माइनिंग ऑफिसर की देखरेख में बेचा जाये और सारा पैसा सरकार के खाते में जमा किया जाये. इसी केस के आधार पर झारखंड सरकार ने शाह ब्रदर्स केस में निर्णय लिया है और कहा है कि शाह ब्रदर्स अपना स्टॉक बेचे और उससे प्राप्त पैसा राज्य सरकार के खाते में जमा करे.

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