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गुड न्यूज :  झारखंड लौट रहे सभी प्रवासी मजदूरों के लिए मनरेगा में अवसर, मिलेगा रोजगार, ब्लू प्रिंट तैयार

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Ranchi:  वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा कर चुकी हैं. पांचवीं और आखिरी चरण की घोषणा उन्होंने रविवार को की. मनरेगा बजट को बढ़ाने की बात उन्होंने कही. इस बारे में वित्तमंत्री ने कहा कि मनरेगा बजट 40 हजार करोड़ रुपये बढ़ा है.

कहा कि पहले मनरेगा का बजट 61 हजार करोड़ रुपये था, जिसे 40 हजार करोड़ बढ़ा दिया गया है. मनरेगा का बजट बढ़ने से झारखंड जैसे राज्य में कामगारों के लिए काम के अवसर बढ़ेंगे.

अभी जहां 11 लाख से अधिक कामगार दूसरे प्रदेश में काम करने गये हैं, वहीं 7 लाख के करीब प्रवासी कामगारों ने आपने राज्य लौटने की इच्छा जताई है. जिसमें 1.85 लाख से अधिक के लौटने की प्रबल संभावना जताई जा रही है.

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मनरेगा बजट बढ़ने से झारखंड को कितना फायदा होगा

मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी ने न्यूजविंग को बताया कि मनरेगा बजट किसी राज्य विशेष के लिए लिए नहीं होता है. मनरेगा बजट का देश स्तर पर एक खाता होता है. जहां जितना काम किया जायेगा उस राज्य को उतना बजट मिलेगा. इससे प्रवासी मजदरों के लिए काम का बढ़ेगा.

सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया कि झारखंड में करीब 49 लाख ग्रामीण परिवार जॉब कार्ड होल्डर हैं. एक्टिव जॉब कार्ड करीब 22 लाख परिवार के पास है. एक्टिव मजदूर करीब 29 लाख हैं. झारखंड में हर साल औसतन 14 लाख परिवार के 18 से 19 लाख लोग मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं.

इस समय लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में मजदूर गांव में पहले से मौजूद हैं. पहले इनमें से कई लोग शहरों में भी काम करने जाया करते थे. जो अब बंद है. जाहिर है कि अब एक्टिव जॉब कार्ड की संख्या बढ़ेगी.

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इसे ध्यान में रखते हुए ब्लू प्रिंट भी तैयार कर लिया गया है.

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 झारखंड के पांच सूत्री ब्लू प्रिंट में इन बातों को किया है शामिल

  • – ऊपरी जमीन की मेढ़बंदी. ट्रेंच कटिंग का काम, ऐसे स्थानों पर जहां ढलान 5-20 प्रतिशत के बीच है.
  • – खेत की की मेढ़बंदी. ऐसे स्थानों पर जहां ढलान 5 प्रतिशत से कम हो.
  • – नाला पुनर्जीवन कार्य (एलबीएस) नाले के ऊपरी भाग में.
  • – नाला पुनर्जीवन कार्य (गाद की निकासी) नाला के निचले भाग में.
  • – सोख्ता गड्ढा का निर्माण. मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि से.

 मनरेगा में केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी

मनरेगा के तहत मजदूरों को जो पैसे मिलते हैं उसमें केंद्र सरकार व राज्य सरकार की हिस्सेदारी होती है. इसे  लेकर मनरेगा आयुक्त ने कहा कि झारखंड में प्रतिदिन 194 रुपये मजदूरी के रूप में दिए जाते हैं. यह पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती है.

मनरेगा आयुक्त ने बताया कि इसे दो कैटेगरी में समझा जा सकता है. भौतिक मजदूरी दर की बात है तो उससे पूरी राशि केंद्र सरकार देती है. इसके अलावा कई ऐसे काम होते हैं जिसमें मेटेरियल का इस्तेमाल होता है.

मेटेरियल पर जो खर्च होता है उसका 75 प्रतिशत केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत राज्य सरकार देती है. इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि अगर 100 रु खर्च होते हैं तो उसमें 90 रुपये केंद्र सरकार वहन करती है और 10 रुपये राज्य सरकार देती है.

 मनरेगा का काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा  

मनरेगा के तहत एक परिवार को साल में 100 दिन काम मुहैया कराना होता है. झारखंड में पिछले साल करीब 45 दिन औसतन सभी मजदूरों को काम मिला है.

अगर कर्मियों की शिथिलता की वजह से किसी मजदूर को काम नहीं मिलता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता के रूप में पहले महीने में एक चैथाई और 1 महीने के बाद पूरी मजदूरी का आधा पैसा मुहैया कराना पड़ता है. यह पैसा संबंधित कर्मचारी के वेतन से काट कर देने का प्रावधान है.

 194 रुपये की मजदूरी के बाद भी श्रमिक को फायदा

झारखंड में मनरेगा के तहत एक कार्य दिवस के बदले 194 रुपए मिलते हैं. ऐसे में मजदूरों को पर्सनल एसेट तैयार कर मदद पहुंचाई जाती है. मसलन, मजदूर के खेत में तालाब की खुदाई या कुएं का निर्माण या फिर जानवरों के लिए शेड का निर्माण कराया जाता है.

मनरेगा के तहत व्यक्तिगत एसेट यानी अपनी संपत्ति बनाने के मामले में झारखंड पूरे देश में अव्वल है. यह स्थान पिछले 3 वर्षों से जारी है.

 केरोना काल को लेकर मनरेगा कार्यों के लक्ष्य

निरंतर वर्षा के जल बहाव को कम करना, वर्षा जल का संरक्षण, जमीन में नमी की मात्रा को बढ़ाना, टांड़ खेत के पानी को खेत में रोकना, ऊपरी जमीन का संवर्धन एवं उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाना. इसके लिए जल संरक्षण की विभिन्न संरचनाओं का निर्माण करना.

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