न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

गिरिडीह : एनएसपीएम के दो उग्रवादी गिरफ्तार, पिस्टल, कार्बाइन सहित कई हथियार भी बरामद

पुलिस ने गिरफ्तार उग्रवादियों के पास से एक पिस्टल, देसी कार्बाइन, 14 कारतूस, दो मोबाइल, एक बाइक समेत कई चीजें बरामद की हैं.

125

Giridih : गिरिडीह की बगोदर पुलिस ने बगोदर थाना क्षेत्र के अटका बिहारो में छापेमारी कर एनएसपीएम नाम के उग्रवादी संगठन के दो हार्डकोर उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गिरफ्तार उग्रवादियों के पास से एक पिस्टल, देसी कार्बाइन, 14 कारतूस, दो मोबाइल, एक बाइक समेत कई चीजें बरामद की हैं.

इसे भी पढ़ें – हमलावर हुए शत्रुघ्न सिन्हा, ट्वीट कर कहा – राफेल की सच्चाई बतायें प्रधानमंत्री जी

लेवी लेता है संगठन

बगोदर-सरिया अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिनोद कुमार महतो ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में बताया कि अटका फायरिंग कांड को लेकर सघन छापेमारी के दौरान पुलिस को यह सफलता मिली. उन्होंने बताया कि इस संगठन के अपराधी सरकारी ठेका और योजनाओं में लेवी लेने का काम करते हैं. वहीं काफी दिनों से इनकी दहशत की वजह से ठेकेदार काम नहीं कर पा रहे थे. इनकी सक्रियता से इलाके में विकास कार्य प्रभावित हो रहा था. उन्होंने कहा कि इस गिरोह के सरगना उमेश गिरि उर्फ उमेश पांडे और उसके अन्य साथियों की तलाश में भी पुलिस सघन छापेमारी कर रही है. उन्हें भी शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जायेगा.

इसे भी पढ़ें : आरएसएस प्रमुख ने कहा- विपक्ष राम मंदिर का नहीं कर सकता विरोध

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: