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पांचवीं अनुसूची को ताक में रखकर जमीन हड़प रही सरकार: जेरोम जेराल्ड

पांचवीं अनुसूची को सख्ती से लागू करने के लिए जनआंदोलन संयुक्त मोर्चा ने धरना प्लामू, लातेहार और गुमला के ग्रामीणों को विस्थापित करने की योजना

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Ranchi: आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए पांचवी अनुसूची में प्रावधान दिये गये हैं, सूची के अनुसार गांव की एक-एक संपत्ति में ग्रामीणों का अधिकार है. फिर चाहे वह जंगल, जल, जमीन और अन्य कोई चीज ही क्यों न हो. सरकार इस जमीन और संपत्ति की देख-रेख कर सकती है, लेकिन सरकार का इसपर हक नहीं है. उक्त बातें जनआंदोलन संयुक्त मोर्चा के धरना के दौरान जेरोम जेराल्ड ने कहा. उन्होंने कहा कि संविधान की नियमों को ताक में रख कर राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन छीनने की कोशिश कर रही है. पूर्व में भी कई जमीनों को हड़पी जा चुकी है. अभी तक पीड़ित ग्रामीण अपने अधिकारों के लिए संर्घष कर रहे हैं, लेकिन लगता है सरकार ग्रामीणों के लिए अंधी हो चुकी है. धरना में राज्य भर के ग्रामीण पहुंचे थे.

तीन जिलों में किया जा रहा विस्थापन

पलामू, लातेहार, गुमला के ग्रामीण होने वाले विस्थापन का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार ग्रामीणों की नहीं सुन रही है. इन तीनों जिलों में व्याघ्र परियोजना, वाईल्ड लाइफ कॉरिडोर परियोजना के लिए ग्रामीणों का विस्थापन किया जा रहा है. जेरोम जेराल्ड ने कहा कि इतना ही नहीं पूर्व में भी कई योजनाओं के लिए ग्रामीणों को विस्थापित किया गया, जो अभी तक संघर्षरत हैं. ऐसे में समझा जा सकता है कि सरकार ग्रामीणों की विरोधी है.

लगभग 15 लाख लोग हुए विस्थापित

मोर्चा की संयोजिका दयामनी बारला ने बताया कि गैर-सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में अब तक 15 लाख तीन हजार लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिसमें 6 लाख 20 हजार 327 आदिवासी समुदाय, अनुसूचित जाति के 2 लाख 12 हजार 892 और अन्य वर्ग के 6 लाख 69 हजार 753 लोग विस्थापित हुए हैं. सरकारी योजनाओं के लिए इनका विस्थापन तो किया गया, लेकिन इनका पुर्नवास नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि सरकार अगर पांचवीं अनुसूची को सख्ती से लागू नहीं करती है तो आदिवासी समुदाय विरोध करते रहेगा. उन्होंने कहा कि ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के अध्यक्ष एक आदिवासी को ही होना चाहिये न कि किसी बाहरी को, लेकिन राज्य में टीएसी का अध्यक्ष बाहरी है ऐसे में आदिवासी हित की बात कैसे होगी.

महुआटांड़ के 25 गांव होंगे विस्थापित

धरना में महुआटाड़ से आये मार्टिन तिर्की ने बताया कि महुआटाड़ के विभिन्न ग्राम पंचायतों में बैठक कर ग्रामीणों को सहमति बनाने के लिए कहा जा रहा है. ग्रामीणों को महुआटाड़ ब्लॉक में विस्थापित होने के लिये बुलाया जा रहा है. व्याघ्र परियोजना और कॉरिडोर निर्माण के लिए लगभग 25 गांवों को विस्थापित करने की योजना है. जिसके लिए महुआटांड़ के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायतों का बहिष्कार भी किया है.

ऑनलाइन होने से नहीं कट रही जमीन की रसीद

अन्य ग्रामीण मसीहदास आईंद ने कहा कि वे गुमला कामडारा निवासी हैं. जमीन संबधी कार्य आनलाईन होने से उनकी छह प्लॉट जमीन हाथ से निकल गयी. उन्होंने बताया कि एक साल पहले जब वे जमीन की रसीद कटाने गये तो कहा गया कि ऑनलाइन प्रक्रिया है, यह प्रज्ञा केंद्र से होगा. जब वे प्रज्ञा केंद्र गये तो सात प्लॉट जमीन में से एक ही प्लॉट की रसीद कटी. साथ ही कहा गया कि नेट में जमीन की जानकारी उपलब्ध नहीं है. मसीहदास ने बताया कि तब से जमीन के लिए दौड़ रहे हैं. अधिकारी बोलते हैं जब नेट में आयेगा तभी रसीद कटेगी, नहीं तो समझा जायेगा कि जमीन आपकी नहीं है.

ये है मुख्य मांग

  • पांचवीं अनुसूची लागू की जायें
  • सीएनटी एसपीटी एक्ट को लागू किया जायें
  • जमीन अधिग्रहण कानून 2013 लागू हो
  • गैर मजुरूआ आम, गैर मजुरूआ खास, सरना मसना आदि जमीनों को लैंड बैंक से मुक्त किया जायें
  • नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज अधिसूचना को रद्द किया जाये
  • भूमि अधिग्रहण कानून 2017 को रद्द किया जाये
  • धरने में शामिल होने वाले संगठन

धरना में जनंसघर्ष समिति नेतरहाट, आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, मानकी मुंडा संघ, आजादी बचाओ संघ, गांव गणराज्य चांडिल विस्थापन समिति, तजना डैम संघर्ष समिति समेत पलामू, लातेहार और गुमला जिलें के विभिन्न गा्रम पंचायतों से लोग उपस्थित थे.

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