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सरकार ने नियम को बनाया ऐसा, जिससे हो ही नहीं सकती अयोग्य नगर निकाय जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई

- अयोग्य साबित हो चुके नगर निकाय जनप्रतिनिधियों की चांदी

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: नगर विकास विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच ऐसा पेंच फंसा है, जिससे राज्य भर में किसी भी अयोग्य नगर निकाय के जनप्रतिनिधि पर कार्रवाई हो ही नहीं सकती. दोनों विभाग एक दूसरे के साथ मामले को लेकर चिट्ठी-चिट्ठी खेल रहे हैं. दरअसल 19/01/2018 से पहले नगर निकाय के किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ शिकायत आने पर राज्य निर्वाचन आयोग ही शिकायतों की सुनवाई और कार्रवाई करता था. लेकिन 19/01/2018 को नगर विकास विभाग के लिए सरकार यानि कैबिनेट की तरफ से एक आदेश निकाला गया.

आदेश के मुताबिक, अब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसे मामलों पर सुनवाई और कार्रवाई नहीं कर सकता. कहने को तो सरकार की तरफ से नगर विकास विभाग को एक्ट की नियमावली 18(2) में संशोधन कर अयोग्य जनप्रतिनिधियों सुनवाई और कार्रवाई की शक्ति दे दी गयी. लेकिन, जब कार्रवाई करने की बात आयी तो विभाग राज्य निर्वाचन आयोग के पास नियमों का रोना रो रहा है.

कांति देवी, वेद प्रकाश सिंह और भोलू पासवान की मौज

कोडरमा के नगर पंचायत अध्यक्ष कांति देवी पर संपत्ति छिपाने का आरोप है. इस बाबत राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत 19 जनवरी से पहले आयी थी. सुनवाई चल रही थी. आरोप साबित भी हो गया. लेकिन कार्रवाई नहीं हो पायी. कार्रवाई के लिए विभाग आयोग को लिख रहा है और आयोग नियमावली बदलने की वजह से कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है. ऐसा ही मामला रांची के वार्ड 39 के पार्षद वेद प्रकाश सिंह का है. उनके खिलाफ शिकायत की पुष्टि उनकी बेगुनाही के लिए दिए गए सबूत से ही साफ हो रहे हैं. चास के मेयर भोलू पासवान के खिलाफ भी सुनवाई पूरी हो चुकी है. कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग राज्य निर्वाचन आयोग को लिखा है. लेकिन नगर विकास और चुनाव आयोग की नियमों की लड़ाई में तीनों जनप्रतिनिधि कुर्सी का सुख भोग रहे हैं.

इन तीनों के अलावा आदित्यपुर मेयर विनोद श्रीवास्तव और वार्ड 27 पार्षद पांडी मुखी के खिलाफ भी संपत्ति की गलत जानकारी देने का आरोप है. रांची के वार्ड 16 की पार्षद नजीमा रजा के निर्वाचन को भी चुनौती दी गई है. यहां सबसे मजेदार बात यह है कि सभी के खिलाफ शिकायत उनके जनप्रतिनिधि बनने के एक महीने के अंदर की गयी है. चास मेयर भोलू पासवान का मामला 2015 से ही अटका हुआ है. हाल ही में एक शख्स की पिटाई के मामले में भोलू पासवान जमानत पर छूट कर बाहर आए हैं.

इग्नोर करें विभाग की बातः  आयोग के अधिवक्ता

नगर निकाय के आरोपियों पर आरोप साबित होने पर जब कार्रवाई की बारी आयी तो नगर विकास विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को कार्रवाई के लिए लिखा. 13/08/2018 को निर्वाचन आयोग ने विभाग से नियमावली का हवाला दिया और कार्रवाई करने में अपनी असक्षमता जतायी. आयोग ने विभाग से नियमों में बदलाव करने को कहा. विभाग की तरफ से आयोग को 03/12/2018 को लिखा गया कि रांची के वार्ड-39 के पार्षद वेद प्रकाश सिंह के मामले में आयोग कार्रवाई कर सकता है. क्योंकि कैबिनेट की तरफ से 24/10/2018 को ही नियमावली में बदलाव हो चुके हैं.

इधर विभाग की चिट्ठी, आयोग के पास आने के बाद आयोग ने अपने अधिवक्ता से राय ली. राय में अधिवक्ता ने साफ कहा कि नगर विकास विभाग जिस तरीके से एक्ट में संशोधन ना करते हुए नियमावली में संशोधन कर राज्य निर्वाचन आयोग को कार्रवाई करने के लिए लिख रहा है, उसमें काफी विरोधाभास है. किसी एक्ट की नियमावली एक्ट से बढ़कर नहीं होती. अगर ऐसा कुछ करने को नगर विकास विभाग आयोग को कहता है, तो उसे आयोग की तरफ से नजरअंदाज किया जाना चाहिए.

केस स्टडी
मामला कितना गंभीर है और सरकार की तरफ से इसे कैसे हल्के में लिया जा रहा है, इसे समझने के लिए रांची के वार्ड संख्या 39 के वार्ड पार्षद वेद प्रकाश सिंह का उदाहरण लिया जा रहा है.

आरोपः धूर्वा थाना में एक केस इनके खिलाफ दर्ज है. लेकिन इस बात को चुनाव के दौरान शपथ पत्र में छिपाया गया.

तथ्यः वेद प्रकाश सिंह ने विभाग को अपनी सफाई में कहा है कि वो केस उनके नाम पर नहीं है. बल्कि किसी वेद सिंह के नाम पर है. लेकिन साथ ही में वेद प्रकाश सिंह ने ऐसे साक्ष्य विभाग को दिए हैं. जिससे यह साबित होता है कि वो केस की हाजिरी में बराबर जाते रहे हैं. इसके अलावा दर्ज केस में उनका आधार नंबर और पता सभी इस बात को प्रमाणित करता हैं कि उनपर केस चल रहा है. लेकिन शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं है.

आरोपः शपथ पत्र में टोयोटा फॉरच्यूनर होने की बात छिपायी. शपथ पत्र में एक ही गाड़ी का उल्लेख है, जबकि है इनके पास दो.

तथ्यः वेद प्रकाश सिंह के नाम दो गाड़ियां हैं. Jh01ch-8040 औरJh01ct-8040. लेकिन शपथ पत्र में सिर्फ JH01CH-8040 का ही उल्लेख है. जबकि JH01CT-8040 (Toyota, Fortuner) का कहीं उल्लेख नहीं है. वहीं विभाग से शिकायत होने के बाद वेद प्रकाश सिंह, अपनी गाड़ी को अपने ही भाई को बेच देने की बात विभाग से कह रहे हैं.

आरोपः प्लॉट होने की बात वेद प्रकाश सिंह ने छिपायी

तथ्यः वेद प्रकाश सिंह ने दायर शपथ पत्र में कहा है कि उनके पास सिर्फ जमीन का प्लॉट है. जबकि इनके नाम से 10 डिसमिल की जमीन नगड़ी के सेम्बो में हैं. नगड़ी की जमीन का ब्योरा वेद प्रकाश सिंह ने अपने शपथ पत्र में नहीं दिया है.

विरोधियों की साजिश हैः वेद प्रकाश सिंह

रांची के वार्ड संख्या 39 के पार्षद वेद प्रकाश सिंह का कहना है कि ऐसी कोई भी गलत जानकारी मेरे तरफ से विभाग को नहीं दी गयी है. यह सब मेरे विरोधियों की चाल है. मुझे जनता ने रिकॉर्ड वोट से जिताया है. इसलिए वो लोग बोखलाए हुए हैं. हारने के बाद उनके पास दूसरा कोई काम नहीं बचा है. आज भी चुनाव हो तो मैं रिकॉर्ड मतों से जीतूंगा.

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