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सरकारी लेटलतीफी के कारण राज्य के निजी कंपनियों का लटक सकता है भुगतान

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  • राज्य के किसी भी कोषागार ने छपाई के लिये उपलब्ध नहीं कराया है एमआइसीआर चेकबुक का परफॉर्मा
  • 12 फरवरी और छह मार्च को एजी ने योजना सह वित्त विभाग को लिखा था पत्र, बावजूद कार्रवाई नहीं
  • निजी कंपनियों व संस्थाओं को चेक से ही किया जाता है भुगतान

Ranchi: सरकारी लेटलतीफी और उदासीन रवैये के कारण राज्य के अधिकांश निजी कंपनियों का भुगतान रूक सकता है. इसके पीछे वजह यह है कि राज्य के किसी भी कोषागार ने एमआइसीआर चेकबुक का परफॉर्मा उपलब्ध नहीं कराया है. इसी परफॉर्मा के आधार पर इंडियन सिक्यूरिटी प्रेस नासिक में चेकबुक की प्रिंटिंग होती. निजी कंपनियों को भुगतान चेक से ही किया जाता है.

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चेकबुक की कमी से क्या होगी परेशानी

अगर चेकबुक की प्रिंटिंग नहीं हुई तो निजी कंपनियों के कर्मियों की सैलरी रूक जायेगी. निजी कंपनियों द्वारा योजनाओं पर किये जा रहे काम में विलंब होगा और भुगतान नहीं हो पायेगा. चूंकि निजी कंपनियों का बिल नहीं बनता है उन्हें ट्रेजरी से चेक के माध्यम से राशि मिलती है. इस मामले में प्रधान महालेखाकार झारखंड कार्यालय से 12 फरवरी और छह मार्च को पत्र के जरिये निर्देश भी दिया गया. यह पत्र योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिखा गया है.

स्टॉक में है सिर्फ 85 चेकबुक

इंडिया सिक्यूरिटी प्रेस नासिक द्वारा राज्य सरकार को 900 एमआइसीआर चेकबुक उपलब्ध कराये गये थे. इसमें 815 चेकबुक का वितरण किया गया था. अब सिर्फ 85 चेकबुक ही स्टॉक में हैं. इस बीच देवघर कोषागार ने चेकबुक प्रिंटिंग के लिये परफॉर्मा उपलब्ध कराया था, लेकिन उसमें भी काफी त्रुटि पाई गई. इसके बाद 12 मार्च को योजना सह वित्त विभाग के अवर सचिव रामकुमार श्रीवास्तव के हस्ताक्षर से पत्र जारी कर सभी कोषागारों को निर्देश दिया गया है कि एमआइसीआर चेकबुक की प्रिंटिंग के लिये अविलंब महालेखाकार कार्यालय को सूचना उपलब्ध करायें.

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साथ ही कोषागारों को निर्देश दिया गया है कि मांग पत्र अंग्रेजी और हिंदी दोनों में होना चाहिये. इंडेंड की चार प्रतियां भी उपलब्ध करानी है. सभी प्रतियों में संबंधित पदाधिकारी का हस्ताक्षर जरूरी है.

15 मार्च तक उपलब्ध कराने का निर्देश

योजना सह वित्त विभाग ने निर्देश जारी करते हुये कहा है कि सभी कोषागार 15 मार्च तक इसकी आवश्यकता को देखते हुए एनजी को चेकबुक का परफॉर्मा उपलब्ध करायें.

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यदि कोषागारों द्वारा समय पर परफॉर्मा महालेखाकार कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो चेकबुक की अनुपलब्धता के लिये कोषागार स्वयं उत्तरदायी होगा. इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाये. परफॉर्मा में एकाउंट होल्डर का पद, बैंक का नाम, ड्राइंग ऑफिसर का पद, सिटी कोड, बैंक कोड, ब्रांच कोड, एकाउंड कोड और कितने चेकबुक की जरूरत है, इसका पूरा विवरण का उल्लेख होना चाहिये.

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