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सरकार ने पारा शिक्षकों को लुभाया, कहा- 20 फीसदी बढ़ा देंगे मानदेय, टेट की मान्यता अवधि कर देंगे सात साल

पारा शिक्षक संघ ने मानने से किया इनकार, कहा- यह आंदोलन की दिशा मोड़ने की है साजिश

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Ranchi : अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पारा शिक्षकों को मनाने के लिए राज्य सरकार ने बुधवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उनके समक्ष अपनी बातें रखी हैं. इसमें सरकार ने पारा शिक्षकों को लुभाते हुए कहा है कि पारा शिक्षकों के संघ एवं प्रतिनिधियों के साथ 26 अगस्त 2015 को सरकार की हुई वार्ता के आलोक में हुए समझौते के सभी बिंदुओं का सरकार द्वारा अनुपालन किया जा चुका है. इसके तहत सरकार ने पारा शिक्षकों के मानदेय में 20 फीसदी वृद्धि करने का फैसला किया है, जिसे मूर्त रूप देने के सरकार की ओर से कार्रवाई की जा रही है. वहीं, जे-टेट की मान्यता अवधि में भी सरकार ने दो साल का विस्तार करते हुए इसे पांच साल से सात साल करने का निर्णय लिया है और इसे भी मूर्त रूप देने के लिए सरकार कार्रवाई कर रही है.

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सरकार ने पारा शिक्षकों के समक्ष रखीं ये बातें

सरकार द्वारा एकीकृत पारा शिक्षक संघ द्वारा उठायी गयी सभी मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए उच्चस्तरीय समिति का गठन कर उसकी अनुशंसा के आलोक में कार्रवाई की जा रही है, जो निम्नवत है-

  • पारा शिक्षकों के कल्याण हेतु कल्याण कोष के गठन के लिए राज्य योजना प्राधिकृत समिति से पारा शिक्षकों की पांच करोड़ रुपये की मांग के विरुद्ध 10 करोड़ रुपये की सरकारी राशि से कल्याण कोष का गठन किया जा रहा है एवं इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गयी है.
  • पारा शिक्षकों की मांग के अनुरूप जे-टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की मान्यता की अवधि दो वर्ष बढ़ाते हुए पांच से सात वर्ष करने का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
  • पारा शिक्षकों की मानदेय वृद्धि की मांग के आलोक में टेट प्रशिक्षित शिक्षकों के मानदेय में 20 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. इसके आलोक में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक पात्रता उत्तीर्ण शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि करते हुए 12 हजार रुपये प्रतिमाह तथा प्राथमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित टेट उत्तीर्ण शिक्षकों को 11 हजार रुपये प्रतिमाह नियत मानदेय देने की अनुशंसा के आलोक में कार्रवाई की जा रही है.
  • पारा शिक्षकों के साथ वर्ष 2015 में हुए समझौते के आलोक में उनके कल्याण हेतु महिला पारा शिक्षिकाओं को अन्य सरकारी शिक्षिकाओं की तरह मातृत्व अवकाश, विशेषावकाश को भी स्वीकृति प्रदान की गयी है, जिसका लाभ सभी पारा शिक्षिकाओं को निरंतर मिल रहा है.
  • पारा शिक्षकों की मांग के अनुरूप संतोषप्रद सेवा होने की स्थिति में 60 वर्ष तक उनकी सेवा लेने की अनुमति विभागीय पत्रांक-989 दिनांक 05.2016 एवं विभागीय पत्रांक-1607 दिनांक 24.08.2016 द्वारा दी जा चुकी है.
  • पारा शिक्षकों को सभी प्रारंभिक विद्यालयों में उपलब्ध रिक्ति के विरुद्ध 50 प्रतिशत पद उनके लिए निर्धारित करते हुए नियमावली निर्गत की गयी है, जिसके तहत शिक्षक पद पर अर्हताधारी शिक्षकों की नियुक्ति नियमित रूप से समय पर की जा रही है.
  • सरकार की ओर से एकीकृत पारा शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों को मुख्य सचिव के स्तर से सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई के संबंध में आठ नवंबर 2018 को पूरी जानकारी उनके साथ वार्ता कर दी गयी है. अतः एकीकृत पारा शिक्षक संघ द्वारा उनके साथ 08.2015 को हुए समझौता के आलोक में सभी मांगों पर आवश्यक कार्रवाई किये जाने के बावजूद पारा शिक्षक संघ द्वारा असहयोगात्मक रवैया अपनाया जाना अनुचित है.
  • अतः सभी पारा शिक्षक प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सकारात्मक रूप अपनाते हुए शिक्षक-छात्र हित में विद्यालय में रहकर पठन-पाठन सामान्य दिनों की तरह सुनिश्चत करें.

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पारा शिक्षक संघ ने कहा- नहीं मानेंगे

बुधवार को सरकार द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पारा शिक्षकों के समक्ष जो बातें रखी गयीं, उन्हें मानने से पारा शिक्षक संघ ने इनकार कर दिया है. संघ ने कहा है कि पारा शिक्षकों पर सरकार की इन बातों का कोई असर नहीं होनेवाला है. वे अपनी मांगों पर अडिग हैं. संघ ने कहा है कि सरकार ने पारा शिक्षकों के आंदोलन की दिशा को मोड़ने के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लुभावनी बातें कही हैं, जिन्हें पारा शिक्षक नहीं मानेंगे. यह सरकार की साजिश है.

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