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झारखंड में अब नहीं बिक पायेंगे जीएम लैंड

एनजीडीआरएस के सहयोग से सरकार ने बना रहा नया सॉफ्टवेयर

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Ranchi: झारखंड में गैर मजरुआ आम (जीएम) जमीन की खरीद-फरोख्‍त पूरी तरह से बंद हो जायेगी. झारखंड सरकार के भू-राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस दिशा में पहल करते हुए भारत सरकार की एजेंसी नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम(एनजीडीआरएस) के सहयोग से एक नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो राज्य में भूमि निबंधन के लिए काम करेगी.

ज्ञात हो कि झारखंड में जमीन निबंधन जैप आईटी के सहयोग से ई-निबंधन के माध्यम से किया जाता रहा है.  ई-निबंधन का डेटा कई बार हैक व क्रैश हो चुका है. इसी को रोकने के उदेश्य से विभाग ने एनजीडीआरएस के साथ काम शुरु किया है. विभाग के इस सॉफ्टवेयर माध्यम से ऑनलाइन जमीन का निबंधन करेगी वो भी सुरुक्षित डेटा के साथ.

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जीएम लैंड का नहीं होगा निबंधन

इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से विवादित जमीन व जीएम लैंड निबंधन नहीं हो पायेगा. जैसे इन जमीनों का निबंधन किसी अधिकारी द्वारा कराने की पहल की जायेगी सॉफ्टवेयर उसे स्‍वीकार नहीं करेगा. एनआईसी के सहयोग से विभाग ने झारखंड के सारे जमीन का सर्वे कर डेटा तैयार कर लिया है. इस सॉफ्टवेयर पर आधार कार्ड, रजिस्ट्रर-2, पैन-कार्ड का भी सत्यापन किया जायेगा.

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नवबंर से शुरू होगा नये सॉफ्टवेयर से जमीन निबंधन

एनजीडीआरएस के सहयोग से भू-राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जमीन का निबंधन नये सॉफ्टवेयर पर करेगा. सॉफ्टवेयर का पहला 28 अक्टूबर को मूल्यांकन जमशेदपुर में किया जायेगा. इसके बाद पूरे राज्य में जमीन का निबंधन नवंबर माह से नये सॉफ्टवेयर के जरिये किया जायेगा.

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केंद्रीय एजेंसी नि:शुल्‍क दे रही सॉफ्टवेयर

सरकार ई-निबंधन के माध्यम से ऑनलाइन जमीन का निबंधन के लिए टेंडर के माध्यम से निजी कंपनियों का सहयोग लेती थी. इन कंपनियों पर सरकार सलाना दो से तीन करोड़ रूपये खर्च करती थी. वहीं एनजीडीआरएस सॉफ्टवेयर भारत सरकार की ओर झारखंड सरकार को नि:शुल्क दिया जा रहा है. डेटा संग्रह करने के लिए सरकार ने क्लाउड कंप्यूटिंग को 16 लाख रूपये दिये हैं. कुल मिलाकर 20 लाख के खर्च पर सरकार ऑनलाइन भूमि का निबंधन करेगी. वहीं सॉफ्टवेयर में तकनीकी सहायता एनजीडीआरएस की ओर विभाग को नि:शुल्क प्रदान किया जायेगा.

जमीन माफियाओं पर लगेगी लगाम: सचिव

भू-राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने कहा कि नये सॉफ्टवेयर से सरकार का आर्थिक बोझ कम होगा. साथ ही इसके माध्यम से जमीन माफियाओं पर भी लगाम लगेगी, जो जीएम लैंड व विवादित जमीन की खरीद-फरोख करते हैं. सुरक्षा के नजर से यह सॉफ्टवेयर काफी विश्वसनीय है.

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