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मनरेगा मजदूरों के खाते में सरकार ने डाले 160 करोड़ रुपये, बकाया मजदूरों का हुआ भुगतान

केन्द्र सरकार ने मजदूरी 171 रुपये से बढ़ाकर 194 रुपये की, अप्रैल से नयी दर लागू

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Ranchi :  राज्य पलायन, बेरोजगारी, मानव व्यापार के रूप में पहचान बना चुका है. ऐसे में राज्य में मनरेगा कानून ग्रामीण इलाके में रोजगार उपल्बध कराने और पलायन रोकने का सबसे कारगार कानून है.

कोविड-19 की वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के कारण झारखंड के करीब दो लाख मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हैं. इस बीच राज्य में मनरेगा मजदूरो के लिए के लिए अच्छी खबर आई है.

दो माह लंबित बजट के अभाव के कारण रुका हुआ मजदूरी  भूगतान कर दिया गया है. मजदूरी मद में राज्य के मनरेगा मजदूरो के खाते में 160 करोड रुपये का भुगतान कर दिया गया है.

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राज्य सरकार के प्रयास के बाद केन्द्र से मिली पहली किस्त

मनरेगा में केंद्रीय अनुदान के लिए राज्य सरकार की ओर से दो माह से प्रयास किया जा रहा था. लेकिन झारखंड को अन्य राज्यों के बाद केन्द्रीय अनुदान मिल सका. प्राप्त सूचना के अनुसार झारखंड को केंद्र सरकार ने इस वित्तीय वर्ष की पहली किस्त रिलीज कर दी है. जो मजदूरी मद में 602 करोड़  है.

राज्य सरकार ने दिया था निर्देश

केन्द्र से मजदूरी मद में 602 करोड़ राज्य को प्राप्त होते ही सबसे पहले का बकाया मजदूरी का भुगतान करने का हेमंत सरकार ने निर्देश दिया था.

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निर्देश के अलोक में केन्द्र से प्राप्त बजट के तुरंत बाद सोमवार 6 अप्रैल को 160 करोड़ बकाया मजदूरी सभी मजदूरों के खाते में डाल दिया गया. वहीं पहली अप्रैल से मनरेगा मजदूरो की मजदूरी केंद्र सरकार ने 171 रुपये से बढ़ाकर 194 रुपये कर दी है.

लॉकडाउन के बीच भी मनरेगा में सतर्कता से काम होगा

जहां एक ओर कोरोना संकट के कारण देशभर में लॉकडाउन कर दिया गया है, वहीं मनरेगा से रोजगार उपल्बध कराने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने राज्य सरकार को निर्देश जारी किये हैं.

इन शर्तों के अधीन मनरेगा कार्यों का क्रियान्वयन सभी जिलों में किया जा सकता है- 

  • वैसे मजदूर जिनके पास जॉब कार्ड नहीं है और मनरेगा के तहत कार्य करने को इच्छुक हैं, को अविलंब जॉब कार्ड निर्गत किया जाये.
  • सिर्फ व्यक्तिगत योजनाओं पर ही कार्य कराया जाए जहां एक साथ 5 से कम मजदूर ही कार्य कर सकें.
  • सभी मजदूरों को एक-दूसरे से कम से कम दो मीटर की दूरी बनाकर कार्य करने हेतु निर्देशित किया जाएगा.
  • मनरेगा दिशा-निर्देश के अनुरूप कार्यस्थल पर ही अपेक्षित सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए. इसके साथ ही कार्यस्थल पर सेनेटाइजेशन हेतु साबुन, हैंड वॉश एवं पर्याप्त पानी उपलब्ध हो. यह सुनिश्चित हो.
  • कार्यस्थल पर भीड़ नहीं होनी चाहिए.
  • बीमार व्यक्ति, 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को कार्य में नहीं लगाया जाये.
  • वैसे व्यक्ति जो पिछले 15 दिनों में दूसरे राज्य जिला से वापस लौटे हैं उनके नाम से मस्टर रोल का सृजन न किया जाय. उन्हें नजदीकी आइसोलेशन केंद्र में रखा जाये.
  • व्यक्तिगत योजना में मुख्य प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्माणाधीन आवास, पूर्व से चालू पशु-शेड की योजना, नाड़ेप कम्पोस्ट पिट्स, बागवानी से सबंधित कार्य (व्यक्तिगत योजना), जल संरक्षण की योजना आदि पर कार्य कराया जा सकता है.

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