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गिरिडीह: चैताडीह हेल्थ सेंटर में दो नवजातों की मौत का जिम्मेवार कौन? सीएस ने चिकित्सक को दी क्लीनचिट

परिजनों के गुस्से का शिकार बने चिकित्सक का दावा- रेफर करने के बाद भी बच्चों के इलाज में डटे रहे परिजन

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Manoj Kumar Pintu

Giridih: मंगलवार की सुबह चैताडीह स्थित मातृत्व शिशु स्वास्थ्य इकाई में दो नवजात की मौत हो गई. इस घटना से जहां लोग सकते में दिखे, वहीं परिजनों का आक्रोश चरम पर दिखा.

परिजनों ने घटना के बाद चिकित्सक डॉ. गोविंद प्रसाद को जिम्मेवार मानते हुए शिशु स्वास्थ इकाई में हंगामा किया. इस दौरान चिकित्सक के साथ धक्का-मुक्की हुई. दो नर्सों के साथ भी मामूली मारपीट की खबर है.

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लेकिन इन सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि इन मासूमों की मौत का जिम्मेवार आखिर कौन है. क्योंकि सिविल सर्जन ने तो डॉ. को क्लीन चिट दे दी है.

चिकित्सक को सीएस की क्लीन चिट

घटना के लिए चिकित्सक को जिम्मेवार मान जहां परिजन आपे से बाहर दिखे. वहीं गिरिडीह के सिविल सर्जन डॉ. राम रेखा प्रसाद ने उन्हें निर्दोष मानते हुए चिकित्सक के बदौलत ही शिशु स्वास्थ केन्द्र के संचालन का दावा कर रहे हैं.

सिविल सर्जन डॉ. प्रसाद ने इलाज में लापरवाही और गलत इंजेक्शन से हुई मौत की वजह मानने से भी इनकार करते हुए कहा कि हर बच्चे को जन्म लेने के बाद सामान्य तौर पर जो टीकाकरण लगाया जाता है. सिर्फ वही लगाया गया, इसके बाद कोई और इंजेक्शन नहीं दिया गया.

लिहाजा गलत इंजेक्शन लगाने की बात को सिर्फ अफवाह बताते हुए सीएस ने दावा किया कि अमूमन इस टीकाकरण के बाद हर नवजात को बुखार आना तय है. जिसके लिए दवाई दी जाती है. लेकिन यह टीकाकरण किसी नवजात के मौत की वजह नहीं बन सकता.

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रात में ही किया था रेफर- डॉ. गोपाल प्रसाद

इधर शिशु स्वास्थ इकाई में परिजनों के गुस्से का शिकार बने डॉ. गोंविद प्रसाद ने कहा कि दो दिनों के भीतर यहां तीन बच्चों का जन्म हुआ.

जिसमें से एक बच्चे की स्थिति शुरु से ही खराब थी, एसएनसीयू में रखने के बाद भी जब बच्चे की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो सोमवार की शाम उसे रेफर कर दिया गया.

वहीं मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के कैलीबाद गांव निवासी सुधीर ठाकुर और शहर के गार्डेना गली निवासी शशिराम के बच्चे की स्थिति सोमवार की शाम अलग-अलग समय में खराब होने के बाद दोनों को एसएनसीयू में भर्ती कर दिया गया.

लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होते देख दोनों के पिता को उनके बच्चों की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि चाहें तो बच्चों को कहीं और इलाज करा सकते है. इसके लिए देर रात दोनों बच्चों का रेफर कागजात भी तैयार कर दिया गया.

चिकित्सक की दलील है कि परिजनों ने देर रात होने का हवाला देकर ले जाने से इनकार कर दिया. वहीं मंगलवार सुबह दोनों नवजात की मौत हो गयी.

जिसके बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और जमकर हंगामा भी हुआ. चिकित्सक प्रसाद ने यह भी कहा कि पुलिस को जानकारी देने के बाद भी वो समय पर नहीं पहुंची. मामला जब शांत हुआ तब पचंबा थाना प्रभारी शर्मानंद सिंह पुलिस जवानों के साथ पहुंचे और पूरे मामले से अवगत हुए.

जाहिर है इन दलीलों से डॉ. गोपाल प्रसाद अपनी जान व साख बचा रहे हैं. वहीं सीएस ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी. लेकिन सवाल अब भी वही है कि इन नवजातों की मौत का जिम्मेवार आखिर है कौन, लापरवाही या फिर बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था या फिर गरीबी.

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