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गिरिडीह : दर्जन भर मौजों के रैयतदारों की जमाबंदी रद्द करने की अनुशंसा, खरीद-बिक्री पर ‘प्रतिबंध’

Giridih : पूर्व अपर समाहर्ता अशोक साह सदर अचंल के दर्जन भर से अधिक मौजों के गैरमजरुआ खास के जमीन के रैयतदारों की जमाबंदी को रद्द करने की अनुशंसा कर चले गये हैं. मामला सामने आने के बाद शहर में हड़कंप मचा हुआ है. मामले में सदर अंचल के तत्कालीन सीओ की भी भूमिका बतायी जा रही है.

जानकारी के अनुसार, सरकार के राजस्व, निबंधन, भूमि सुधार विभाग के सचिव को लिखे पत्र पत्रांक संख्या- 3400 में गिरिडीह अचंल के कोल्नाटांड़, पांडेयडीह, मकतपुर, कमरसाली, पेसराबहियार, चैताडीह, जोरबाद, खंडीहा, गंगापुर समेत दर्जन भर से अधिक मौजों की जमीन का खातियान मुहैया नहीं होने का हवाला देते हुए तत्कालीन अपर समाहर्ता अशोक साह ने ऐसे मौजों के गैरमजरुआ खास की जमीन के रैयतदारों की जमाबंदी को रद्द करने की अनुशंसा की है.

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शहर की 90 फीसदी जमीन गैरमजरुआ खास

दरअसल, शहर की 90 फीसदी से अधिक जमीन गैरमजरुआ खास है. जमीदारों द्वारा रैयतदारों के नाम जमाबंदी की गयी थी.

फिलहाल कितने मौजा और कितने रैयतदारों की जमाबंदी को प्रतिबंधित किया गया इसका आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है. जब तक कोई नया आदेश नहीं आ जाता, तब तक रैयतदार अपनी जमीन की खरीद-ब्रिकी भी नहीं कर सकते. प्रतिबंध लगाने के बाद एक तरह से सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ा है.

झामुमो करेगा आंदोलन

झामुमो ने इस मामले पर तेवर तल्ख करते हुए आगामी 30 सितबंर को जनांदोलन करने का निर्णय लिया है.

झामुमो के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि जिस प्रकार का यह निर्णय लिया गया है उससे सदर अचंल के लाखों रैयतदारों को अपने पूर्वजों की सालों पुराने जमीन से बेदखल कर दिया जायेगा. ऐसे में झामुमो चुप कैसे रह सकती है.

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वकीलों ने गलत फैसला करार दिया

तत्कालीन अपर समाहर्ता अशोक साह के इस निर्णय को अनुचित बताते हुए शहर के शास्त्री नगर के अधिवक्ता और जमीन के जानकार पंकज सिन्हा ने एकीकृत बिहार के एक फैसले के साथ झारखंड उच्च न्यायालय के हाल के दिए आदेश का हवाला देते हुए कहा कि साल 01-01-1946 में हुए समझौते के आधार पर गैरमजरुआ खास की जमीन जमाबंदी को कोई अपर समाहर्ता दुबारा खोल भी नहीं सकता. फिर रद्द करने की अनुशंसा करना तो दूर है.

बरसमिया के एक और अधिवक्ता अजय सिन्हा मंटु ने भी तत्कालीन अपर समाहर्ता की अनुशंसा को गलत ठहराते हुए कहा कि जो रैयतदार कई सालों से पूर्वजों की जमीन पर रह रहे हैं उसकी जमाबंदी को रद्द करने की अनुशंसा किया जाना न्यायलय के आदेशों का उल्लघंन ही है.

इधर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष निर्मल झुनझुनवाला ने कहा कि गिरिडीह की स्थिति पहले से खराब है. वहीं अब ऐसे पदाधिकारी जो कोर्ट के आदेशों का भी उल्लघंन कर रहे हैं, वैसे पदाधिकारियों को कोई भी सरकार क्यों ढो रही है? ऐसे पदाधिकारियों को तो तुंरत पद से हटाना चाहिए.

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