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घोषणा कर भूल गयी सरकार : 20 जुलाई- सीएम साहब ! न ठीक से क्लीन हुई रांची, ना ही ग्रीन हुई

Manjusha Bhardwaj

Ranchi : झारखंड में बहुमत की सरकार है. सरकार के मुखिया को इसका गुमान भी है. अक्सर कहते हैं कि हमने हर क्षेत्र में बहुत काम किया. झारखंड में ‘सबका साथ और सबका विकास’ हो रहा है. नेता-अधिकारी घोषणा कर, आदेश देकर हमें सपने दिखा जाते हैं. काम हुआ या नहीं, यह पूछने वाला कोई नहीं. इसे परखने के लिए न्यूज विंग ने “घोषणा करके भूल गयी सरकार” नाम से एक सीरीज शुरु की है. आज हम सरकार के तीन सालों में 20 जुलाई की तारीख को किये गये वायदों और दिये गये आदेशों-निर्देशों पर बात करेंगे.

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20 जुलाई 2015 को राज्य के मुखिया रघुवर दास ने रांची को क्लीन, ग्रीन, स्वच्छ व सुंदर बनाने की बात कही थी. उन्होंने शहर के औद्योगिक, व्यावसायिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से 2015 के अक्टूबर महीने तक रांची को स्वच्छ व सुंदर बनाने की अपील की थी. जिसपर प्रतिनिधियों ने शहर में जगह-जगह डस्टबीन, स्कूलों में वायरिंग व शौचालय बनाने के साथ-साथ स्कूलों को गोद लेने की बात कही थी. सभी ने बढ़चढ़ कर वादा किया था. किसी ने कहा कि सितंबर 2015 के बाद 24 घंटे बिजली मिलेगी. तो किसी ने कहा कि रांची शहर के सभी सड़कों को बना दिया जाएगा. घोषणा के तीन साल हो गए लेकिन बिजली 24 घंटे तो नहीं मिलती. वहीं बारिश के मौसम में घंटों कट जरूर जाती है. सड़क का हाल क्या है यह तो जनता को रोज सफर करने के दौरान पता चल ही जाता होगा. सीएम ने भी कहा था कि पांच सालों में रांची विकसित राज्यों में खड़ा होगा. लोगों को सिर्फ सोच बदलने की जरूरत है. पर क्या सिर्फ सोच बदलने से रांची विकसित राज्यों में खड़ा हो जाएगा. या सच में काम करने की जरूरत है! और रही बात क्लीन और ग्रीन सीटी की तो रांची कितना क्लीन और ग्रीन हो पाया है तीन सालों में यह रोजाना यहां की जनता को देखने मिल जाता है.

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इसी दिन सीएम ने रांची शहर में सबसे अधिक अपराध जमीन के कारोबार के कारण होते हैं. इसे रोकने के लिए जमीन का कारोबार बंद किया जाएगा. जिससे आदिवासियों की जमीन की लूट बंद होगी. जिनकी जमीन लूटी गयी है उन्हें जमीन वापस होगी. साथ ही यह भी कहा था कि इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे उनपर कार्रवाई की जाएगी. चाहे वो सरकार का अधिकारी ही क्यों ना हो. सजा सभी को मिलेगी. इस मुद्दे को लेकर सीएम ने मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ बैठक भी की थी. सरकार के इस वादे के बाद लोग कितना खुश हुए होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. लोगों के मन में एक उम्मीद जगी होगी कि शायद अब काम होगा. उन्हें उनकी जमीन वापस मिल जाएगी. लेकिन तीन साल के बाद भी लोग उदास है. जमीन वापस करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन आलम यह है कि तीन सालों के बाद भी हड़पी गयी जमीन वापस नहीं की गयी. आदिवासी अाए दिन इसे लेकर धरना प्रदर्शन व विरोध करते रहते हैं. सरकार ने तीन साल में अपने ही वादों पर कितना काम किया है वह आपको लोगों के विरोध से ही पता चल जाता होगा.

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20 जुलाई 2016 को राज्य की शिक्षा मंत्री ने कहा था कि राज्य के हर प्रमंडल में एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोला जाएगा. साथ ही 18 हजार माध्यमिक शिक्षकों और यूनिवर्सिटी में शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे. शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में सौ नए कॉलेज खोलने की योजना है. शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं. साथ ही साल 2017 तक सभी स्कूलों में बेंच-डेस्क और साल 2018 तक सभी स्कूलों में बिजली उपलब्ध कराने की बात कही गयी. 2017 खत्म हो गया और 2018 आ गया. राज्य के सभी स्कूलों में बेंच-डेस्क उपलब्ध करायी गयी क्या. क्या सभी स्कूलों में बिजली मिली. या फिर राज्य के स्कूल अभी भी बदहाली का रोना रो रहे हैं. लगता है हर प्रमंडल में इंजीनियरिंग कॉलेज, बेंच-डेस्क और बिजली की बात तो शिक्षा मंत्री भूल ही गयी हैं.

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