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Blood पर सरकारी फरमान : तुम मुझे खून दो, मैं उसका कारोबार करूंगा, विरोध जारी

Ranchi : स्वास्थ्य विभाग ने ब्लड चार्ज लेने का फैसला पिछले दिनों किया है. ब्लड बैंक से रक्त लेने वालों को 1000 रुपये से अधिक कीमत चुकानी होगी. बीपीएल को छोड़कर सभी को इसका शुल्क देना होगा. विभाग के ऐसे फरमान का विरोध लगातार जारी है. सामाजिक संगठनों का कहना है कि एक तो रक्तदान की मुहिम चलाना चुनौती भरा है. ऊपर से रक्तदान के बावजूद जरूरत पड़ने पर लोगों को इसके लिए पैसे चुकाने होंगे. मतलब सरकार कह रही कि तुम मुझे खून दो, मैं उसका कारोबार करूंगा.

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लाइफ सेवर्स के अतुल गेरा ने अपनी भावनाएं सोशल मीडिया के जरिये भी जाहिर की हैं. सरकार को अपने फैसले की समीक्षा करनी चाहिए. फ्री खून के बदले पैसे वसूलना जनविरोधी है.

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रिम्स ने ब्लड के लिए शुरू की वसूली

अतुल गेरा कहते हैं कि गैर सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को नि : शुल्क ब्लड तभी मिलेगा जब वह अत्यंत गरीब होगा. इसके अलावा जो कम गरीब होगा या जो आम जन हैं और बीपीएल नहीं हैं लेकिन गरीबी की श्रेणी में ही आते हैं तथा जिसकी सबसे बड़ी आबादी हमारे यहां है, उन सभी को ब्लड बैंक से रक्त लेने के लिए 1050 वसूला जाएगा. रिम्स ब्लड बैंक ने यह पैसा लेना शुरू कर भी दिया है.

पूर्व में एक बड़ा कल्याणकारी फैसला राज्य में लिया गया था, जिसमें झारखंड में सरकारी ब्लड बैंक में सभी को दान किया हुआ रक्त निशुल्क मिल रहा था. अब स्वास्थ्य विभाग इसे वापस लेने पर है.

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रक्तदान की परंपरा आगे बढ़ने पर संकट

झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने रक्त के संबंध में जो संकल्प जारी किया है, वह अनुचित है. वह यह फैसला कैसे ले सकता है. केंद्र सरकार, NHM, राज्य सरकार के जरिये लोगों को नि:शुल्क रक्त दिये जाने का जनहित का बहुत बड़ा कार्य वर्षों से चल रहा है. नए फैसले से प्राइवेट ब्लड बैंक में भीड़ बढेगी. उनको ज्यादा लाभ होगा. ऐसे में आमजनों के लिए सरकारी ब्लड बैंक का लाभ खत्म कर देने की पूरी तैयारी है.

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पहले से रांची में 14 प्राइवेट ब्लड बैंक हैं. सरकारी सिर्फ 2 ही हैं. जो 14 प्राइवेट बैंक हैं, उनको झारखंड एड्स कंट्रोल की मेहरबानी से NACO INDIA द्वारा निर्धारित प्रोसेसिंग से अप्पर सीलिंग (Max) लेने की छूट पहले दे से है. अभी म से कम सरकारी ब्लड बैंक को JSACS आम लोगों के लिए बक्श देता.

तीन साल पहले तक रिम्स, रांची सरकारी ब्लड बैंक का प्रोसेसिंग चार्ज 350 रुपये लिया करता था. चूंकि सरकार प्राइवेट ब्लड बैंकों की अनियमितता पर अंकुश नहीं कर पा रही थी तो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,केंद्र सरकार ने अपने सहयोग से इस राशि (350 रुपये) को ही हटा दिया, ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सके. साथ ही उम्मीद जताई कि रक्तदान की परंपरा और विकसित होगी. अब 1050 रुपये लिया जाना जनविरोधी है.

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