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गिरिडीह सांसद ने मनरेगा कर्मियों का मामला संसद में उठाया

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Gomia: गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय ने सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान मनरेगा कर्मियों का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि झारखंड में सितम्बर 2007 में मनरेगा अधिनियम के अंतर्गत तृतीय संवर्ग पंचायत सेवक के समकक्ष मानते हुए मनरेगा कर्मियों को झारखंड सरकार के आरक्षण नियमों के तहत संविदा पर रखा गया था. जिसमें प्रखण्ड कार्यक्रम पदाधिकारी, रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, लेखा सहायक एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर  आदि शामिल थे. ये सभी मनरेगा कर्मी सरकार के विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतारते हैं.

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कर्मियों के हड़ताल से रोजगार प्रभावित

रवीन्द्र पाण्डेय ने बताया कि मनरेगा कर्मियों (रोजगार सेवकों) को वर्तमान में प्रतिमाह 5200 रुपये मानदेय दिया जा रहा है, जो कि झारखंड सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में निर्धारित अर्द्ध कुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी से भी कम है. सुप्रीम कोर्ट के 2016 के आदेश के बावजूद अभी तक समान कार्य के बदले समान वेतन नहीं दिया जा रहा है. साथ ही 10 सालों की सेवा पूरी करनेवालों को भी नियमित नहीं किया जा रहा है. श्रम विभाग के नोटिफिकेशन 18 19/01/2017 के तहत न्यूनतम वेतनमान 26,000/-रुपये होना चाहिए जो कि इन मनरेगा कर्मियों को उपलब्ध नहीं है. उन्होंने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि पिछले 15 नवंबर से झारखंड राज्यभर के मनरेगा पदाधिकारी/कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे गांवो में रोजगार का अभाव हो गया है एवं विकास कार्य प्रभावित है. वर्तमान में राज्य में सुखाड़ की भयावह स्थिति है, जिसके कारण मजदूरों का पलायन हो रहा है. सांसद ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि मनरेगा कर्मियों की वेतन बढ़ोतरी के साथ इन्हें स्थायीकरण किया जाय.

कोयला आवंटन का मामला उठाया

इसके साथ ही सांसद ने बीसीसीएल में इ-ऑक्शन के तहत कोयला आवंटन का मामला उठाते हुए कहा कि बीसीसीएल में इ-ऑक्शन के तहत कोयले का आवंटन बंद हो गया है. जिससे जहां लाखों असंगठित मजदूरों के समक्ष भूखमरी की स्थिति है वहीं बीसीसीएल को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है. वहीं लगभग 200 बेरोजगार युवक जो 50-100 टन की बोली लगाकर अपना जीवकोपार्जन चलाते हैं, उनके समक्ष भी भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. इसलिए केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि बीसीसीएल के विभिन्न कोलियरियों में  इ-ऑक्शन के तहत कोयला का आवंटन यथाशीघ्र दिया जाये.

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