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जीएम गोपाल सिंह हत्याकांड: पीएलएफआइ के नाम फर्जी चिट्ठी जारी कर पुलिस को गुमराह करने की रची जा रही थी साजिश

Hazaribagh: सदर थाना क्षेत्र में बीते 4 दिसंबर को त्रिवेणी सैनिक कंपनी के जीएम गोपाल सिंह की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर लिया. जांच में यह बात सामने आयी कि हत्याकांड का मास्टरमाइंड कटकमदाग मुखिया उदय साव ही पीएलएफआइ के नाम पर फर्जी चिट्ठी जारी कर पुलिस को गुमराह करने की साजिश रच रहा था.

पुलिस के द्वारा जब हत्याकांड में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार किया तब पता चला कि व्हाट्सएप पर जारी सभी पत्र फर्जी थे.

बता दें कि गोपाल सिंह की हत्या के अगले दिन ही पीएलएफआइ के नाम से चिट्ठी जारी कर हत्या की जिम्मेदारी भी ली गयी थी और कुछ ही दिन के बाद फिर से पीएलएफआइ के नाम पर चिट्ठी जारी की गयी थी और कहा गया था कि संगठन के द्वारा जिम्मेवारी लेने के बाद भी पुलिस के द्वारा निर्दोष को फंसाया जा रहा है.

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पीएलएफआइ के नाम पर दहशत बनाना चाहता था

मिली जानकारी के अनुसार कोल डंप ट्रांसपोर्टिंग में ठेका नहीं मिलने पर मुखिया उदय साव ने जीएम गोपाल सिंह की हत्या की साजिश रची थी.

उदय साव कोल डंप में ट्रांसपोर्ट का ठेका नहीं मिलने के लिए लिए एजीएम गोपाल सिंह को मुख्य जिम्मेदार मानता था. मुखिया कोल डंप में अपना दबदबा बनाने के लिए पीएलएफआइ के नाम पर दहशत बनाना चाहता था, लेकिन गोपाल सिंह के रहते यह संभव नहीं था.

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कई महीने से रची जा रही थी हत्या की साजिश

गिरफ्तार हुए एक आरोपी मो. मुजम्मिल और अंबेडकर की भी पैसे को लेकर गोपाल सिंह से अनबन थी. अंबेडकर गंझू भी त्रिवेणी कंपनी का ही आदमी है. उसे एक लाख रुपये प्रतिमाह मिलता है. इसके बाद तीनों ने मिल कर गोपाल सिंह को ही रास्ते से हटाने की योजना बनायी थी.

गोपाल सिंह की हत्या का प्रयास पिछले आठ माह से चल रहा था. गोपाल सिंह बुलेट प्रूफ वाहन से चलते थे, इस कारण वे सफल नहीं हो पा रहे थे. हत्या को लेकर गोपाल सिंह के घर की रेकी की जा रही थी.

2 दिसंबर को भी हत्या का प्रयास किया गया, लेकिन अपराधी सफल नहीं हो सके. घटना के दो दिन पूर्व से शूटर मुखिया के घर पर ही ठहरे हुए थे. जीएम को शूटर सोनू पंडित ने गोली मारी. घटना में मुखिया के ही मोटरसाइकिल का प्रयोग हुआ. हत्या के बाद शूटर नया बस स्टैंड से पटना रवाना हो गये.

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