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गिरिडीह : प्राकृतिक सौंदर्य के साथ एेतिहासिक और धार्मिक पर्यटन का आनंद ले सकते हैं पर्यटक

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Ritesh Sarak

Giridih : पर्यटन का महत्व और उसकी लोकप्रियता को देखते हुए ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1980 से 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के तौर पर मनाने का फैसला लिया था. तब से लेकर हर वर्ष इस तारिख को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है. भारत के झारखंड राज्य का गिरिडीह जिला कई ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटक स्थलों को अपने में समेटे हुए है. स्थानीय भाषा के अनुसार गिरिडीह का शाब्दिक अर्थ होता है पहाड़ियों की भूमि. यह शहर राज्य के चुनिंदा सबसे खास पर्यटन गंतव्यों में भी गिना जाता है. यह स्थान राज्य के सबसे ऊंचे पारसनाथ पर्वत से आकर्षक तरीके से घिरा हुआ है. जिले में कई लोकप्रिय पर्यटक स्थान हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर एक अलग अनुभव देते हैं.

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पारसनाथ : झारखंड का ताज

पारसनाथ पर्वत पर स्थित जल मंदिर
पारसनाथ पर्वत पर स्थित जल मंदिर

पारसनाथ पहाड़ी झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पहाड़ियों की एक श्रृंखला है. 1350 मीटर ऊंचा यह पर्वत जैन धर्मावलंबियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल केंद्र में से एक है. वे इसे सम्मेद शिखर कहते हैं. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के नाम पर पहाड़ी का नाम पारसनाथ रखा गया है. मान्यता है कि 24 जैन में से 20 तीर्थंकरों ने इस पहाड़ी पर मोक्ष प्राप्त किया. पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर भगवान पार्श्वनाथ का भव्य मंदिर स्थापित है. ठीक इसके नीचे एक जल मंदिर अवस्थित है. इसके लिए प्रत्येक तीर्थंकरों के नाम पर पहाड़ी पर एक मंदिर है. हर साल देश व विदेश से लाखों सैलानी तीर्थवंदना के लिए पारसनाथ आते हैं. यहां का प्राकृतिक सुंदरता बरबस ही पर्यटकों को आकर्षित कर लेता है. स्थानीय आदिवासी समाज इसे देवता की पहाड़ी मारंग बुरु कहते हैं. वे बैसाख (मध्य अप्रैल) में पूर्णिमा के दिन शिकार त्यौहार मनाते हैं.

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खंडोली
खंडोली

खंडोली : खूबसूरत पिकनिक स्पॉट

झारखंड में स्थित खंडोली, रोमांचकारियों के लिए आकर्षक पर्यटक स्थलों में से एक है. गिरिडीह के उत्तर पूर्व में 10 किमी की दूरी पर स्थित खंडोली एक जलाशय है. जो विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स और रोमांच को स्थान देता है. पूरी खंडोली साइट विस्तृत रूप से एक घड़ी के टावर और एक पहाड़ी, जिसकी ऊंचाई 600 फीट है से साफ दिखाई पड़ती है. यहां पक्षियों की असंख्य प्रजातियां दिख जाती हैं, जिन्हें पक्षियों के शौकीन ढूंढ सकते हैं. यहां यात्री नौका विहार, पर्वतारोहण, रॉक क्लाइम्बिंग, पैरासेलिंग के अलावा कायाकिंग का मजा भी ले सकते हैं. खंडोली जलाशय पर पानी की कुछ गतिविधियां जैसे पैडल बोट, स्पीड बोट और वाटर स्कूटर आदि का आनंद उठाया जा सकता है. स्कूबा डाइविंग, कैनोइंग, सेलिंग, रिंगो सवारी, राफ्टिंग, वाटर स्कीइंग और सर्फिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं.

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उसरी झरना : रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रिय नदी

उसरी झरना
उसरी झरना

उसरी नदी जिले की बारकर नदी की एक सहायक नदी है, जो एक खड़ी घाटी से बहती है. उसरी नदी को शहर का लाइफ लाइन कहा जाता है. लोगों के लिए उसरी वाटर फॉल एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटक स्थल है. दिसंबर और जनवरी माह में यहां पर स्थानीय और बाहरी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है. उसरी नदी का ऐतिहासिक महत्व भी है. कवि गुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर को यह नदी काफी पसंद थी. उन्होंने गिरिडीह प्रवास के दौरान अपनी लेखनी में इसकी खूबसूरती का वर्णन किया था. इसलिए यह स्थल बंगाली पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है.

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जेसी बोस स्मारक
जेसी बोस स्मारक

जेसी बोस स्मारक : महान वैज्ञानिक की धरोहर

गिरिडीह में महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का स्मारक है. इसका बहुत ही ऐतिहासिक महत्व है. यह राष्ट्रीय धरोहर है.  जेसी बोस ने गिरिडीह में ही अपने जीवन का अंतिम समय गुजारा था. यहां उन्होंने एक घर खरीदा था और कई प्रयोग भी किए थे. उनका निवास ‘शांति भवन’ आज जेसी बोस स्मारक के रूप में जाना जाता है. सन् 1936 में उनकी मृत्यु इसी घर में हुई थी.

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ब्रह्म समाज मंदिर : विरासत का सौंदर्य

ब्रह्म समाज मंदिर

गिरिडीह एक समय राजा राम मोहन द्वारा शुरू किए गए ब्रह्म समाज का महत्वपूर्ण केन्द्र था. उस दौर में यहां ब्रह्म समाज ने दो मंदिर स्थापित किए गए थे. एक साधारण ब्रह्म मंदिर और दूसरा आदि ब्रह्म मंदिर. दोनों मंदिर आज भी शहर के लिए धरोहर हैं. इनका विशेष ऐतिहासिक महत्व है.

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हरिहर धाम
हरिहर धाम

हरिहर धाम : सबसे बड़ा शिवलिंग

झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित हरिहर धाम पर्यटकों के पसंदीदा स्थलों में से एक है. इसे हरिहर धाम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर में भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित है, जिसकी ऊंचाई 65 फीट है. 25 एकड़ में फैला हुआ यह मंदिर नदी से घिरा हुआ है. इस बड़े शिवलिंग को पूरा करने में तीस साल लगे थे.

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कई ऐतिहासिक चर्च

प्राकृतिक स्थानों के अलावा आप यहां के चुनिंदा प्राचीन धार्मिक स्थलों के सैर का भी प्लान बना सकते हैं. पचम्बा क्षेत्र में स्थित स्टीवंसन मेमोरियल चर्च एक प्राचीन ईसाई स्थल है जिसका निर्माण 1871 में एक विदेशी आर्चिबाल्ड टेम्पलेटन के करवाया था. उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों की सेवा के लिए इस क्षेत्र का दौरा किया और एक अस्पताल की स्थापना भी की थी. इसके अलावा पेंटीकॉस्टल चर्च भी काफी पुराना और ऐतिहासिक है.

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