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उन्मादी भीड़ की हिंसक घटनाओं पर रोक के लिए सरकार कर रही फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने पर विचार

पंचायत स्तर पर मुखिया और थाना क्षेत्रों में थाना प्रभारियों की जवाबदेही होगी तय

Ranchi :  राज्य सरकार प्रदेश में उन्मादी भीड़ की हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में गंभीर है. इसके लिए सख्त कानून बनाने पर भी सरकार विचार कर रही है. उन्मादी भीड़ की हिंसा के शिकार लोगों को न्याय दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने पर भी विचार हो रहा है.

जानकारी के अनुसार मॉब लिंचिंग और डायन -बिसाही के आरोप में महिलाओं के साथ अन्याय की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए राज्य सरकार इसके लिए पंचायत स्तर पर मुखिया और गांव के मानकी- मुंडा की भी जवाबदेही तय करने पर विचार कर रही है. इसके अलावा संबंधित थानों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी.यदि पंचायतों में और थाना क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं हुई तो थाना प्रभारी और पंचायत के मुखिया को भी जिम्मेवार ठहराया जाएगा. आशा जताई जा रही है कि जल्द ही इस संबंध में सख्त कानून बनाकर सरकार इसे लागू करेगी.

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जागरूकता कार्यक्रम चलाने का भी निर्देश

उन्मादी भीड़ की हिंसा में शामिल रहे लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी गठन करने पर मंथन किया जा रहा है. राज्य सरकार का मानना है कि इससे कानून का राज कायम होगा. सभ्य समाज के निर्माण के लिए इस तरह की व्यवस्था आवश्यक है.

राज्य सरकार ने पुलिस महकमे को इससे संबंधित जागरूकता कार्यक्रम चलाने का भी निर्देश दिया है. साथ ही इसमें स्वयंसेवी संगठनों और धर्मगुरुओं को भी आगे आने की अपील की गई है, ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके.

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बाइक चोरी के आरोप में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था

गौरतलब है कि हाल के दिनों में उन्मादी भीड़ की हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है. रांची के अनगड़ा में गत मंगलवार को गाय चोरी के दो आरोपियों को भीड़ ने पीट-पीटकर अधमरा कर दिया. गनीमत रही कि किसी ने थाना को सूचना दे दी, तो पुलिस ने वहां पहुंचकर लोगों को बचा लिया. इसी प्रकार अनगड़ा में ही 15 दिन पूर्व बाइक चोरी का आरोप लगाकर एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.

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टोंटो के लिसिमोती गांव में भी हुई थी मॉब लिंचिंग

होली के दिन पश्चिम सिंहभूम के टोंटो के लिसिमोती गांव में चोरी का आरोप लगाकर एक युवक रसिका लुंगरी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. मार्च महीने में गुमला जिला के घाघरा थाना क्षेत्र में रामचंद्र उरांव की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी. इस तरह के मामले तकरीबन हर सप्ताह सामने आ रहे हैं.

हाल के दिनों में हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है. राज्य सरकार का मानना है कि कानून हाथ में लेने को कभी भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता. किसी भी अपराधी को दंड देना न्यायालय का काम है. जानकारी नहीं होने के कारण लोग कई बार दूसरों को देखकर नियम तोड़ते हैं. उन्हें ऐसे मामलों में कानून के कठोर प्रावधान के बारे में जागरूक किया जाना जरूरी है.

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