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देश में #GoldDemand घटी, भारतीयों को कम भा रहा सोना या #HighRate, आर्थिक सुस्ती है वजह?  

NewDelhi : सोना अब भारतीयों को शायद कम  भा रहा है. देश में इस साल सोने की मांग आठ  पर्सेंट घटकर 700 टन रह सकती है, जो 2018 में 760.4 टन थी.  खबर है कि आर्थिक सुस्ती और कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश में सोने की मांग को नुकसान पहुंचा है.

Jharkhand Rai

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल(डब्ल्यूजीसी) की नयी रिपोर्ट के अनुसार  सितंबर 2019 के पहले  सप्ताह  में सोने के 39,011 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई  रेट और कस्टम ड्यूटी में 2.5% की बढ़त ने तीसरी तिमाही में गोल्ड और जूलरी के बाजार  में सुस्ती ला दी.  WGC की डिमांड ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार  2019 की तीसरी तिमाही में देश में सोने की मांग पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 32 पर्सेंट घटकर 123.9 टन रही.

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दो महीने  में 10 ग्राम सोने के भाव में 4000 रुपये की तेजी  

वर्तमान  वर्ष की सितंबर तिमाही में जूलरी के लिए गोल्ड डिमांड 101.6 टन रही, जो 2016 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे कम है. साल 2018 की तीसरी तिमाही से तुलना करें तो यह आंकड़ा 32% कम है.इसके पीछे गुनहगार कौन है? दो महीने से कम समय में 10 ग्राम सोने के भाव में 4000 रुपये की तेजी दर्ज की गयी.

Samford

जुलाई के मध्य में सोने के भाव जहां 35,000 रुपये थे, वह सितंबर में बढ़कर 38,795 रुपये के स्तर पर पहुंच गये.  कीमतों में तेजी का मांग पर असर देखने को मिला. दक्षिण भारत में अगस्त-सितंबर में शादियों का सीजन होता है और इस दौरान तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के वेडिंग जूलरी मार्केट में काफी हलचल रहती है.

दाम बढ़ने के कारण पिछले साल के मुकाबले इस सीजन में 15-20 फीसदी कम मांग रही.  हालांकि तीसरी तिमाही के आखिरी सप्ताह  में कीमतों में कुछ कमी के कारण मांग बढ़ने की उम्मीद भी बेमाने रही,  क्योंकि   पितृ पक्ष  के दौरान भारत में सोना खरीदना शुभ नहीं माना जाता.अगर धनतेरस पर खरीदारी को संकेत मानें तो उत्तर भारत के लिए भी सोने  के बाजार में नरमी रहने की आशंका है, जहां शादियों का सीजन चल रहा  है.

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पिछले 11 सालों बाद इतनी कम डिमांड देखने को मिली

ऐसा नहीं है कि रेट बढ़ने के कारण सिर्फ सोने के गहनों का बाजार में गिरावट कही.  सोने के सिक्कों और बार के बाजार के भी अच्छे दिन दूर रहे. इस बाजार में पिछले 11 सालों बाद इतनी कम डिमांड देखने को मिली. साल 2009 की पहली तिमाही के बाद पहली बार सोने के सिक्के और बार का बाजार इतना ठंडा रहा.

पिछले साल की समान अवधि से तुलना करें तो इस बाजार में 35% कम मांग दर्ज की गयी. दाम ज्यादा होने के कारण रिटेल निवेशक पैसा लगाने से बचते दिखे और जिन्होंने पहले ही निवेश किया हुआ था, उन्होंने कीमत बढ़ने की आस में होल्ड करना बेहतर समझा.

भारतीय ग्राहक अब नया सोना खरीदने की बजाय पुराने सोने को रीसाइकल करना या रीयूज करना बेहतर मान रहा है. 2019 की तीसरी तिमाही में शुद्ध सर्राफा आयात पिछले साल के मुकाबले 66% कम रहा, जबकि इस दौरान रीसाइकल्ड गोल्ड की सप्लाई में 59% की बढ़त दर्ज की गयी.

दरअसल, इस साल की कुल रीसाइकल्ड गोल्ड सप्लाई 2017 और 2018 के मुकाबले काफी ज्यादा रही. सितंबर तक यह 90.5 टन रही. कहा जा रहा है कि  पूरे साल के लिए यह आंकड़ा 100 टन से पार हो जायेगा.

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