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सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है : राजेंद्र मुंडा

कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन के बीच समन्वय नहीं, सुखाड़ के गलत आंकड़े प्रस्तुत किये गये

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Ranchi : अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की ओर से शनिवार को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया. धरना 18 सूत्री मांगों के लिए दिया गया. जिसकी अध्यक्षता राजेंद्र सिंह मुंडा ने की. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है. किसी न किसी तरह राज्य में ऐसे नियम कानून लागू किये जा रहे हैंं जो किसान विरोधी हैं.

उन्होंने कहा कि सरकारी रिपोर्ट में जो सुखाड़ के आंकड़ें सरकार की ओर से प्रस्तुत की गयी है, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है. सरकार को चाहिए की पूरे राज्य को सुखाड़ क्षेत्र घोषित करें. उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन समिति के बीच कोई समन्वय नहीं है. ऐसे में जरूरी है कि दोनों विभागों के बीच समन्वय स्थापित किए जायें, तभी सुखाड़ क्षेत्र का आंकलन सरकार करें. जिसमें सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए.

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गांवों में मनरेगा कार्य शुरू कराये सरकार,मिलेगी राहत


राजेंद्र सिंह ने कहा कि मनरेगा योजना की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास के लिए किया गया था, लेकिन आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से मनरेगा में ग्रामीणों की भागीदारी कम होती जा रही है. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं. सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा का काम हर गांव में शुरू किया जायें, जिससे सुखाड़ से पीड़ित किसानों को लाभ मिलें. वहीं मनरेगा से मशीनों के प्रयोग को भी कम किया जायें.

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322 करोड़ रुपये मजदूरों के बकाया

किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव सुरजीत सिन्हा ने कहा कि मनरेगा की शुरुआत जिस लक्ष्य के साथ की गयी थी, वो बिलकुल धरा का धरा रह गया. अभी तक 322 करोड़ रुपये मजदूरी ग्रामीणों का बकाया है. सरकार को चाहिए कि किसानों के प्रति अपनी रवैया में सुधार लाये.

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ये है मुख्य मांग

झारखंड को सुखाड़ क्षेत्र घोषित किया जाए, फसल क्षतिपूर्ति के लिये प्रति एकड़ 19 हजार दिए जायें, बीमा की बकाया राशि दिया जाए, कृषि ऋण माफ किए जायें, समेत अन्य मांग थीं.

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