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सरकार बदली और करोड़ों की योजनाएं हो गयीं बर्बाद

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Nitesh Ojha
Ranchi : झारखंड राज्य बने 18 साल बीतने को हैं. इस दौरान राज्य में कई सरकारें सत्ता में आयीं. सभी ने कई दावे किये, घोषणाएं कीं. दावों के हिसाब से कई योजनाएं बनायी गयीं. सरकार ने इसे विकास का नाम दिया. जैसे ही उस सरकार में बैठे लोग सत्ता से हटे, सभी योजनाएं या तो बंद कर दी गयीं या योजनाओं को शुरू ही नहीं किया गया. इसका प्रमाण झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या पहले के कई मुख्यमंत्री के कार्यकाल में बनीं विकास योजनाओं का हाल है. इन सभी के कार्यकालों में कई विभागों ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में करोड़ रुपये खर्च कर पार्क, सब्जी बाजार के लिए डेली मार्केट, सामुदायिक भवन बनाने का काम शुरू किया था. इसकी स्थिति आज किसी से छिपी नहीं है. ये सभी भवन आज भी अपने संवरने का इंतजार कर रहे हैं.

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करीब चार करोड़ से बना इकलौता सोलर पार्क पड़ा है बेकार

सबसे पहले बात करते हैं सीएम आवास के पास सिदो-कान्हू पार्क स्थित झारखंड के पहले और रांची के इकलौते सोलर एनर्जी पार्क की. नवंबर 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस पार्क का उद्घाटन किया था. उस दौरान झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन उपमुख्यमंत्री के पद पर थे. झारखंड रिन्युएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ज्रेडा) ने करीब चार करोड़ रुपये की लागत से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इस पार्क का निर्माण कराया था. लेकिन, लेकिन सरकार बदलने के बाद इसकी स्थिति यह है कि सही तरीके से मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह पार्क पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है. पार्क की देखभाल से पता चलता है कि इसके रखरखाव की महज खानापूर्ति हो रही है. इसी तरह पार्क के बीचोंबीच टॉय ट्रेन चलाने पर भी काम हुआ. इसके लिए लोहे की पटरी बिछायी गयी, लेकिन आज वही ट्रेन लोगों को मंनोरजन देने की जगह अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है.

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डेली मार्केट सह सामुदायिक भवन बना असामाजिक तत्वों का अड्डा

सरकार बदली और करोड़ों की योजनाएं हो गयीं बर्बाद
हरमू स्थित डेली मार्केट एवं सामुदायिक भवन और हरमू स्थित डेली मार्केट और उनके उद्घाटन का शिलापट्ट.

विस्थापित हुए फुटपाथ दुकानदारों हेतु आवासीय कॉलोनी हरमू बाजार में बनाये गये डेली मार्केट सह सामुदायिक भवन इन दिनों शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है. भवन का निर्माण करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से किया गया था. इसका शिलान्यास नवंबर 2011 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास, आवास मंत्री हेमंत सोरेन ने किया था. वहीं, अगस्त 2014 को कृषि व गन्ना विकास सह आवास मंत्री योगेंद्र साव ने इसका उद्घाटन किया था. इसके बाद सरकार बदली. आज हाल यह है कि उद्घाटन के कई वर्षों बाद भी कई दुकानें अभी तक नहीं खोली गयी हैं. भवन परिसर के अंदर प्रतिदिन शाम को यहां असामाजिक तत्वों की महफिल सजती है, शराब पी जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी-कभार ही पुलिस द्वारा इसपर कार्रवाई की गयी है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में बर्बाद हुए सात करोड़ रुपये

इसी तरह राजधानी के पुराने जेल परिसर में वन विभाग के नियंत्रण में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क का निर्माण किया गया था. पार्क का शिलान्यास 15 नवंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेंमत सोरेन ने किया था. सरकार बदली और वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पार्क को शहीदों को समर्पित किये जाने संबंधी निर्देश भी दिया. पार्क के अंदर चिल्ड्रेन पार्क, पुल, बच्चों के खेलने के लिए झूले, रेन डांस की सुविधा आदि की व्यवस्था की गयी थी. लेकिन, आज की स्थिति यह है कि इन सभी निर्माण कार्य को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है. पार्क में आज केवल गड्ढे, जर्जर झोपड़ियां ही नजर आती हैं.

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