न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

मिट्टी संग्रह के बहाने आदिवासियों के धार्मिक स्थल को निशाना बना रही है सरकारः आदिवासी संगठन

करमा उरांव ने कहाः सिर्फ शगूफा है, चुनाव नजदीक देखकर सरना धर्मलंबियों को रिझाने का प्रयास कर रहे रघुवर   

2,791
  • सरना स्थल से मिट्टी संग्रह के विरोध में आदिवासी संगठन देंगे महाधरना
  • 23 जनवरी को एक ओर मिट्टी लेकर सीएम करेंगे पदयात्रा दूसरी ओर आदिवासी देंगे महाधरना 
  • सरना स्थल से मिट्टी संग्रह क्यों, मंदिर-मस्जिद और चर्च से होना चाहिए था मिट्टी का संग्रह

pravin/ chhaya

Ranchi : झारखंड सरकार के द्वारा 23 जनवरी को शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने के मकसद से सभी गांवों से मिटटी संग्रहित रांची में लाने का कार्यक्रम तय कर रखा गया है. केंद्रीय सरना समिति का एक गुट सरकार की घोषणा में बढ़चढ़ कर भगीदारी कर रहा है. जबकि दूसरा गुट इसे चुनावी एडेंडा बता कर इसका विरोध कर रहा है. आदिवासी बुद्धिजीवियों द्वारा इसे सरना धर्म व संस्कृति पर हमला बताया जा रहा है. बता दें कि मिटटी संग्रह का विरोध बिरसा मुंडा के गांव उलिहातु में भी किया जा चुका है. आदिवासीयों के धार्मिक स्थल से मिट्टी लाने के लिए पहान और पूजार से अनुमति नहीं लेने पर भी पहान नाराज चल रहे हैं.

hosp1

क्या है मामला

राज्य सरकार के की ओर बिरसा मुंडा संग्रहालय में वीर शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है. इस निर्णय के आलोक में बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, दिवा-किसुन, गया मुंडा, जतरा टाना भगत, बुधु भगत, तेलंगा खड़िया की प्रतिमा स्थापित की जानी है. इसके लिए राज्य के सभी गांव से मिट्टी संग्रहित कर प्रतिमा में इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है. इस संबंध में राज्य सरकार की आदेश के आलोक में कई जिलों के उपायुक्त को आदेश पत्र भी निर्गत किया गया है. इस काम में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर के सरकारी कर्मी को लगाने का आदेश निर्गत किया गया. आदेश में मिट्टी का संग्रहण कर 2 फोटोग्राफ के साथ लाने के लिए कहा गया है.

सरकार और आदिवासी संगठन फिर आये अमने-समाने

एक ओर 23 जनवरी को मिट्टी को लेकर मोरहाबादी मैदान से बिरसा मुंडा जेल परिसर तक मुख्यमंत्री रघुवर दास पदयात्रा करेंगे वहीं, दूसरी ओर विभिन्न आदिवासी संगठनों की ओर से 23 जनवरी को ही, बिरसा चौक रांची में इसके विरोध में महा धरना देने की घोषना की गयी है.

क्या कहते हैं आदिवासी संगठन के लोग

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने न्यूजविंग से बातचीत में कहा कि सरकार की और से वीर शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय हुआ है. जिसमें केन्द्रीय सरना समिति की ओर से भी योगदान दिया जा रहा है. इसके लिए हजारीबाग, गुमला, लोहदगा एवं रांची के आसपास के इलाके से सरना स्थल से पवित्र मिट्टी रांची लायी जा रही है. सरकार की ओर से पत्र मिलने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि संगठन को कोई पत्र नही मिला है. संगठन बैठक कर स्वयं सरना स्थल से मिट्टी इकट्ठा करने का काम कर रहा है.

 

भाजपा के पिछलग्गू सरना संगठन आदिवासियों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं 

देव कुमार धान ने कहा सरना स्थल में सरहुल के समय पूजा की जाती है. आदिवासी परंपरा के अनुसार किसी भी कीमत पर सरना और मसना स्थल की मिट्टी दूसरे स्थान पर नहीं ले जायी जा सकती है. क्योंकि सभी गांव का अपना सरना और मसना स्थल होता है. सरकार के द्वारा शहीदों के सम्मान देने की बात है, तो पवित्र मिट्टी सिर्फ आदिवासियों के धार्मिक स्थल का ही क्यों. इसमें मंदिर-मस्जिद और चर्च की मिट्टी भी क्यों नहीं शामिल की जा रही है. सरकार आदिवासियों को भ्रमित करने का काम कर रही है. इसमें भाजपा के कुछ पिछलागू सरना संगठन भी लगे हुए हैं.

नीलाम्बर-पीताम्बर का गांव डूबा कर शहीदो का कैसा सम्मान

आदिवासी संघर्ष मोर्चा के संयोजक करमा उरांव कहते हैं, सरना स्थल से मिट्टी संग्रहित करने का ये पहला मामला है. सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा मिट्टी संग्रहित करने का प्रोपगेंडा कर आदिवासीयों को भ्रमित करने का काम किया जा रहा है. जबकि आज भी आदिवासियों को राज्य में संवैधानिक अधिकार नहीं मिल रहा है. पांचवी अनुसूची क्षेत्र के लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. लैंड बैंक में आदिवासियों की जमीन डाल दी गयी है. वहीं नीलाम्बर-पीताम्बर के गांव चेनो सरिया को भाजपा सरकार मंडल डेम में डूबा रही है. ऐसे में यह शहीदों को सम्मान देने का मामला नहीं, बल्कि चुनावी प्रोपगेंडा है.

 

आदिवासियों के धार्मिक स्थल को निशाना बना रही है भाजपा: लक्ष्मी नारायण मुंडा

लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा, रघुवर सरकार द्वारा राज्य के विभिन्न गांव के सरना स्थल और जाहेर धाम से मिट्टी लाकर जमा किया जाने का दूसरा अर्थ है आदिवासियों को भ्रमित किया जाना. इस बहाने सरकार अपने को आदिवासी विरोधी व जन विरोधी के आरोप से छिपाने का प्रयास कर रही है. रघुवर सरकार अगर सही मायने में प्रकृति पूजक सरना आदिवासियों का भला करना चाहती है, तो आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति परंपरा में हस्तक्षेप न करे. आदिवासीयों की लूटी गयी जमीन को वापस दिलाने का काम करे. सरकार लूटने का काम बंद करके मिट्टी लाने की नौटंकी बंद करे.

इसे भी पढ़ेंः एसटी-एससी थाना के समक्ष धरने पर बैठे आदिवासी युवक, कोतवाली थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की कर रहे थे मांग

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: