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गिरिडीह : डॉक्टर साहब गायब, इंतजार में बैठे रहते हैं एचआईवी मरीज

Giridih : राज्य सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन(नाको) के सहयोग से एचआईवी मरीजों की चिकित्सा के लिए राज्य के कई सदर अस्पतालों में एआरटी सेंटर भले ही खोल दिया है, मगर इनमें कार्यरत चिकित्सकों की लापरवाही से एचआईवी मरीजों की तकलीफ और बढ़ गई है. ऐसा ही दर्द गिरिडीह के एचआईवी मरीजों को भी झेलना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि गिरिडीह सदर अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में कार्यरत मेडिकल ऑफसर डॉ अमित गोंड हमेशा अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं. जिससे उन्हें चिकित्सा कराने में काफी परेशानी होती है. न्यूजविंग ने जब पता किया तो इन आरोपों को सही पाया. शनिवार को भी सेंटर में जिले के सुदूर गांवों से आए मरीज डॉक्टर के इंतजार में सुबह से ही बैठे मिले.

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 झूठ बोलकर गायब रहते हैं डॉक्टर

जब न्यूजविंग के संवाददाता ने एआरटी सेंटर के कर्मचारी से डॉक्टर के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि डॉक्टर साहब ऑपरेशन कर रहे हैं. जानकारी लेने पर पता चला कि डॉक्टर अमित सदर अस्पताल के किसी भी ओटी में नहीं थे, बल्कि अपने निजी क्लीनिक में मौजूद थे. साफ है कि इसी तरह झूठ बोलकर मरीजों को निपटाया जाता है.

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हजारों एचआईवी मरीजों को होती है परेशानी

सेंटर में उपस्थित कई एचआईवी मरीजों और पीएलएचए नेटवर्क (पीपल लिविंग विद एचआईवी एड्स नेटवर्क) के जिला सदस्यों ने न्यूजविंग को नाम न बताने की शर्त पर बताया कि गिरिडीह जिले में एचआईवी पीड़ितों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. जिले भर के एचआईवी पॉजिटिव मरीज हर माह दवा और चिकित्सा लेने एआरटी सेंटर आते हैं. मगर सेंटर में कार्यरत एसएमओ डॉ अमित गोंड कभी समय पर नहीं आते और अपने निजी क्लीनिक में व्यस्त रहते हैं. जबकि उन्हें सरकार से इस पद के लिए मोटी तनख्वाह मिलती है.

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