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गिरिडीह :  65 हजार प्रवासी मजदूर और एक हजार छात्रों को लाने के लिए परिवहन विभाग ने खर्च किये एक करोड़ 13 लाख, अब उठ रहे सवाल

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Manoj Kumar Pintu

Giridih :  कोरोना काल में गिरिडीह परिवहन विभाग ने एक करोड़ 13 लाख का ईंधन जलाकर 65 हजार प्रवासी मजदूर और एक हजार से अधिक छात्रों को कोटा से लाया. इसके लिए 140 बस और छोटे चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल किया गया. लॉकडाउन के बीच परिवहन मंत्रालय ने गिरिडीह परिवहन विभाग को खर्च के लिए विशेष फंड दिया था. हालांकि खर्च की गई राशि में इन वाहनों का किराया शामिल नहीं है. लेकिन खर्च की गई राशि में बस और छोटे वाहनों के चालक और उपचालक के आने-जाने का खर्च और वाहनों के ईंधन की राशि शामिल है.

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डीटीओ कार्यालय ने एक करोड़ 13 लाख रुपये खर्च कर 65 हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों और एक हजार छात्रों को लाया. इस पर अब सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि इसके बाद भी बगैर सरकारी सहयोग के करीब 25 हजार से अधिक की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने स्तर से गिरिडीह पहुंचे. वैसे डीटीओ कार्यालय से छत्तीसगढ़ के कोरबा, दुर्ग, रायपुर, रायगढ़, बिलासपुर और उड़ीसा के बालासोर से हजारों प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए वहां से बस रवाना की गयी थी.

इन स्थानों से प्रवासी मजदूरों को बीतें दो मई से आठ मई के बीच लाया गया था. इसके बाद गुजरात, मुंबई, राजस्थान, गोवा, बंगाल, दिल्ली जैसे महानगरों से प्रवासी मजदूरों को स्पेशल ट्रेन सेवा से झारखंड के कोडरमा, धनबाद, पलामू, जसीडीह, हटिया, रांची पहुंचाया गया.

राज्य के इन जिलों से प्रवासी मजदूरों को गिरिडीह लाने के लिए डीटीओ कार्यालय ने बस के साथ छोटे चार पहिया वाहन दडांधिकारी और पुलिस जवानों को उपलब्ध कराये.

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भुगतान के लिए कार्यालय का चक्कर लगा रहे बस मालिक  

वहीं किराये के भुगतान के लिए हर रोज जिले के बस मालिक परिवहन कार्यालय पहुंच रहे हैं. लेकिन वाहन मालिकों को निराशा ही हाथ लग रही है. इस बाबत न्यूजविंग.कॉम ने डीटीओ भागीरथ प्रसाद से जानकारी ली. जानकारी मिली कि कोरोना काल में दो मई से प्रवासी मजदूरों को लाना शुरू किया गया.

जिन जिलों के रेलवे स्टेशनों से प्रवासी मजदूरों को लाया गया, वहां के लिए बस व छोटे वाहनों को ईंधन दिया गया. जिसमें धनबाद के लिए 75 लीटर, पलामू के लिए 250 लीटर, कोडरमा के लिए 80 लीटर, हटिया के लिए 175 लीटर उपलब्ध कराए गए थे. इसके बाद प्रवासी मजदूरों और छात्रों को ला पाना संभव हो पाया.

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