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#JharkhandElection 14 साल बाद JMM गिरिडीह सीट जीत कर 2004 की अधूरी फिल्म को पूरा कर पायेगा?

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Manoj  Kumar Pintu

Giridih :  संथाल परगना में मतदान का दौर शुक्रवार को खत्म होने के साथ पांच चरण में चुनाव की प्रकिया भी समाप्त हुई. लिहाजा, किसके सिर पर जीत का सेहरा सजेगा? इसकी तस्वीर 23 दिसबंर को मतगणना के दिन साफ हो जाएगी. वैसे गिरिडीह विस सीट से कई बड़े सट्टेबाज झामुमो के जीत पर सट्टा लगाने के लिए तैयार दिख रहे हैं.

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2019 के विस चुनाव में अगर झामुमो गिरिडीह सीट हासिल कर लेती है तो यह झामुमो का 14 साल पुराना किसी फिल्म के अधूरे ट्रेलर को पूरा करने के समान होगा. क्योंकि साल 2004 में पूर्व विधायक मुन्ना लाल ने झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज कराया था.

वहीं अब 14 साल बाद जो समीकरण बना, उस समीकरण में झामुमो के प्रत्याशी सुदिव्य कुमार सोनू खुद को सैट करने में सफल रहे. लेकिन झामुमो अब कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है. यही कारण है कि चुनाव के बाद भी झामुमो फूंक-फूंक कर हर कदम रख रही है. लिहाजा, गिरिडीह के झामुमो प्रत्याशी सुदिव्य कुमार सोनू और पार्टी अध्यक्ष सोनू सिंह मतगणना तक खुद रणनीति बनाने में जुटे है.

झामुमो के नेता व कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पहुंचते हैं तो मतगणना में भूमिका पर पर खास चर्चा की जाती है. वैसे इंतजार सबों को अब 23 दिसबंर का ही है. बहरहाल, झामुमो के समर्थकों का उत्साह कई दलीय और निर्दलीय प्रत्याशियों के भीतर घबराहट ही पैदा करता नजर आ रहा है.

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शहरी क्षेत्र के मतदाता ने इस बार बूथ से दूरी बनाये रखी

 

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चौथे चरण के मतदान के दौरान शहरी क्षेत्र मतदान का जो आंकड़ा दर्ज किया गया. वह वाकई भाजपा समेत कुछ दलों के लिए चिंता की बात रही है. क्योंकि शहरी क्षेत्र के मतदाता इस बार बूथ से दूरी बनाये रखी. जो उम्मीद थी कि वोटर घर से निकलेगें, और मतदान करेगें.

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लेकिन शहर के चंद बूथों में वोटर नजर आये. जबकि मतदान की प्रकिया सुबह सात बजे से शुरु हो गयी थी. बावजूद दोपहर डेढ़ बजे तक बूथ में मौजूद मतदान कर्मी वोटरों की प्रतीक्षा में लगे रहे. इस दौरान बूथ में छिटपुट वोटर आते. बूथों में आने वाले वोटरों को ना तो लाईन में खड़ा होना पड़ रहा था, और ना ही प्रतीक्षा करना पड़ा.

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मतदान की रोचक तस्वीर

लेकिन मतदान की रोचक तस्वीर ग्रामीण क्षेत्र के बूथों में देखने को मिला. जिसमें जिला मुख्यालय से सटे उदनाबाद, हरसिंगरायडीह, चतरो, अजीडीह, गादीश्रीरामपुर के अलावे शीतलपुर, मैगजीनिया, सिरसिया-सिहोडीह के मतदान केन्द्रों में वोटर की भीड़ दिखी.

वहीं पीरटांड के तमाम नक्सल प्रभावित मतदान केन्द्रों में आदिवासी और गैर आदिवासी वोटरों की लंबी-लंबी लाईन लगी हुई थी. आदिवासी वोटरों को सूबे में झामुमो का पंरपरांगत वोटर माना जाता है. जिसमें सेंधमारी करना किसी राजनीतिक दल के बूते की बात नहीं है.

वहीं पीरटांड के गैर आदिवासी मतदान केन्द्रों में भी काफी हद तक वोटरों की लाईन तो दिखी, लेकिन वोटर साईलेंट ही रहे. कमोवेश, यही स्थिति शहर के मतदान केन्द्रों में भी नजर आयी. खराब मौसम के बीच जो वोटर निकले, उनका समर्थन किसे गया, यह तस्वीर भी साफ नहीं हो पाई. साईलेंट वोटरों का हाल तो ये रहा कि वे वोट डालने के बाद भी चुनाव के चर्चा से दूरी बनाएं रखा.

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