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बालिका गृह कांडः बाल संरक्षण इकाइयों के 14 अधिकारियों पर गिरी गाज

कार्य में लारपवाही और कर्तव्यहीनता का आरोप

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Patna:  मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ यौन शोषण मामले की सीबीआई जांच के बीच राज्य के समाज कल्याण विभाग ने मुजफ्फरपुर बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक सहित विभिन्न जिलों की बाल संरक्षण इकाइयों के कुल 14 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है. रविवार देर रात समाज कल्याण विभाग द्वारा इस संबंध में अलग-अलग अधिसूचना जारी की गई.

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14 अधिकारी निलंबित

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, निलंबन की उक्त कार्रवाई जिन बाल संरक्षण इकाइयों के सहायक निदेशक के पद पर तैनात पदाधिकारियों के खिलाफ की गयी है उनमें दिवेश कुमार शर्मा (मुजफ्फरपुर), सीमा कुमारी (मुंगेर), घनश्याम रविदास (अररिया), कुमार सत्यकम (मधुबनी), गीतांजलि प्रसाद (भागलपुर), नेहा नुपूर (गया) और आलोक रंजन (भोजपुर) शामिल हैं.

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इसके अतिरिक्त जिन अन्य पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है उनमें मुंगेर जिले में बाल संरक्षण पदाधिकारी, संस्थागत: के पद पर वर्तमान में कार्यरत तथा पूर्व में इसी पद पर अररिया में कार्यरत रहे अमरजीत कुमार, भागलपुर जिले में बाल संरक्षण पदाधिकारी (संस्थागत) के पद पर वर्तमान में कार्यरत तथा पूर्व में इसी पद पूर्वी चंपारण जिला में कार्यरत रहे रंजन कुमार, मधेपुरा जिले में बाल संरक्षण पदाधिकारी- संस्थागत: के पद पर वर्तमान में कार्यरत तथा पूर्व में मधुबनी में इसी पद पर कार्यरत रहे संगित कुमार ठाकुर, शिवहर जिले में बाल संरक्षण पदाधिकारी- संस्थागत: के पद पर वर्तमान में कार्यरत तथा पूर्व में पूर्वी चंपारण में इसी पद पर कार्यरत रहे विकास कुमार, अररिया जिले के पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक पद पर कार्यरत मोहम्मद फिरोज, पटना में बाल संरक्षण पदाधिकारी-गैर संस्थागत: के पद पर कार्यरत लवलेश कुमार सिंह तथा गया जिले में बाल संरक्षण पदाधिकारी-संस्थागत: के पद पर कार्यरत मिराजुद्दीन सदानी को निलंबित कर दिया गया है.

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सामाजिक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित उक्त निलंबन अधिसूचनाओं में कहा गया है गत 26 मई की राज्य स्तरीय बैठक में मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की रिपोर्ट के मद्देनजर इन जिलों के बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारियों को कार्रवाई किए जाने के लिए निर्देशित किया गया था लेकिन उनकी लापरवाही एवं कर्तव्यहीनता से दोषियों के विरूद्ध समय पर कार्रवाई नहीं होने से विभाग और सरकार के समक्ष असहज स्थिति उत्पन्न हुई है.

उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों द्वारा मुजफ्फरपुर मामले में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी तथा मंजू वर्मा के मंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने की लगातार मांग के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा था कि टीआईएसएस की रिपोर्ट आने के करीब दो महीने के बाद विभाग द्वारा उक्त मामले में कार्रवाई क्यों शुरू की गयी.

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