Bihar

बालिका गृह मामला : CBI के विशेष निदेशक की निगरानी में जांच आगे बढ़ाने का निर्देश

Patna : बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले में पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को सीबीआई को दिल्ली में उसके विशेष निदेशक की निगरानी में जांच को आगे बढाने का निर्देश दिया. और कहा कि विशेष निदेशक अपने तौर पर नये जांच दल का गठन कर सकते हैं. मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह और न्यायमूर्ति रवि रंजन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई को जांच में तेजी लाने का भी निर्देश दिया.

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सुनवाई की तारीख आगामी 17 सितबंर

खंडपीठ ने जांच में हुई प्रगति को मामले की अगली सुनवाई की तारीख आगामी 17 सितबंर को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है. खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्रदेश में सरकार द्वारा संचालित और सरकार से मान्यता प्राप्त स्वयंसेवी संगठनों की संख्या बताने और उनके खातों का अंकेक्षण अथवा उनका सामाजिक अंकेक्षण कराया गया या नहीं, इस बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. खंडपीठ ने इस मामले में बहाल न्यायालय मित्र प्रकृति शर्मा को उन स्थानों जहां मुजफ्फरपुर बालिका गृह की लडकियों को रखा गया है, वहां जाकर तथा उनसे बात कर रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया.

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प्रगति रिपोर्ट जमा करने में विफल रहने पर कोर्ट ने की थी CBI की खिंचाई

अदालत ने गत 23 अगस्त को इस मामले की जांच की प्रगति रिपोर्ट जमा करने में विफल रहने पर सीबीआई की खिंचाई की थी. अदालत ने गत 06 अगस्त को सीबीआई को मामले की जांच में हुई प्रगति के संबंध में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था. इस मामले की जांच कर रहे जे पी मिश्र का स्थानांतरण गत 21 अगस्त को पटना के उपमहानिरीक्षक मुख्यालय कर दिया गया था.

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मामले में संचालक ब्रजेश ठाकुर सहित 10 लोग गिरफ्तार

मुंबई स्थित टीआईएसएस ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह सहित प्रदेश के अन्य अल्पावास गृह और बाल गृह में अनियमितता बरते जाने को लेकर समाज कल्याण विभाग को एक सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट सौंपी थी. जिसके बाद मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. मामले में संचालक ब्रजेश ठाकुर सहित 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. विपक्षी दलों की लगातार मांग पर प्रदेश की नीतीश कुमार की सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी.

सांसदों और विधायकों को हर दो सप्ताह में आश्रय घरों का दौरा करना चाहिए : मेनका गांधी 

कुछ दिन पहले एक कार्यकर्म में  मेनका ने कहा था कि वो पिछले चार सालों से सभी सांसदों को यह लिखती आ रही हैं कि वे अपने क्षेत्रों के बाल गृहों की निगरानी करें, क्योंकि सरकार हमेशा निरीक्षण नहीं कर सकती. उनके क्षेत्रों के सभी बालगृहों की सूची के मुताबिक कोई एक सांसद भी इन केंद्रों में एक बार भी नहीं गया. उन्होंने सांसदों से आग्रह करते हुए कहा कि वे कम से कम हर दो सप्ताह में आश्रय घरों का दौरा करें, वहां जाएं. गौरतलब है कि मेनका बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण की घटना के संदर्भ में बात कर रही थी जब उन्होंने उक्त बातें कहीं.

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