JharkhandRanchi

पुरानी पेंशन बहाली के घोषणापत्र को लेकर सरकार के साथ राजनैतिक दलों को भी घेरने की तैयारी में सरकारी कर्मचारी

  • 28 एवं 29 अगस्त को झामुमो के जिला कार्यालयों में सौंपेंगे ज्ञापन
  • ‘घोषणापत्र का सम्मान करो-पुरानी पेंशन का प्रावधान करो’ का कार्यक्रम

Ranchi: पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सरकार से लेकर राजनीतिक दलों को भी घेरने की तैयारी राज्य के सरकारी कर्मचारी कर रहे हैं. राज़्य के सभी विभागों के लगभग दो लाख सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी पिछले कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आंदोलनरत हैं. 28 और 29 अगस्त को राज्य के कर्मचारी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला कार्यालयों में पहुंचेंगे और जिलाध्यक्ष को उनके पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र को लागू करते हुए पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में कार्रवाई हेतु ज्ञापन सौंपेंगे. पिछले विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा राजनैतिक दलों के लिए प्राथमिकता में रहा था.

इसे भी पढ़ें : राज्यपाल रमेश बैस परिवार के साथ किया पतरातू डैम का भ्रमण, वादियों को देखकर मोहित हुये राज्यपाल

Catalyst IAS
SIP abacus

MDLM
Sanjeevani

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, झारखण्ड विकास मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल सहित कई दलों ने इसे अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया. चुनाव में पोस्टल बैलेट के रूख ने भी सरकारी कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे के महत्व को स्थापित किया था.
पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह का कहना है कि सरकार गठन से पूर्व चुनाव के दौरान पुरानी पेंशन बहाली सरकार के लिए एक अहम मुद्दा था. अब जबकि सरकार गठन के लगभग 2 साल पूरे होने को है, इसके बावजूद इस दिशा में सरकार के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जाना अत्यंत निराशाजनक है.

इसे भी पढ़ें : इन्वेस्टर समिट सिर्फ एक छलावाः प्रतुल

सरकार के रवैये से कर्मचारियों एवं अधिकारियों में रोष एवं क्षोभ व्याप्त है

मीडिया प्रभारी डॉक्टर शिवानंद काशी एवं रमन झा ने कहा कि चूंकि घोषणापत्र झारखंड मुक्ति मोर्चा का था इसलिए यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने सरकार से अपने घोषणा पत्र को लागू करने को लेकर यथोचित कार्रवाई करें. सरकारी कर्मचारी बौद्धिक वर्गों का नेतृत्व करते हैं. सरकार को इसके महत्व को समझना चाहिए.
कर्मचारियों के मन में यदि यह बात आती है कि राज्य का नेतृत्वकर्ता एक ऐसा व्यक्ति है जो अपने वादे को लागू करने को लेकर गंभीर नहीं हैं तो यह बेहद निराशाजनक है.

इसे भी पढ़ें : नवादा में वार्ड सदस्य का शव फंदे से लटका मिला, हत्या या आत्महत्या, पुलिस इस बिंदु पर कर रही जांच

उन्होंने ने कहा कि सरकारी कर्मचारी सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करते हैं इसलिए यह जरूरी है कि वे अपने भविष्य को लेकर आशंकित ना रहे. ऐसा तभी संभव है जब पुरानी पेंशन की बहाली होती है. नई पेंशन योजना केंद्र सरकार के द्वारा लाई गई एक ऐसी योजना है जिसमें सरकार के ऊपर वित्तीय भार का झूठा दावा किया गया था. वास्तविकता यही है कि नई पेंशन योजना में भी सरकार को उतने ही खर्च करने पड़ते हैं जितना की पुरानी पेंशन योजना के तहत करना पड़ता.

परंतु नई पेंशन योजना में जमा किया गया अंशदान पूरी तरह से असुरक्षित एवं शेयर बाजार पर आधारित है, इसमें न्यूनतम पेंशन अथवा न्यूनतम ब्याज की भी कोई गारंटी नहीं है.
कर्मचारियों ने आने वाले कार्यक्रमों के लिए एक नारा दिया है- घोषणापत्र का सम्मान करो, पुरानी पेंशन का प्रावधान करो.

इसे भी पढ़ें :अमिताभ बच्चन के सबसे खास बॉडीगार्ड की वार्षिक आय डेढ़ करोड़ होने का आरोप, पुलिस ने की कार्रवाई

Related Articles

Back to top button