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सरकार जनता से डरे, यह स्वतंत्रता है,  जनता सरकार से डरे, यह निरंकुशता है : दीपक मिश्रा

नागरिक स्वतंत्रता को किसी तरह से कमतर करना अव्यवस्था और अराजकता की ओर ले जाएगा

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NewDelhi : देश के पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्रता स्थायी महत्व की चीज है, जिसका लेनदेन नहीं किया जा सकता. इस क्रम में कहा कि  नागरिक स्वतंत्रता को किसी तरह से कमतर करना अव्यवस्था और अराजकता की ओर ले जायेगा.  बता दें कि एक कार्यक्रम में  शनिवार को श्री मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्रता के बगैर जीवन निरर्थक है और स्वतंत्रता के लिए असहमति का अवश्य ही स्वागत करना चाहिए. याद करें कि दीपक मिश्रा ने उन पीठों की अध्यक्षता की थी, जिन्होंने स्वतंत्रता, यौन स्वायत्तत्ता और गरिमा से जुड़े अहम फैसले दिये थे.  श्री मिश्रा ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन को उद्धृत करते हुए कहा, जब सरकार जनता से डरती है, तब यह स्वतंत्रता है. जब जनता सरकार से डरती है, तब यह निरंकुशता है.

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सबरीमला पर SC का फैसला गलत है

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अधीर रंजन चौधरी के साथ-साथ केरल के नेता के सुरेश, पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर इस पद के लिए दौड़ में शामिल थे.

दीपक मिश्रा ने कहा कि विकल्प चुनने का अधिकार स्वतंत्रता का अहम हिस्सा है.  उनके अनुसार नागरिक स्वतंत्रता राष्ट्र का आधार है और उन्हें कमजोर करने से अराजकता आयेगी. कहा कि नागरिक अधिकारों का संरक्षण एक मात्र निर्देशक शक्ति होनी चाहिए. इस अवसर पर पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सबरीमला मुद्दे पर कहा कि पांच न्यायाधीश बैठ कर यह फैसला नहीं कर सकते कि सैकड़ों बरसों से जो परंपरा चली आ रही है, वह सही है या गलत है.  SC का फैसला गलत है.  मैं इस फैसले में असहमत रहने वाले न्यायाधीश से सहमत हूं, जिन्होंने कहा था कि धार्मिक परंपराओं को तर्क की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता.  सबरीमला पर SC का फैसला तर्क पर आधारित था.

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