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सरकार को मुस्लिम महिलाओं के प्रति दर्द कम और वोट पाने की चाहत ज्यादा है : आमया

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Ranchi : तीन तलाक और मॉब लिंचिंग पर आमया संगठन की महिलाओं ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा सरकार को मुस्लिम महिलाओं के प्रति दर्द कम और वोट पाने की चाहत ज्यादा है. महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को बिना राज्यसभा से पारित कराये केंद्रीय कैबिनेट और राष्ट्रपति के माध्यम से 20 सितंबर 2018 को अध्यादेश लाकर इसे देश के 19 करोड़ मुसलमानों पर केंद्र सरकार ने थोप दिया है.

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तीन साल की सजा का प्रावधान असंवैधानिक

आमया की महिला सदस्यों द्वारा कहा गया कि अध्यादेश में तीन तलाक को जघन्य अपराध मनाते हुए आईपीएस की धाराओं के तहत सजा देने का कानून बनाया गया है. कोई व्यक्ति एक साथ तीन तलाक बोलता है और उसकी पत्नी या परिवार के सदस्य पुलिस में शिकायत करते हैं, तो पति को तीन साल कैद की सजा होगी, जो असंवैधानिक है. यह मामला सिविल कानून के तहत बनना चाहिए, जिसमें ज्यादा से ज्यादा मुआवजा का प्रावधान रखा जाता.

जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को अमान्य घोषित किया है, तो पति को सजा किस आधार पर

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आमया ने सवाल उठाया कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एक साथ तीन तलाक बोलने पर शादी नहीं टूटेगी, तो फिर किस आधार पर पति को तीन साल कैद की सजा का प्रावधान रखा गया है. पति के जेल जाने पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा, क्या पत्नी पति के खिलाफ मुकदमे लड़ेगी. आमया के सदस्यों ने कहा कि अध्यादेश देखकर ऐसा लगता है कि सरकार को मुस्लिम महिलाओं के प्रति दर्द कम और वोट पाने की चाहत ज्यादा है.

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केंद्र सरकार ने मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने की नहीं की है पहल

आमया की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार को मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी है, तो मॉब लिंचिंग में 100 से अधिक लोगों की हत्याएं देश में हुई हैं, सिर्फ झारखंड में ही 27 लोग मारे गये हैं. उनकी विधवाएं और मां-बहनों को इंसाफ नहीं मिल रहा है और न ही मुआवजा मिला, अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं. दोषियों को अदालतों में जमानत मिल जा रही है. सरकार के ही मंत्री फूलमाला और मिठाई देकर नौकरी देने की बात कर रहे हैं, इसपर सरकार मूकदर्शक बनी हुई है. जबकि, मॉब लिंचिंग पर 17 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया है, साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिये हैं. लेकिन, केंद्र सरकार ने मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने की पहल अब तक की है.

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राहुल गांधी और हेमंत सोरेन से की अपील- तीन साल कैद की सजा का प्रावधान हटवायें

आमया संगठन की महिलाओं ने कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र में विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी और झारखंड के विपक्षी दल के नेता हेमंत सोरेन से मांग करते हैं कि तीन तलाक कानून से तीन साल कैद की सजा के प्रावधान को हटवायें. साथ ही, धार्मिक संगठनों से मिलकर निकाहनामा फॉर्म में ही एक साथ तीन तलाक नहीं बोलने का नियम बनवायें.

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ये थे उपस्थित

आमया संगठन द्वारा आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेत्री नाजिया तबस्सुम, मॉब लिंचिंग में मारे गये रामगढ़ के अलीमुद्दीन अंसारी की विधवा मरियम खातून, नाजनीन बानो, शमा परवीन, रिजवाना बेगम, कमरुननिसा, उबैद खातून, आलिया, रुखसार, नरगिस, गजाला, गुलफशां, फरीदा नुसरत, अमरीन सबा समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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