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SC/ST उपयोजना के पैसे का इस्तेमाल सामान्य मदों में कर रही सरकार : बलराम

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Ranchi : राज्य में शेड्यूल्ड कास्ट (एससी) कंपोनेंट की 33 स्कीमों को छोड़कर बाकी 206 स्कीम पर एससी समुदाय के आउटकम के स्तर पर कोई प्राथमिकता नहीं दी जा रही है. वहीं, अनुसूचित जनजाति (एसटी) की 273 स्कीमों में से 227 स्कीम में जनजातीय समुदाय का जिक्र तक नहीं. राज्य में एससी-एसटी समुदाय के लिए किये गये बजट आवंटन में  आउटकम के स्तर पर ध्यान दिया जाता है, जिसमें संख्यात्मक लक्ष्य की प्राप्ति पर ध्यान दिया जाता है. इसके कारण समुदाय पर किये गये बजट का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है. इससे जाति आधारित भेदभाव, भौगोलिक असमानता का शिकार राज्य हो रहा है. उक्त बातें टीएसपी और एससीएसपी योजना का अध्ययन करनेवाले सुनील मिंज ने एचपीडीसी में झारखंड बजट, वंचित समुदाय और उनकी आकांक्षाएं विषय पर आयोजित कार्यशाला के दौरान कहीं.

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भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि झारखंड राज्य में खनिजों का भंडार है, लेकिन यहां रहनेवाले खनिजों के मालिक आदिवसी और एससी समुदाय गरीब हैं. उन्होंने इसका कारण आदिवासी उपयोजना/एससी उपयोजना के पैसे का इस्तेमाल सामान्य मदों में खर्च कर विचलन किये जाने को बताया. उन्होंने कहा कि आज सरकार कॉरपोरेट से चलती है और कॉरपोरेट आदिवासी इलाकों के खनिजों की लूट से. इसलिए आज इन समुदायों में सरकार के प्रति आक्रोश है. यह जन आक्रोश तभी खत्म होगा, जब आदिवासी/एससी उपयोजना में आवंटित पैसे का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ इन वंचित समुदायों के लिए किया जायेगा.

आर्थिक आतंकवाद से पीड़ित है वंचित समुदाय : अभय खाखा

कार्यशाला में नेशनल कैंपेन फॉर दलित ह्यूमन राइट्स के अभय खाखा ने कहा कि आज देश का वंचित समुदाय, विशेषकर आदिवासी, एससी, अल्पसंख्यक और महिला आर्थिक आतंकवाद से पीड़ित हैं. अर्थशास्त्री के अध्ययन के अनुसार 2018 में 5 प्रतिशत धनाढ्य लोगों के पास देश की 95 प्रतिशत संपत्ति पर कब्जा है.

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SC/ST उपयोजना के पैसे का इस्तेमाल सामान्य मदों में कर रही सरकार : बलराम

जन बजट बनाया जाना चाहिए : प्रियंका

पीपुल्स बजट इनिशिएटिव, दिल्ली की प्रियंका सामी ने कहा कि बजट विश्लेषण एक हथियार के समान है. अगर इसका इस्तेमाल सामाजिक कार्यकर्ता सही तरीके से करें, तो आदिवासी/एससी उपयोजना के पैसे का डायवर्सन रुक सकता है. अपने स्वागत भाषण में उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट के निर्माण में आम जनता की भागीदारी होनी चाहिए. आज का बजट निर्माण बंद कमरे में सिमटकर रह गया है. बजट घोषणा के पूर्व हर मुद्दे पर सम्मेलन आयोजित करने के बाद जन बजट बनाया जाना चाहिए. यह मुद्दा तभी सार्थक होगा, जब सभी राजनीतिक पार्टियां जनता की मांगों को अपने घोषणा पत्रों में शामिल करेंगे.

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सामान्य मदों में पैसे खर्च कर अतिरिक्त आवंटन का विचलन कर रही सरकार : एके सिंह

लीड्स संस्था के निदेशक एके सिंह ने कहा कि वर्तमान झारखंड बजट में जहां आदिवासी समुदायों के लिए 26.63 प्रतिशत का आवंटन आदिवासी उपयोजना में होना चाहिए, वहां इसका आवंटन 45 प्रतिशत कर दिया गया है. झारखंड सरकार अतिरिक्त आवंटन का विचलन इस राशि को सामान्य मदों में खर्च करके कर रही है, जिसका लाभ दूर-दूर तक आदिवासी समुदाय को मिलनेवाला नहीं है.

भाजपा सरकार ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए बजट का प्रतिशत कम कर दिया : अफजल अनीस

कार्यशाला में यूनाइटेड मिल्ली फोरम के महासचिव अफजल अनीस ने कहा कि जबसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार झारखंड में बनी है, तब से मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए बजट का प्रतिशत कम कर दिया गया है. पिछले चार सालों में मदरसा स्कूलों में मध्याह्न भोजन, वजीफा और नि:शुल्क किताबों का आवंटन बंद कर दिया गया है. इसके अलावा गणेश रवि, विश्वनाथ सिंह, अशर्फी नंद प्रसाद, चरण कुमार, मुनि हांसदा, इमिलिया हांसदा, आलोका और जेवियर हमसाय ने भी अपनी बातें रखी. इस कार्यशाला में मुख्य रूप से सौरव कुमार, सपना सुरीन, प्रेमचन्द मुर्मू, ललित मुर्मू, दीपक बड़ा, आकाश रंजन, राकेश रोशन किड़ों, फिलिप कुजूर, रेजन गुड़िया, जेम्स हेरेंज आदि उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन एनसीडीएचआर के उप राज्य संयोजक मिथिलेश कुमार ने किया. जबकि, धन्यवाद ज्ञापन एनसीडीएचआर के राज्य संयोजक सुनील मिंज ने किया.

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