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साइबर अपराधियों ने जामताड़ा छोड़ देवघर को बनाया नया ठिकाना, राज्य में पिछले 1 महीने में 49 साइबर अपराधी गिरफ्तार

Ranchi: साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा ठिकाना जामताड़ा था. जब देशभर की पुलिस इन अपराधियों को पकड़ने के लिए जामताड़ा पहुंचने लगी तो ये अपना नया ठिकाना गोड्डा, देवघर और धनबाद को बनाने लगे.

इन जिलों से हाल के दिनों में अपराधियों की गिरफ्तारी इस बात की पुष्टि करती है. पिछले एक महीने में राज्य में 49 साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए जिनमें अकेले देवघर से 19 अपराधी गिरफ्तार किये गये.

झारखंड में एक महीने में 49 साइबर अपराधी गिरफ्तार

झारखंड में पिछले एक महीने के दौरान अलग-अलग जिले से 49 साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. जिसमें लातेहार 1, धनबाद 9, गिरिडीह 9, जामताड़ा 7, देवघर 19 और गोड्डा से 4 साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए.

हाल के दिनों में साइबर अपराधियों ने देवघर को अपना नया ठिकाना बनाया है. झारखंड में साल 2018 में साइबर अपराध के 2865 मामले सामने आये थे. रांची जिला में 243, जमशेदपुर में 246, जामताड़ा में 233 मामले सामने आये. अन्य जिलों में साइबर क्राइम के 100 से कम मामले दर्ज हुए. इसमें से सिर्फ 1,012 मामलों में पुलिस ने रिपोर्ट प्रस्तुत की है.

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जिस दर अपराध बढ़ रहे उसके अनुरूप अनुसंधान में नहीं आ रही तेजी 

इन दिनों राज्य में हर रोज कोई न कोई शख्स साइबर अपराध का शिकार हो रहा है और झारखंड में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन जिस दर से अपराध बढ़ रहे हैं उसके अनुरूप अनुसंधान में तेजी नहीं आ पा रही है. इस वजह से अदालतों में साइबर मामलों की सुनवाई की गति धीमी है.

एक ओर जहां सूचना प्राैद्योगिकी के अभाव में पुलिस को वांछित सफलता नहीं मिल पा रही है. वहीं, प्रशिक्षित अधिकारियों की कमी के कारण मामलों का अनुसंधान प्रभावित होता है.

ऐसा माना जाता है कि झारखंड में साइबर अपराध की शुरुआत जामताड़ा जिले के करमाटांड़ गांव से हुई है. साइबर अपराध के मामले में जामताड़ा जिला पूरे देश में कुख्यात हो गया है. साइबर अपराध ने जामताड़ा से निकलकर झारखंड के अन्य जिलों में भी अपना पांव पसार दिया है.

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पुलिस के लिए चुनौती बने साइबर अपराधी

साइबर अपराधी लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं. झारखंड के जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह, धनबाद, दुमका और हजारीबाग जिले देश भर की पुलिस के रडार पर हैं. यहां के साइबर अपराधी लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं.

देश भर में लोगों के बैंक खाते से रुपये उड़ाने वाले साइबर ठगी के अधिकतर आरोपी जामताड़ा जिले के करमाटांड़ और पड़ोसी थाना क्षेत्र नारायणपुर से ताल्लुक रखते हैं.

इस इलाके से हाल में की गयी साइबर ठगी के पुलिस रिकॉर्ड इस बात को साबित करते हैं. इन दोनों थाना क्षेत्रों में साइबर क्राइम की पड़ताल के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार, ओड़िशा, जम्मू कश्मीर समेत देश के अधिकांश राज्यों की पुलिस पहुंच चुकी है. हर दिन किसी न किसी राज्य व जिले की पुलिस यहां साइबर आरोपियों की खोज में आती है.

150 से ज्यादा साइबर अपराध के गिरोह सक्रिय

जानकारी के अनुसार, झारखंड में साइबर अपराध के 150 गिरोह सक्रिय हैं. इनमें से कई गिरोहों को झारखंड पुलिस ने चिह्नित भी कर लिया है. हालांकि, झारखंड पुलिस के लिए ये गिरोह बड़ी चुनौती बनी हुई है.

लेकिन पुलिस अब इनका सफाया करने के लिए सक्रिय दिख रही है. कई अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की भी तैयारी चल रही है. साइबर क्राइम के ज्यादातर मामले एटीएम से जुड़े होते हैं. अपराधी बूढ़े-बुजूर्ग या महिलाओं को शिकार बनाते हैं.

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राज्य के 18 जिलों में साइबर थाना नहीं

बढ़ते साइबर अपराध पर रोकथाम लगाने के लिए झारखंड के सभी जिलों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में अनुसंधान के लिए साइबर फॉरेंसिक लैब खोले जाने की बात कही गयी थी.

राज्य पुलिस मुख्यालय को साइबर मामलों के नोडल अधिकारी आइजी नवीन कुमार सिंह ने सभी जिलों में साइबर फॉरेंसिक लैब खोलने का प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा भी था.

राज्य में साइबर अपराध के अनुसंधान के लिए सभी जिलों में साइबर थाना खोलने की घोषणा तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय ने भी की थी. लेकिन हालात ये हैं कि वर्तमान में राज्य के सिर्फ छह जिलों में ही साइबर थाना चल रहे हैं. जबकि 18 जिलों में साइबर थाना नहीं खुल पाया है.

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