JharkhandRanchi

सरकार को चाहिए 6.30 लाख अंडे, नहीं दे पा रहा कोई महिला स्वयं सहायता समूह

  • झारखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ कई दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही
  • जून से महिला स्वयं सहायता समूहों से अंडे लेने की चल रही तैयारी

Ranchi: झारखंड के 39 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को अंडे की आपूर्ति करने के लिए राज्य की महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) का चयन कर पाना सरकार के लिए मुसीबत बन गया है. महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से झारखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (जेएसएलपीएस) के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई है, पर ऐसा कोई समूह नहीं मिल रहा है, जिससे सालाना 65 करोड़ रुपये की लागत से 32.76 लाख अंडे खरीदे जा सकें.

इसे भी पढ़ें – दिशोम गुरु की हार से मर्माहत नेता, कार्यकर्ता व समर्थक हेमंत को सोशल मीडिया में दे रहे सलाह, नजदीकियों पर साध रहे निशाना

थोक विक्रेताओं से भी साधा जा रहा संपर्क

सरकार की तरफ से विकेंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत अन्य थोक विक्रेताओं के साथ भी संपर्क साधा जा रहा है, जो महिला स्वयं सहायता समूहों के द्वारा अंडे की आपूर्ति करने के बाद, आंगनबाड़ी केंद्रों को आपूर्ति कर सकें. जानकारी के अनुसार एकाध बड़े समूह जो गुमला के सिसई में कार्यरत भी हैं, उनकी भी सप्ताह में 6.30 लाख अंडे की आपूर्ति की कैपिसिटी नहीं है. विभाग के सचिव अमिताभ कौशल के अनुसार क्रिस्टी फ्राइडग्राम्स कंपनी से करार समाप्त होने के बाद सरकार ने महिला एसएचजी से अंडा खरीदने का निर्णय तो लिया है, पर इसमें काफी दिक्कतें हो रही हैं. जेएसएलपीएस के अधीन झारखंड के 2.20 लाख ग्रामीण परिवार जुड़े हैं, जो बकरी पालन और मुर्गी पालन से जुड़े हैं. पर ये थोक आधार पर अंडे की आपूर्ति करने की क्षमता नहीं रखते हैं. सरकार के आंकड़ों की मानें, तो 2018-19 में जेएसएलपीएस की तरफ से 54 प्रखंडों के 19,694 गांवों के 1.74 महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका मिशन के कार्यक्रमों से जोड़ा गया है. विभाग का दावा है कि 21.72 लाख परिवारों को मिशन से जोड़ा गया है. विभाग का दावा है कि 2012-13 में जहां सात प्रखंडों के 18,175 परिवारों को आजीविका मिशन से जोड़ा गया था, वह बढ़ कर 20 लाख से ऊपर हो गया है.

advt

इसे भी पढ़ें – आचार संहिता खत्म होते ही सीएम इलेक्शन मोड में, विपक्ष अब तक फंसा है अंतर्कलह में

78653 स्वयं सहायता समूहों को दी गयी क्रेडिट लिंकेज

सरकार की तरफ से 78,653 महिला स्वयं सहायता समूहों को बैंकों की तरफ से क्रेडिट लिंकेज (सुक्ष्म ऋण) की सहायता दी गयी है. इस क्रम में इन समूहों को 658 करोड़ रुपये का कर्ज भी दिया गया. पर बकरी पालन, सुअर पालन और मुर्गी पालन के प्रोजेक्ट कम हैं. 4463 महिला समुदाय के बीच सामंजस्य स्थापित किया गया है. 21.03 लाख परिवारों को सखी मंडलों से जोड़ा गया है.

इसे भी पढ़ें – रांची के होटल रॉयल रेसिडेंसी में एटीएस कर रही छापेमारी, 7 हथियार सप्लायरों को हिरासत में लिया

adv
advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button