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पारा शिक्षकों को 10 जून तक मई माह का मानदेय देने का वादा पूरा नहीं कर सकी सरकार

स्थायीकरण नियमावली के लिए ओड़िशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ का दौरा किया अधिकारियों ने, फिर भी पारा शिक्षकों की स्थायीकरण नियमावली ठंडे बस्ते में

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Ranchi: पारा शिक्षकों के प्रति राज्य सरकार की उदासीनता जग जाहिर है. सरकार ने जितने वायदे इन शिक्षकों से किये, उनमें से कोई भी वादा राज्य सरकार पूरा नहीं कर पायी. इसी साल झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से पारा शिक्षकों के बकाये का भुगतान करने की बात की गयी थी.

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31 मई को परियोजना की ओर से पारा शिक्षकों को जानकारी दी गयी थी कि तीन जून तक अप्रैल माह का मानदेय दिया जायेगा. जो पारा शिक्षकों को ससमय दिया भी गया. इसके साथ ही दस जून तक मई माह का मानदेय और 15 से 25 जून तक मार्च और फरवरी माह का मानदेय देने की बात कही गयी थी. लेकिन न ही दस जून तक पारा शिक्षकों को मई का मानदेय मिला और न ही 15 तारीख के बाद मार्च माह का मानदेय दिया गया. 21 जून तक भी इन्हें मार्च और फरवरी का मानदेय नहीं मिला है.

परियोजना के प्रशासी पदाधिकारी और लेखा पदाधिकारी की ओर से ये भी जानकारी दी गयी थी कि जून माह से मानदेय नियमित दिया जायेगा. लेकिन तय समय तक पारा शिक्षकों का बकाया भुगतान नहीं होने से पारा शिक्षकों में असंतोष है.

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स्थायीकरण नियमावली के लिए बुलानी थी बैठक

31 मई को पारा शिक्षकों से मुलाकात के दौरान परियोजना की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया था कि पारा शिक्षकों के स्थायीकरण के नियमों के लिए दस जून के बाद बैठक बुलायी जायेगी. लेकिन अभी तक परियोजना की ओर से इस संदर्भ में कोई पहल नहीं की गयी. खुद परियोजना के सूत्रों से जानकारी मिली कि इस संबंध में कोई बैठक अब तक नहीं की गयी है. जबकि विगत वर्ष पारा शिक्षकों के आंदोलन के मुद्दों में स्थायीकरण एक मुख्य मुद्दा था. परियोजना की ओर से स्थायीकरण नियमावली बना कर स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग को दी जानी है. पारा शिक्षकों की संख्या राज्य में 67,000 है.

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नियमावली के लिए अन्य राज्यों का किया गया दौरा

साल 2018 के नवंबर दिसंबर में पारा शिक्षकों ने आंदोलन किया. जिसके बाद 17 जनवरी 2019 में परियोजना में पारा शिक्षकों के साथ स्थायीकरण पर एक समझौता हुआ. जिसमें राज्य के पारा शिक्षकों के लिए जल्द से जल्द स्थायीकरण नियमावली बनाने की बात की गयी. इसके साथ ही पारा शिक्षकों के स्थायीकरण के लिए अन्य राज्यों का दौरा कर परियोजना की ओर से स्कूली शिक्षा विभाग को रिपोर्ट देनी थी. इसके लिए मार्च में परियोजना अधिकारियों की ओर से ओड़िशा, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल का दौरा किया गया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब परियोजना के अधिकारी उत्तर प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों का दौरा कर रहे हैं. जिसके बाद स्थायीकरण नियमावली बनायी जायेगी.

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एक जुलाई से ज्ञानसेतु और बायोमेट्रिक का किया जायेगा विरोध

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि 30 जून तक अगर सरकार पारा शिक्षकों के बकाया मानदेय का भुगतान नहीं करती है तो एक जुलाई से ज्ञानसेतु और बायोमेट्रिक उपस्थिति सहित सभी गैर शैक्षणिक कार्यों का विरोध किया जायेगा. इसकी जानकारी देते हुए मोर्चा के संयोजक संजय दुबे ने कहा कि पारा शिक्षकों के लिए सरकार ने आंखें बंद कर ली हैं.

जनवरी में समझौते के बाद हड़ताल स्थगित किया गया है न कि समाप्त. उन्होंने पारा शिक्षकों की ओर से फिर से आंदोलन करने की बात की. वहीं नाम न छापने की शर्त पर परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि शनिवार तक पारा शिक्षकों को मानदेय भुगतान से संबंधित जानकारी की चिट्ठी जिलावार जारी की जायेगी. जानकारी मिली है कि अभी तक परियेाजना की ओर से पारा शिक्षकों के बकाया भुगतान की तारीख तय नहीं है.

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