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सरकार कुम्हारों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित : विधानसभा अध्यक्ष

  Lohardaga : झारखंड सरकार राज्य में कुम्हारों एवं माटी शिल्पियों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है.  उक्त बातें विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने शुक्रवार को झारखंड सरकार के माटी कला बोर्ड के तत्वावधान में लोहरदगा नगर भवन में आयोजित सेमिनार सह प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कही. उन्होंने कहा कि प्रदेश की बड़ी आबादी माटी शिल्पी परिवार से सम्बद्ध है. अपने जीवन-यापन के लिए वे देवी, देवताओं की पूजा,  दैनिक उपयोग की वस्तु गमला, मटका, हाथी-घोड़ा, कुल्हड़, दीया तथा अन्य साज-सज्जा के कलात्मक वस्तुओं के उत्पादन पर निर्भर हैं.  कहा कि कुम्हारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए झारखंड माटी कला बोर्ड सकारात्मक कार्य कर रही है.

 उन्होंने माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्रीचंद प्रजाति, प्रबंध निदेशक सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी  मंजूनाथ भजंत्री, सदस्यों, अधिकारियों व इस कला से जुड़े लोगों की सराहना करते हुए कहा कि आशा है कि इस बोर्ड के द्वारा कुम्हारों की आर्थिक व सामजिक स्थिति सबल होगी.

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 माटी कला उद्योग के विकास के लिए सरकार ने की पहल :  प्रजापति

माटी कला बोर्ड के चेयरमैन श्रीचंद प्रजापति ने कहा कि प्रदेश में माटी शिल्पकला से संबंधित उद्योगों के विकास के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास जी ने सकारात्मक पहल की है. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही प्लास्टिक कप के स्थान पर अभियान चलाकर मिट्टी के कुल्हड़ों के प्रयोग हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा. प्रदेश में मिट्टी का कार्य करने वाले कारीगरों एवं शिल्पियों के व्यवसाय में वृद्धि करने, कलाकारों की परम्परागत कला को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से ही झारखंड माटीकला बोर्ड द्वारा यहां प्रमंडल स्तरीय माटीशिल्पकारों का सेमिनार सह प्रदर्शनी आयोजित की गयी है.  सरकार चाहती है कि माटी कला से जुड़े लोग आधुनिक  बाजार में पिछड़े नहीं.

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 तकनीक अपनाकर समृद्ध बनें ; मंजूनाथ भजंत्री

माटी कला बोर्ड के प्रबंध निदेशक सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श मंजुनाथ भजंत्री ने कहा कि  मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास द्वारा इस बोर्ड के माध्यम से माटी कला एवं माटी शिल्पकला से संबंधित उद्योगों के विकास के लिए नीति तैयार की गयी है. जिसमें मिट्टी की उपलब्धता की नीति, तकनीकी उन्नयन एवं आधुनिकीकरण की प्रभावी योजना बनायी गयी है. श्री भजंत्री ने कहा कि बोर्ड द्वारा माटी शिल्पकला से नवीन पीढ़ी को जोड़ने के साथ ही स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि और कच्चे माल की प्राप्ति के लिए नियमों में सरलीकरण किया जा रहा है.  बिजली, पानी, पहुंच मार्ग आदि की व्यवस्था एवं औद्योगिक क्षेत्रों में शेड का आवंटन, इम्पोरियम खोले जाने, प्रशिक्षण प्रदान करना तथा तकनीकी कार्यशालाएं आयोजित कराने का कार्य किया जा रहा है.

कुम्हार कला में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी को निकालने के लिए ग्राम पंचायतों में कारीगरों को नि:शुल्क पट्टों का आवंटन किया जायेगा.  साथ ही वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 मिलाकर शीघ्र ही 400 और 300 मिलाकर कुल 700 कारीगरों को विद्युत चाक, मिट्टी मिलाने वाली मशीन और कुल्हड़ तैयार करने की तकनीकी मशीन उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य चल रहा है. मौके पर जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त विनोद कुमार,भाजपा के प्रदेश नेता ओमप्रकाश सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष सुनैना कुमारी, ईश्वर चन्द्र, नीरज कुमार, राजेन्द्र पंडित, गंगाधर प्रजापति,जॉन दीपक कोनगाड़ी व स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी आदि मौजूद थे.

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मिट्टी की सौंधी खुशबू स्वास्थ्य के लिए लाभदायक :  सुदर्शन भगत

मिटटी की सौंधी खुशबू एवं स्वाद स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है.  उक्त बातें केन्द्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत ने स्थानीय नगर भवन में आयोजित प्रमंडल स्तरीय माटी कला एवं माटी शिल्पकला सेमिनार सह प्रदर्शनी के समापन समारोह में कही.  उन्होंने कहा कि मानव समाज में आदिकाल से ही प्रगति प्रदत मिटटी का प्रयोग दैनिक उपयोग में आने वाले बर्तनों एवं आभूषणों के निर्माण के लिए किया है.  प्राचीन काल से ही मनुष्य एक कुशल कारीगर रहा है. आज के बदलते तकनीकि परिवेश में माटीशिल्पकारों के कौशल विकास की आवश्यकता है, ताकि वे परम्परागत तकनीकि से उच्च तकनीकि अपनाकर अन्य बाजारों से प्रतिस्पर्धा कर सके.

राज्यमंत्री श्री भगत ने कहा कि मिट्टी में ईश्वर के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता. सरकार का उदेश्य है कि यहां की माटी शिल्पिकारों का अपना स्थानीय बाजार हो.  गुजरात, राजस्थान,छत्तीसगढ़ जैसे अन्य राज्यों से तकनीकि प्रशिक्षण दिलाकर इन्हें भी दक्ष किया जाएगा. मौके पर माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्रीचन्द्र प्रसाद, माटी कला बोर्ड के प्रबंध निदेशक  मंजूनाथ भजंत्री के अलावे बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे

 

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