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गोड्डा : निशिकांत दुबे लगायेंगे हैट्रिक या प्रदीप यादव जीतेंगे वोटरों का दिल

महागठबंधन से झारखंड विकास मोर्चा प्रत्याशी प्रदीप यादव भी आंदोलनों के दम पर चुनाव में निशिकांत दुबे का हैट्रिक रोकने में लगे हैं.

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Ranchi : गोड्डा लोकसभा सीट पर जहां भाजपा के वर्तमान सांसद निशिकांत दुबे अपनी हैट्रिक पूरी करने में जुटे हैं. वहीं महागठबंधन से झारखंड विकास मोर्चा प्रत्याशी प्रदीप यादव भी आंदोलनों के दम पर चुनाव में निशिकांत दुबे का हैट्रिक रोकने में लगे हैं.

गोडडा लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो इस सीट से कांग्रेस पांच बार, भाजपा सात बार, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय लोकदल ने एक बार जीत दर्ज किया है.

गोड्डा सीट कांग्रेस की परंपरगात सीट रही है, लेकिन 1977 में हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के जगदंबी प्रसाद यादव ने कांग्रेस के विजय रथ को रोका, इसके बाद के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर होता रहा.

1996 के बाद यह लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ के रूप में माना जाने लगा. 1996 से हुए सात चुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में 6 बार रही, वहीं कांग्रेस को एक बार ही जीत से संतोष करना पड़ा.

गोड्डा में क्या हैं चुनावी मुद्दे

गोड्डा लोकसभा क्षेत्र जहां एशिया का सबसे बड़ी ओपन कास्ट कोयला खान के लिए जाना जाता है. वहीं पिछले कुछ सालों से किसानों के विस्थापन विरोधी आंदोलन की वजह से चर्च में आया.

जहां अडानी पावर प्लांट के विरोध में हुये आंदोलन में जबरन भूमि अधिग्रहण का मामला भी जोर शोर से उठा. साल 2018 में अडानी कंपनी की ओर से खेत में लगे फसल पर जबरन बुलडोजर चलाने का काम किया गया था.

वहीं गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में पलायन, जल संकट, किसानों की समस्या, छात्रों की छात्रवृति,  बेरोजगारी, मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दों के साथ-साथ स्थानीयता का मुद्दा भी चुनावी मुद्दा बन रहा है.

अगर जबरन भूमि अधिग्रहण के मामले को प्रदीप यादव मुद्दा बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो आदिवासी क्षेत्रो में प्रदीप की बढ़त बनाने की संभावना है.  लेकिन विकास का मुद्दे को निशिकांत दुबे यदि मजबूती से रख पाते हैं तो प्रदीप भारी पड़ेंगे.

इस चुनाव में जातीय धुवीकरण, विकास, विस्थापन, रोजगार के सवाल गोडडा में चुनावी चर्चा का केन्द्र है. गोड्डा लोकसभा चुनाव परिणाम झारखंड के जमीन संबंधी आंदोलन का मजबूती की जमीनी हकीकत भी दिखायेगा. साथ ही अल्पसंख्यकों का वोट भी चुनाव परिणाम को बदलने का दम इस सीट पर दिखता है.

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क्या है दो प्रमुख उम्मीदवारों की खासियत

निशिकांत दुबे लगातार दो बार से गोडडा लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अपनी हैट्रिक लगाने में जुटे हैं. भाजपा का मजबूत आधार होना और अपनी समुदाय विशेष पर मजबूत पकड़ रखने के साथ ही भाजपा के रणनीतिकारों में से एक होना, इनके आधार को मजबूत बनाता है.

वहीं प्रदीप यादव विस्थापन भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सेदार बने हैं और जेल भी गये. साथ ही विधानसभा के बहसों में उन्होंने अपनी एक अलग छवि प्रस्तुत की है. जन सुलभ होने के कारण हाल के दिनों में मजबूती से राजनीतिक पकड़ बनाने में सफल हुए हैं.

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कब कौन जीता गोड्डा से

सोलहवीं लोकसभा चुनाव में किस दल को कितना मिला वोट अब तक कौन हुए सांसद

सोलहवीं लोकसभा चुनाव में जहां निशिकांत दुबे ने अपनी जीत को दोहराया. 3,80,500 वोट लाकर चुनाव जीते तो वहीं कांग्रेस के फुरकान अंसारी 3,19,818 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे. जबकि प्रदीप यादव झारखंड विकास मोर्चा उम्मीदवार के रूप में 1,93,506 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे

1962: प्रभु दयाल, कांग्रेस

1967: प्रभु दयाल, कांग्रेस

1971: जगदीश मंडल, कांग्रेस

1977: जगदंबी प्रसाद यादव, भारतीय लोक दल

1980: मौलाना समीनुद्दीन, कांग्रेस (इंदिरा)

1984: मौलाना समीनुद्दीन, कांग्रेस

1989: जनार्दन यादव, भाजपा

1991: सूरज मंडल, झारखंड मुक्ति मोर्चा

1996: जगदंबी प्रसाद यादव, भाजपा

1998: जगदंबी प्रसाद यादव, भाजपा

1999: जगदंबी प्रसाद यादव, भाजपा

2000: प्रदीप यादव, भाजपा

2004: फुरकान अंसारी, कांग्रेस

2009: निशिकांत दुबे, भाजपा

2014: निशिकांत दुबे, भाजपा

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