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सरकार ने जीएम लैंड की रसीद काटने का दिया आदेश

अवैध और संदेहास्पद भूखंडों की भी कटेगी रसीद

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Akshay Kumar Jha
Latehar/Ranchi : लातेहार जिले के महुआडांड़ की प्रांसिसका कुजूर को समझ में नहीं आ रहा है कि उनके साथ यह क्या हो रहा है. सरकार के एक फैसले से उनके हाथ से वह जमीन चली गयी, जो उन्होंने काफी तकलीफ में रहकर खरीदी थी. उन्होंने एक भूखंड अशोक साव से खरीदा, 2015 तक लगान भी दिया. लेकिन, हाल के हुए सर्वे की वजह से पंजी-दो ऑनलाइन होने पर उसकी डिमांड स्थगित कर दी गयी थी. अब जमीन बेचनेवालों ने एक बार फिर से उनकी जमीन पर धावा बोल दिया है. दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई. महुआडांड़ एसडीएम की अदालत में विविध वाद संख्या 54/2017-18 विचाराधीन है तथा दोनों पक्षों में घोर तनाव है. कभी भी बड़ी घटना हो सकती है.
यह लातेहार का एक केस है. लेकिन, गौर करनेवाली बात है कि लातेहार में ऐसे कई केस हैं, जिनसे वहां अशांति फैलने का डर हर वक्त सता रहा है. सिर्फ तीन साल में वहां 3087 ऐसे मामले सामने आये हैं, जो जमीन से संबंधित विवाद हैं. बंदोबस्त पदाधिकारी चाहकर भी ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं. पूरे जिले की बात करें, तो अब तक ऐसे 10898 मामले लंबित हैं, जिनका निपटारा बंदोबस्त पदाधिकारी को करना है. जानकारों का कहना है कि शायद ही पूरे मामले का निपटारा हो सके. ऐसे में कैबिनेट की तरफ से एक और फैसला आया है, जिसके तहत वैसे जीएम लैंड की रसीद काटी जायेगी, जिनकी रसीद कटनी बंद हो चुकी थी.

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बैकफुट पर क्यों आयी सरकार

मई 2016 में सरकार की तरफ से एक सर्कुलर जारी किया गया था. सर्कुलर में साफ तौर से कहा गया था कि उसी जीएम लैंड की लगान रसीद काटी जायेगी, जो 01.01.1946 से पहले जमीन मालिक को हस्तांतरित की गयी हो. 01.01.1946 के बाद किसी जीएम लैंड को हस्तांतरित किया गया है, तो रसीद कटाने के लिए उस जमीन के सारे कागजात दिखाने पड़ेंगे. सीओ के बाद एलआरडीसी और एलआरडीसी के बाद वह मामला एसी तक जाता था. अगर मामला जायज पाया जाता था, तो लगान रसीद की कार्यवाही की जाती थी. लेकिन, अमूमन मामलों में यह देखा जाता था कि जमीन मालिक 01.01.1946 के बाद के सही कागजात सरकारी अधिकारियों के पास नहीं जमा कर पाते थे. ऐसे में जीएम लैंड की लगान रसीद ही कटनी बंद हो गयी थी. लेकिन, तीन जुलाई को कैबिनेट ने एक फैसला लिया और मीडिया के सामने ब्रीफ किया गया कि जिस जीएम लैंड की रसीद पहले नहीं कटती थी, उसकी रसीद अब फिर से काटी जायेगी. ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा क्या थी. आखिर 2016 में जीएम लैंड की रसीद कटनी बंद क्यों हुई, बंद होने के दो साल बाद बिना किसी वजह से फिर से रसीद कटनी क्यों शुरू हो रही है?

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अवैध और संदेहास्पद जमाबंदी की भी कटेगी रसीद

तीन जुलाई की कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के सचिव की तरफ से सभी जिले के डीसी और हर प्रमंडल के कमिश्नर को चिट्ठी भेजी गयी है. सरकार की चिट्ठी में साफ तौर से उल्लेख है कि कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि उस जमीन की भी रसीद काटी जायेगी, जो जमीन अवैध और संदेहास्पद जमीन की लिस्ट में है. 13.05.2016 को सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया था, जिसमें साफ उल्लेख था कि अभियान चलाकर वैसी जमीन का पता लगायें, जिनकी जमाबंदी या तो अवैध है या फिर संदेहास्पद. इस आदेश के बाद से ही ऐसे भूखंडों की रसीद कटनी बंद हो चुकी थी. लेकिन, 03.07.2018 की कैबिनेट की बैठक में लिये गये फैसले के बाद अब सभी जीएम लैंड की रसीद कटने का आदेश दिया गया है.

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