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गोमियाः बीजेपी उम्मीदवार के मैदान में उतरने से बिगड़ेगा समीकरण, फिलहाल बबीता, लंबोदर और माधव हैं मैदान में

Akshay Kumar Jha

Ranchi: राज्य में आजसू और बीजेपी गठबंधन टूट जाने से गोमिया विघानसभा में एक नया समीकरण बनता दिख रहा है. गोमिया में बीजेपी अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है.

लेकिन सवाल है कि गोमिया से बीजेपी की पसंद कौन होगा. तीन नामों पर बीजेपी कार्यालय में चर्चा है. वो नाम लक्ष्मण नायक, गुणानंद महतो और देवनारायण प्रजापति हैं.

गोमिया में कुल 2.70 लाख मतदाता हैं. जिसमें बहुतायत महतो वोटरों की है.

करीब 80,000 मतदाता महतो जाति से आते हैं. ऐसे में अगर गुणानंद महतो को बीजेपी टिकट देती है, तो क्षेत्र में तीन उम्मीदवार महतो जाति से हो जायेंगे. आजसू से लंबोदर महतो चुनाव की सारी तैयारी कर चुके हैं.

जेएमएम ने योगेंद्र यादव की पत्नी बबीता देवी को यहां से उम्मीदवार बनाया है. तो वहीं इस बार सीनियर लीडर माधव लाल सिंह अपनी आखिरी चुनावी लड़ाई लड़ने के लिए अकेले ही निर्दलीय उम्मीदवार बन कर मैदान में ताल ठोक रहे हैं.

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बीजेपी के उम्मीदवार से किसको होगा सबसे ज्यादा खतरा

बीजेपी के उम्मीदवार उतरने से सबसे ज्यादा परेशानी आजसू के लंबोदर महतो को होनेवाली है. लंबोदर ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनी पकड़ बना कर रखी है.

बीजेपी के उम्मीदवार के आने से शहरी वोटरों का रुझान बीजेपी की तरफ हो सकता है. वहीं अगर वो उम्मीदवार महतो जाति से होता है, तो बबीता देवी और लंबोदर महतो दोनों से परेशानी हो सकती है.

गोमिया विधानसभा के लोगों का कहना है कि बीजेपी के उम्मीदवार से अगर किसी को फायदा होनेवाला है तो वो हैं माधव लाल सिंह. महतो वोट का बिखराव तीन खेमों में होने के बाद माधवलाल सिंह अपने कोर वोटरों के दम पर ही विधानसभा की दहलीज पार कर सकते हैं.

वहीं लक्ष्मण नायक को टिकट मिलने से कसमार और पेटरवार में वो लंबोदर महतो को कड़ी टक्कर दे सकते हैं. उन्हें उस क्षेत्र में जिला परिषद चुनाव का अच्छा अनुभव है.

उनकी पत्नी दो बार से लगातार जिला परिषद सदस्य हैं. इन क्षेत्रों में आजसू की काफी अच्छी पकड़ मानी जाती है.

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जानिये गोमिया का जातीय समीकरण

गोमिया में करीब 2.70 लाख वोटरों की संख्या है. इनमें से महतो वोट करीब 80,000 है. दूसरे नंबर पर आदिवासी आते हैं, उनकी संख्या 50,000 के करीब है. एससी की संख्या करीब 30,000 और इतने ही वोटर मुस्लिम क्षेत्र में हैं.

वैश्य जाति की बात करें तो उनकी संख्या 25,000 से ज्यादा है. प्रजापति आठ हजार के करीब. यादव वोटरों की संख्या 7-8 हजार के बीच है. घटवार वोट 10,000 है. फॉरवर्ड वोट 10,000 के करीब बताया जाता है. बाकी में रवानी, स्वर्णकार, बढ़ई आदि जातियां आती हैं.

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