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घोषणा कर भूली सरकारः 21 जुलाई- डीजीपी साहेब छात्राओं की सुरक्षा के वायदे नहीं हुए पूरे

तीन साल पहले कॉलेज में लाइजिनिंग अफसर की तैनाती का किया था वादा

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Priyanka
झारखंड में बहुमत की सरकार है. सरकार के मुखिया को इसका गुमान भी है. अक्सर कहते हैं कि हमने हर क्षेत्र में बहुत काम किया. झारखंड में ‘सबका साथ और सबका विकास’ हो रहा है. नेता-अधिकारी घोषणा कर, आदेश देकर हमें सपने दिखा जाते हैं. काम हुआ या नहीं, यह पूछने वाला कोई नहीं. इसे परखने के लिए न्यूज विंग ने “घोषणा करके भूल गयी सरकार” नाम से एक सीरीज शुरु की है. आज हम सरकार के तीनों साल में 21 जुलाई को सरकार द्वारा किये गये वादों और दिये गये आदेशों-निर्देशों पर बात करेंगे.

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यूं तो रघुवर सरकार हमेशा कहती है कि वो महिलाओं की सुरक्षा, उनके सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. महिलाओं के कल्याण के नाम पर कई योजनाएं भी चलाने की बात होती है. वही आज से तीन साल पहले 21 जुलाई 2015 को झारखंड पुलिस डीजीपी डीके पांडेय ने घोषणा की थी कि लड़कियों के स्कूल-कॉलेजों में महिला पुलिस लाइजनिंग अफसर की तैनाती होगी. महिला सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए पुलिस-पब्लिक पार्टनरशिप कार्यक्रम में कहा गया कि महिला लाइजनिंग अफसर छात्राओं के संपर्क में रहेंगी और उनकी समस्याओं को दूर करेंगी.

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अपनी घोषणा में डीजीपी ने यहां तक कहा था कि इसे लेकर स्कूल-कॉलेजों की सूची तैयार की जा रही है. और 30 जुलाई तक ये काम पूरा हो जायेगा. उन्होंने कहा था कि कुछ बातें होती है, जो छात्राएं अपने घर में भी किसी से शेयर नहीं कर पातीं, उन्हें वो लाइजनिंग ऑफिसर से बांट सकेंगी. इन घोषणाओं के बाद छात्राओं और उनके अभिभावकों को लगा कि शहर में लड़कियों की सुरक्षा अब मुस्तैद होगी. मनचलों पर लगाम लगेगी और बेटियां निर्भीक होकर स्कूल-कॉलेज जायेंगी, पढ़ाई करेंगी.
लेकिन इस घोषणा की हकीकत क्या है, ये किसी से छिपी नहीं है. और राज्य में महिला सुरक्षा के वादे कितने कारगर साबित हो रहे हैं, उससे हम और आप अच्छी तरह वाकिफ हैं. शहर के स्कूल-कॉलेजों में ना तो पुलिस लाइजनिंग ऑफिसर की सही से तैनाती हुई, ना ही इन इलाकों में मंडराने वाले मनचलों पर लगाम लगी. कुछ कॉलेजों में तैनाती हुई भी तो कुछ ही दिनों में हटा दिये गये और पुलिस कर्मियों की वापस से तैनाती थाने में कर दी गई. वही आये दिन महिलाओं के खिलाफ होते अपराध ने महिला सुरक्षा को सवालों के घेरे में ला दिया है.

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वही दो साल पहले, 21 जुलाई 2016 को रांची में स्टेशन रोड से राजेंद्र चौक तक ओवरब्रिज बनाने की बात कही गई थी. खबर थी कि पटेल चौक से राजेंद्र चौक के आसपास इस ओवरब्रिज को निकाला जायेगा. जिससे स्टेशन रोड की ट्रैफिक इस ओवरब्रिज के माध्यम से सीधे राजेंद्र चौक और डोरंडा की ओर निकल जायेगी. यानी राजधानी रांची पर बढ़ते ट्रैफिक के बोझ से लोगों को कुछ निजात मिलेगी. इसे लेकर पथ निर्माण विभाग की ओर से सर्वे तक कराया गया, लेकिन ये प्रस्ताव सर्वे तक ही सीमित रह गया. ना इस दिशा में कोई काम हुआ, ना ही राजधानी के लोगों को जाम से निजात मिली.

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