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सरकार को रोजगार के लिये क्रियेट करना होगा मोमेंटम, धरातल पर उतारने होंगे एमओयू

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स्किल डेवलपमेंट व उद्यमिता विकास पर काफी कम हुआ है काम, चाहिये पोजिटिव एप्रोच

सरकार के आंकड़े खुद बता रहे हैं कि इंप्लोयमेंट जेनरेशन के फील्ड में काम ही नहीं हुआ

Prof. Sanjeev Bajaj

प्रोफेसर, एक्सआइएसएस

झारखंड में बेरोजगारी और लाचारी बढ़ती जा रही है. जिस अनुपात में आबादी बढ़ रही है. उस अनुपात में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं. सरकार हर क्षेत्र में डेवलपमेंट की बात और दावे कर रही है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर वैसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा. आर्थिक मामलों के जानकार और एक्सआइएसएस के प्रोफेसर संजीव बजाज ने इस मसले पर खुलकर अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और लाचारी की प्रमुख वजह सरकार में मोमेंटम (गति) का नहीं होना है. सरकार को हर क्षेत्र में मोमेंटम क्रियेट करना होगा. आर्थिक विकास के पहियों में गति देनी होगी. अब तक जितनी भी सरकारें आयीं और गयीं किसी ने भी इस सेगमेंट की ओर ध्यान नहीं दिया.

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ग्राउंड लेवल पर स्कील डेवलपमेंट का नहीं दिख रहा रिजल्ट

राज्य में स्कील डेवलपमेंट के लिये बजट में 700 करोड़ का प्रावधान रखा गया है. इसके तहत दक्षता विकास के लिये कई योजनाएं भी तैयार की गई हैं, कुछ चल भी रही हैं. लेकिन यह सिर्फ नाममात्र के लिये है.

इस पर फोकस करने की जरूरत है. आज की तारीख में दक्ष मानव संसाधन की काफी डिमांड है. स्कील डेवलपमेंट के लिये सरकार को ग्राउंड लेवल पर काम करने की जरूरत है.

सरकारी क्षेत्र में इंप्लोयमेंट जेनरेशन नहीं के बराबर हुआ

राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक सरकारी क्षेत्र में इंप्लोयमेंट जेनरेशन नहीं के बराबर हुआ है. जिस अनुपात में यहां के छात्र-छात्राओं को डिग्रियां मिल रही है. उस अनुपात में सरकारी वेकेंसी नहीं है.

अगर वेकेंसी निकलती भी है तो कहीं न कहीं पेंच फंस जाता है. गजेटेड रैंक की प्रतियोगिता परीक्षा तो दूर की कौड़ी हो गई है. 19 साल में जेपीएससी अब तक पांच परीक्षा ही ले पाया है.

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वहीं कर्मचारी चयन आयोग भी उस अनुपात में नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाया है. कहीं न कहीं खामियां हैं. इन खामियों को दूर करना होगा. यही वजह है कि शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. इसके लिये एक क्लीयर कट पॉलिसी होनी चाहिये.

धरातल पर उतारने होंगे एमओयू

निजी क्षेत्र में रोजगार के काफी अवसर हैं, लेकिन झारखंड में इंडस्ट्रीज की स्थापना भी नहीं हो पा रही है. मोमेंटम झारखंड के समय 210 एमओयू हुए. इससे पहले भी एमओयू हुये थे, लेकिन अब तक एमओयू धरातल पर नहीं उतर पाये हैं.

उदाहरण के लिये अगर एक इंडस्ट्रीज स्थापित होती है तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोगों को रोजगार मिलता है. प्रत्यक्ष रूप से इंडस्ट्रीज में रोजगार मिलता है.

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जबकि अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसपोर्ट, दुकान, सहित अन्य चीजें भी डेवलप होती हैं. ऐसे में दक्ष और बिना दक्ष वालों को भी रोजगार उपलब्ध हो जाता है.
इस क्षेत्र में भी सरकार को मोमेंटम क्रियेट करने की जरूरत है. एक बार मोमेंटम क्रियेट हो जायेगा, तो आगे ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ेगा.

वित्तीय संकट से भी पाना होगा निजात

सरकार को वित्तीय संकट से भी निजात पाना होगा. वर्तमान में बजट के आकार के बराबर कर्ज हो गया. यह सही है कि डेवलपमेंट में राशि खर्च की जा रही है.

लेकिन कर्ज चुकाने के लिये स्त्रोत भी होना चाहिये. राज्य से कम टैक्स मिलता है. ऐसे में सरकार कर्ज चुकाने के लिये फिर कोई नया टैक्स लगायेगी, जिसका असर जनता पर ही पड़ेगा.

टैक्स का बोझ बढ़ने से फिर जनता की आर्थिक स्थिति बिगड़ेगी ही. बेहतर रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में उनकी आजीविका पर भी असर पड़ेगा. लाचारी भी बढ़ेगी.

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(एक्सआइएसएस के प्रोफेसर संजीव बजाज से हुई बातचीत पर आधारित)

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