Opinion

हद है! पीएम केयर्स फंड में दान देने पर कंपनियों को CSR छूट, पर सीएम राहत कोष में दान देने पर कोई छूट नहीं

Brajesh Mishra

सोशल मीडिया पर आपने एक सूचना जरुर पढ़ी होगी. मोदी जी के आह्वान पर फलां-फलां कॉरपोरेट घरानों, पूंजीपतियों, उद्योगपतियों ने हजारों करोड़ रुपये पीएम केयर्स फंड में दान दे दिये. यह भी पढ़ा होगा कि पहले की सरकारों में दान के रकम बहुत कम मिलते थे.

पर, क्या आपको यह सच भी पता है कि पीएम केयर्स फंड को दान के ज्यादा पैसे क्यों मिल रहे. और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के उस अनुपात में दान क्यों नहीं मिल रहे. मोदी समर्थक इसे प्रधानमंत्री के प्रति कॉरपोरेट घरानों या लोगों के विश्वास को वजह बता सकते हैं. पर, सच यह नहीं है.

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तो सच क्या है?

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने 10 अप्रैल 2010 को एक सामान्य परिपत्र जारी किया है. जिसमें पीएम केयर्स फंड, मुख्यमंत्री राहत कोष और दान के संबंध में विस्तृत जानकारी है. जिसके मुताबिक, कंपनियां अगर पीएम केयर्स फंड में दान देती हैं, तो वह सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी) के रुप में किये जाने वाले व्यय में शामिल होगा.

मतलब यह कि अगर कोई कंपनी पीएम केयर्स फंड में 2 करोड़ रुपया देती है और उस कंपनी को सीएसआर के तहत 5 करोड़ रुपये खर्च करने हैं, तो 2 करोड़ रुपये दान देने के बाद उसे सिर्फ 3 करोड़ रुपये की सीएसआर के तहत खर्च करने होंगे.

अब आप यह भी समझ लीजिये कि सीएसआर के तहत कंपनी को अपनी कमाई का करीब 2 प्रतिशत उसी इलाके में लोगों के विकास पर खर्च करने होते हैं.

तो आप समझ गये, कंपनियों को जो राशि गरीबों के उत्थान में, पर्यावरण को बचाने में, दिव्यांगों को सहायता करने में खर्च करनी है, वही राशि उसे पीएम केयर्स फंड में दान कर दिया. मतलब यह कि घर से कुछ लगा भी नहीं और नाम भी हो गया. पीएम भी गदगद और कंपनी भी खुश.

अब यह समझिये कि अगर पीएम केयर्स में कंपनियां बड़ी-बड़ी राशि दान कर रही हैं तो, राज्यों में बने मुख्यमंत्री राहत कोष में क्यों नहीं ?

तो जान लीजिये, 10 अप्रैल 2020 को जो परिपत्र जारी हुआ है, उसमें इसका भी जिक्र है. परिपत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री राहत कोष या कोविड-19 के लिए गठित राहत कोष में किये जाने वाले दान को कॉरपोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (सीएसआर) के  रुप में किया जाने वाले व्यय कंपनी एक्ट अधिनियम-2013 की अनुसूची-सात में शामिल नहीं किया गया है.

इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई कंपनी राज्यों के मुख्यमंत्री राहत कोष में दान के रुप में रुपये देती है, तो वह रुपये उसकी कंपनी से देना पड़ेगा. उसे किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी.

यही कारण है कि पीएम केयर्स फंड में कंपनियां ज्यादा दान दे रही हैं, लेकिन मुख्यमंत्री राहत कोष में कम. यह स्थिति वहां भी है, जिस राज्य में कंपनी स्थापित है या कंपनी की सारी गतिविधियां संचालित होती हैं. ऐसी कंपनी भी सीएम राहत कोष में कम और पीएम केयर्स फंड में ज्यादा रकम दान के रुप में दे रही हैं.

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क्या है पीएम केयर्स फंड ?

किसी भी प्रकार की संकट से निबटने के उद्देश्य से, जैसा कि अभी कोविड-19 वैश्विक महामारी का प्रकोप है और इसके प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए, प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन (PM CARES) फंड के नाम से एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया गया है. जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री खुद होंगे.

बताते चलें कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कोष भी देश में गठित एक पब्लिक ट्रस्ट है, जिसका गठन वर्ष 1948 में किया गया था. इसका भी उद्देश्य आपदा या अन्य संकटकालीन प्रयोजन के लिए राहत कार्य चलाना है. इसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं. सदस्यों में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं.

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार को दिया जाने वाला दान सही

कॉरपोरेट मंत्रालय द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, कोविड-19 से निबटने के लिए राज्य आपका प्रबंधन प्राधिकार को दिया जाने वाला दान कॉरपोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (सीएसआर) के रुपय में किया जाने वाला व्यय माना जायेगा. इसे अधिनियम की अनुसूची-सात में मान्य बताया गया है.

इसके अलावा कंपनियां स्वयं या अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर कोवॉं-19 से संबंधित उपयोगी गतिविधियां कर सकती हैं. साथ ही कंपनियों द्वारा कोविंड-19 संबंधी गतिविधियों (हेल्थ केयर, स्वच्छता एवं आपदा प्रबंधन के लिए किया गया व्यय भी सीएसआर के तहत अनुमान्य होगा. इसके लिए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा 18 जून 2014 को जारी सामान्य परिपत्र संख्या-21/2014 एवं अधिनियम की अनुसूची-सात का संदर्भ लिया जा सकता है.

वेतन या मजदूरी का भुगतान सीएसआर व्यय के रूप में नहीं माना जा सकता

लॉकडाउन की अवधि के दौरान कंपनियों द्वारा अपने कर्मियों/कर्मचारियों (कॉन्ट्रैक्ट लेबर सहित) को वेतन या मजदूरी का भुगतान की राशि का सामंजन सीएसआर के तहत किया जाने वाला व्यय के रूप में अनुमान्य नहीं होगा. कंपनियों में कार्य करने वाले दैनिक मजदूरों या आकस्मिक श्रमिकों को किया जाने वाला मजदूरी का भुगतान भी सीएसआर के तहत किया जाने वाला व्यय के रूप में नहीं माना जा सकेगा.

कंपनियां अपने सीएसआर फण्ड का व्यय दैनिक मजदूरी पर कार्यरत श्रमिकों, अस्थायी श्रमिकों, आकस्मिक श्रमिकों को अनुग्रह राशि का भुगतान के रूप में कर सकती हैं.

बताना जरूरी होगा कि यदि कंपनियां अपने दैनिक मजदूरी पर कार्यरत श्रमिकों, अस्थायी श्रमिकों, आकस्मिक श्रमिकों को उनको भुगतेय मजदूरी के अलावे यदि कोविड-19 से निबटने के लिए किसी अनुग्रह राशि (ex-gratia)  का भुगतान करती हैं, तो इस अनुग्रह राशि का भुगंतान सीएसआर के तहत व्यय के रूप में अनुमान्य होगा. बशर्ते, कंपनी के बोर्ड के द्वारा इस आशय की स्पष्ट उद्घोषणा की जानी होगी और उसे ऑडिटर के द्वारा अभिप्रमाणित किया जाएगा. इसे एक बार के लिए अपवादस्वरुप जोड़ा गया गया है.

क्या है सीएसआर फण्ड ?

कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड, कंपनी अधिनियम- 2013 के तहत कंपनियों द्वारा अपने औसत शुद्ध लाभ में से 2 प्रतिशत की वह राशि है, जिसे कंपनी सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए अनिवार्य रूप से खर्च करेंगी. फंड की राशि का व्यय करने के लिए अनुमान्य गतिविधियां अधिनियम की अनुसूची VII में वर्णित हैं.

कंपनी एक्ट अधिनियम 2013 की अनुसूची VII में शामिल अनुमान्य गतिविधियां:-

–      भूख, गरीबी, कुपोषण उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, केंद्र सरकार द्वारा गठित स्वच्छ भारत कोष में एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था.

–      शिक्षा को बढ़ावा देना ( विशेष शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने वाली व्यावसायिक शिक्षा सहित), विशेषकर बच्चों, महिलाओं, वृद्धों एवं दिव्यांग जनों के लिए और आजीविका को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं.

–      लैंगिक समानता को बढ़ावा देना.

–      पर्यावरणीय स्थिरता.

–      राष्ट्रीय विरासत का संरक्षण.

–      भूतपूर्व सशस्त्र बलों के जवान, शहीदों की विधवा और उनके आश्रितों के हित में होने वाले कार्य.

–      गांव में खेल को बढ़ावा देना.

–      प्रधानमंत्री राहत कोष में दान.

–      केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत शैक्षणिक संस्थानों में स्थित टेक्नोलॉजी इन्क्युम्बेटर को फंडिंग.

–      ग्रामीण विकास की परियोजनाएं.

–      स्लम क्षेत्र का विकास.

–      आपदा प्रबंधन.

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नोट : ये लेखक के निजी विचार हैं.

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