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‘नर्क’ से आजाद हुईं 22 लड़कियों की जिंदगी को मिली नयी रोशनी

  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर एक्सपोर्ट कंपनी में मिली नौकरी
  • सचिवालय में आयोजित समारोह में सौंपा गया नियुक्ति पत्र

Ranchi : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर राज्य में रोजगार बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि झारखंड अपनी खनिज संपदा के कारण कभी सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था. पहले की सरकारों का जोर खनन पर होता था, लेकिन हमारी सरकार खनन के साथ रोजगार पर भी जोर दे रही है. मुख्यमंत्री ने यह बात तमिलनाडु से रेसक्यू करायी गयी 22 लड़कियों को राजधानी के ओरमांझी स्थित किशोर एक्सपोर्ट में काम करने के लिए नियुक्ति पत्र सौंपने के दौरान कही.

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सरकार ने चलायी हैं तीन-चार योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार का विशेष जोर पहले ही रोजगार सृजन जैसे कार्यक्रमों पर है. सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में तीन-चार योजनाएं चला रखी हैं. हाल ही में शुरू की गयी मुख्यमंत्री शहरी श्रमिक योजना झारखंड में मील का पत्थर साबित हुई है. योजना के तहत रोजगार नहीं मिलने पर 15 दिनों के अंदर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है. कार्यक्रम में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह व उद्योग सचिव पूजा सिंघल भी उपस्थित थे.

हेमंत सोरेन ने कहा कि कोरोना काल में उन्हें इस बात की जानकारी पहली बार मिली कि झारखंड से लाखों लोग रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं. जब उन्होंने इससे जुड़े आंकड़ों को देखा, तो उन्हें काफी आश्चर्य हुआ कि खनिज संपदा से भरपूर इस राज्य में बेरोजगारी चरम पर है. सरकार बनने के बाद ही उन्होंने रोजगार सृजन पर ध्यान दिया. इसी कड़ी में पिछले दिनों जब उनकी सरकार को पता चला कि तमिलनाडु में राज्य की 22 लड़कियों से जबरन काम कराया जा रहा है, तो सरकार ने पहल करते हुए लड़कियों को न केवल वहां से रेस्क्यू कराया बल्कि झारखंड में रोजगार भी देने की व्यवस्था की. मुख्यमंत्री ने कहा कि किशोर एक्सपोर्ट में इन लड़कियों को प्रतिमाह 10,600 रुपये वेतन दिया जायेगा. यह वेतन कोरोना को देखते हुए काफी सकारात्मक है. उन्होंने कहा कि लड़कियों को 1 माह का अग्रिम वेतन भुगतान कंपनी द्वारा किया जा रहा है.

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वापस लौटना चाहती थीं लड़कियां

बता दें कि तमिलनाडु में लॉकडाउन का फायदा उठा कर झारखंड की 22 लड़कियों से जबरन सिलाई और कटाई काम कराया जा रहा था. सभी लड़कियां पिछले 6 महीने से अपने घर झारखंड वापस लौटना चाह रही थीं, लेकिन कन्याकुमारी स्थित यूनिसोर्स ट्रेंड इंडिया कंपनी प्रबंधन उनकी बातों को अनसुना करता रहा. उनसे ओवर टाइम भी कराया जा रहा था. यहां तक कि लड़कियों की अपने अभिभावकों से बमुश्किल बात हो पाती थी. परेशान इन लड़कियों के अभिभावकों ने श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता से संपर्क किया. मंत्री के आदेश पर राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष, रांची ने स्थानीय एनजीओ की मदद से संबंधित कंपनी से संपर्क किया और सभी लड़कियों की सफल वापसी करायी. ये लड़कियां बीते 11 अक्टूबर को दिल्ली के रास्ते रांची लायी गयी थीं.

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