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गिरिडीह : दर्द और अभाव में जी रहा है उस्मान अंसारी का परिवार, मॉब लिंचिंग से तबाह हुई थी जिंदगी

अब तक नहीं मिली कोई सरकारी सहायता

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Giridih : पिछले वर्ष जून माह में गिरिडीह के देवरी में हुई मॉब लिंचिंग की घटना में उस्मान अंसारी और उसका पूरा परिवार तबाह और बर्बाद हो गया था. तब सरकार और प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता और मुआवजे देने की घोषणा की थी. लेकिन घटना के एक साल से अधिक बीत जाने के बावजूद आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. उक्त हिंसा में बुरी तरह घायल होने वाले उस्मान अब शारीरिक रूप से भी लाचार हो चुके हैं. सामाजिक हिंसा ने तो मानसिक रूप से पहले ही उन्हें तोड़ दिया है. उस्मान को भी सरकार से अब कोई उम्मीद नहीं है.

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जिंदा लाश बन गयी है जिंदगी

उल्लेखनीय है कि पिछले साल गिरिडीह के देवरी प्रखंड के बेरियो में गोरक्षा के नामक पर दूध बेचने वाले उस्मान अंसारी को हिंसक भीड़ ने जान से मारने के लिए हमला कर पीटपीट कर बुरी तरह घायल कर दिया था. भीड़ ने उस्मान अंसारी के घर को भी जलाकर खाक कर दिया था. पुलिस ने भीड़ से बचाकर किसी तरह उस्मान और उसके परिवार की जान बचाई थी. उस्मान की जान तो बच गई, लेकिन शारीरिक रूप से वह लगभग लाचार हो गए. लगभग सात महीने उस्मान अस्पताल में भर्ती रहे. अब वह चाह कर भी पहले की तरह काम नहीं कर सकते. दो वक्त की रोटी की जुगाड़ भी बड़ी मुश्किल से हो पाती है. अपनी दुर्दशा पर उस्मान कहते हैं कि उस घटना के बाद उनकी जिंदगी एक जिंदा लाश बन कर रह गई है.

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कांग्रेसी नेत्री ने उस्मान का दर्द साझा किया

गिरिडीह जमुआ की कांग्रेस नेत्री डॉ मंजू कुमारी ने देवरी के बेरियो के बरवाबाद स्थित उस्मान अंसारी के घर जाकर उनसे भेंट की और हालात का जायजा लिया. डॉ मंजू ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि अफवाह और असामाजिक तत्वों के बहकावे में आकर हिंसक भीड़ ने बेकसूर उस्मान और उसके परिवार को तबाह कर दिया था. आज लाचार उस्मान के पास अपनी रोजी रोटी चलाने और परिवार का भरण पोषण करने का कोई साधन नहीं है. जिला और प्रखंड के अधिकारियों ने एक बार भी इस पीड़ित परिवार की सूध लेने की जहमत तक नहीं उठाई. सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली है. डॉ मंजू ने सरकार से उस्मान के परिवार को अविलंब सहायता देने की मांग की है.

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