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Google ने बनाया लच्‍छू महाराज का Doodle, कथक के कोरियोग्राफर को किया याद

वे लखनऊ में शानदार कथक घाटियों के परिवार से आए और फिल्म कोरियोग्राफर, हिंदी सिनेमा, विशेष रूप से मुगल-ए-आज़म (1960) और पाकिज़ा (1972) के रूप में भी काम किया.

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News wing Desk : Google ने Doodle के जरिए भारत के महान तबला वादक लच्छू महाराज का 74वां बर्थडे सेलीब्रेट कर रहा है. लच्छू महाराज लखनऊ से महान कथक नर्तक थे. पंडित लछु महाराज (19 07-19 78) एक भारतीय शास्त्रीय नर्तक और कथक के कोरियोग्राफर थे. वे लखनऊ में शानदार कथक घाटियों के परिवार से आए और फिल्म कोरियोग्राफर, हिंदी सिनेमा, विशेष रूप से मुगल-ए-आज़म (1960) और पाकिज़ा (1972) के रूप में भी काम किया. उन्हें लगभग दस वर्षों तक अवध के नवाब के पंडित बिंदद्दीन महाराज, उनके चाचा और अदालत नर्तक से व्यापक प्रशिक्षण मिला. उन्होंने पक्वाज, तबला और हिंदुस्तान शास्त्रीय मुखर संगीत भी सीखा. बाद में,वह मुंबई चले गए, जहां उभरते हुए फिल्म उद्योग ने उन्हें कथक को बहुत व्यापक दर्शकों तक लाने में मदद की. लच्छू महाराज को महल (1949), मुगल-ए-आज़म (1960), छोटो छोटा बोटेन (1965) और पकीजाह (1972) के साथ-साथ गौतम बुद्ध जैसे उनके बैले जैसे नृत्य दृश्यों की नृत्य-शैली के लिए प्रशंसित किया गया था. वे लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए कथक केंद्र के संस्थापक निदेशक भी थे.

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पुरस्कार

उनको कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक राष्ट्रपतियों का पुरस्कार और 1957 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, कलाकारों के प्रदर्शन के लिए उच्चतम पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी, भारत के नेशनल एकेडमी फॉर म्यूजिक, डांस एंड ड्रामा द्वारा सम्मानित किया गया.

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