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घोषणा कर भूल गयी सरकार- 23 सितंबरः नहीं बना मॉडल आदिवासी छात्रावास, न ही बने मछुआरों के लिए पक्के मकान

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Ranchi : झारखंड में बहुमत की सरकार है. सरकार के मुखिया को इसका गुमान भी है. अक्सर कहते हैं कि हमने हर क्षेत्र में बहुत काम किया. झारखंड में ‘सबका साथ और सबका विकास’ हो रहा है. नेता-अधिकारी घोषणा कर, आदेश देकर हमें सपने दिखा जाते हैं. काम हुआ या नहीं, यह पूछने वाला कोई नहीं. इसे परखने के लिए न्यूज विंग ने “घोषणा करके भूल गयी सरकार” नाम से एक सीरीज शुरू की है. आज हम सरकार के तीनों साल में 23 सितंबर को सरकार द्वारा किये गये वादों और दिये गये आदेशों-निर्देशों पर बात करेंगे.

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23 सितंबर 2015 को सरकार और सीएम ने तीन बड़ी घोषणाएं की थीं. राज्य में अदिवासियों के हितों का दंभ भरनेवाली सरकार ने कहा था कि अदिवासी छात्रों के लिए मॉडल छात्रावास का निर्माण कराया जायेगा. सीएम रघुवर दास ने आदिवासी छात्रावास का निरीक्षण करने के दौरान छात्रों से यह घोषणा की थी. उनकी इस घोषणा के तीन साल बीच चुके हैं, पर अभी तक मॉडल छात्रावास नहीं बन पाया है.

इसके अलावा राजधानी में पांच फ्लाइओवर का शिलान्यास नवंबर 2015 तक करने की बात अधिकिरयों ने कही थी. इसके लिए मेकन से परामर्श लिया गया था. पांच में से सिर्फ एक फ्लाइओवर का शिलान्यास हो पाया है, उसकी भी प्रगति काफी धीमी है. राजधानी की जनता इस बात के इंतजार में है कि कब फ्लाइओवर बनेंगे और कब शहर को जाम से मुक्ति मिलेगी.

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23 सितंबर 2015 को ही सीएम ने घोषणा की थी कि देवघर-बासुकीनाथ का मास्टर प्लान बनाया जायेगा. इस घोषणा के तीन साल बीत जाने के बाद भी कोई मास्टर प्लान सार्वजिनक नहीं हुआ है. साथ ही पारसनाथ को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पयर्टन स्थल बनाने की भी घोषणा की गयी थी. इस दिशा में भी कोई प्रगति नहीं है.

23 सितंबर 2016 को सीएम ने घोषणा की थी क राज्य के 33 हजार मछुआरों को पक्का अवास दिया जायेगा. विधानसभा मैदान में मत्स्य संगोष्ठी में सीएम ने कहा था कि सवा-सवा लाख की लागत से बननेवाले 33 हजार आवास दिये जायेंगे. इस दिशा में कोई भी प्रगति नहीं दिखती.

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इसी तरह 23 सितंबर 2017 को सीएम ने रांची प्रेस क्लब के उद्घाटन के मौके पर घोषणा की थी कि केरल के तर्ज पर झारखंड के पत्रकारों को भी पेंशन देने पर विचार किया जायेगा. एक साल पूरा हो गया है, इस घोषणा पर विचार तो दूर अब इसकी चर्चा तक नहीं होती.

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