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केंद्र सरकार के निर्देशों को नहीं मान रहे सरकारी और निजी स्कूल प्रबंधन

देश भर में एनसीपीसीआर ने जारी किया है एक समान मैन्यूअल

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Deepak

Ranchi: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सरकारी और निजी विद्यालयों में एक समान नीति लागू करने के लिए देश भर में एक समान मैन्यूअल जारी किया है. आयोग के सदस्य (शिक्षा) प्रियंक कानूनगो ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर यह मैन्यूअल जारी किया है. इसे सभी स्कूल शुरुआती दौर में नजर अंदाज कर रहे हैं. अब तक इस दिशा में आवश्यक कदम भी नहीं उठाये गये हैं. राजधानी रांची को ही लें, तो यहां एक सौ से अधिक निजी विद्यालय हैं. 750 से अधिक सरकारी, गैर सहायता प्राप्त विद्यालय और अल्पसंख्यक विद्यालय हैं.

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बच्चों के सुरक्षित भविष्य पर एकरुपता बनाने की कोशिश

मैन्यूएल में  स्कूलों की आधारभूत संरचना से लेकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक तवज्जो दी गयी है. मैन्यूअल की एक-एक प्रति सभी स्कूलों में रखना अनिवार्य किया गया है. मैन्यूअल में मानव संसाधन विकास विभाग, पेयजल और स्वच्छता विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति, आइसीएसइ बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय खेल प्राधिकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद समेत अन्य संगठनों से इनपुट लिया गया है. इससे देश भर में बच्चों के सुरक्षित भविष्य पर एकरुपता बनाने की कोशिश की गयी है.

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आधारभूत संरचना पर विशेष जोर

मैन्यूएल में स्कूलों के संचालन को लेकर एक ऑपरेटिंग शिड्यूल तैयार किया गया है. इसमें भवनों और आधारभूत संरचना पर विशेष जोर दिया गया है. नर्सरी से लेकर प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और उच्चतर विद्यालयों की कक्षाओं में नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 का अक्षरश: अनुपालन करने की शर्तें रखी गयी हैं. स्कूलों में प्रयोगशाला, किचन, शौचालयों की स्थिति, पेयजल की उपलब्धता, स्कूलों में बिजली की व्यवस्था पर पूरी तरह सुरक्षा बरतने, अगलगी की घटनाओं को लेकर पूर्ण प्रबंधन, भूकंप रोधी प्रबंधन और पर्याप्त प्लेग्राउंड की व्यवस्था का जिक्र किया गया है. शिक्षा के अधिकार कानून के तहत विद्यालय परिसर की चहारदीवारी और गेट का होना भी अनिवार्य किया गया है. केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समतिि के नियमों के अनुरूप रेलवे ट्रैक और सड़कों से उचित दूरी बनाये रखने की बातें भी अंगिकृत की गयी हैं.

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एसएमएस की सुविधा विकसित करने पर जोर

स्कूलों के ट्रांसपोर्ट पर विशेष नजर रखने को कहा गया है. इसमें बसों से आने-जानेवाले बच्चों के स्कूलों तक पहुंचने और स्कूलों से बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए उचित एसएमएस की सुविधा विकसित करने पर जोर दिया गया है. सभी स्कूल प्रबंधनों को एसएमएस की सुविधा देने को कहा गया है. इसका किसी तरह का अनुपालन नहीं होता है. बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगाये जाने वाले ग्रिल पर भी ध्यान देने को कहा गया है. सभी बस स्टॉफ का पुलिस वेरीफिकेशन कराना जरूरी किया गया है. सभी स्कूलों में एक ट्रांसपोर्ट मैनेजर और संयोजक की बहाली करने के निर्देश भी दिये ये हैं. सभी बस चालकों के लिए पांच वर्ष तक का ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी किया गया है. बसों के ड्राइवरों को भारतीय दंड विधान (आइपीसी) की धारा 279, 337, 338, 304 ए की जानकारी रहना जरूरी है. सभी स्कूलों को फायर सेफ्टी का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना जरूरी है.

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मैन्यूएल में बच्चों के स्वास्थ्य जांच की सभी रिपोर्ट रखने की हिदायतें दी गयी हैं. स्कूलों में सामान्य दवाईयां रखना भी अनिवार्य किया गया है. बच्चों का समय पर टीकाकरण, विटामीन ए प्रबंधन, स्वास्थ्य और सैनिटेशन पर भी सामयिक रिपोर्ट

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